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रक्त बदल कर नवजात की बचाई जान
Jaunpur
Updated Mon, 09 Jun 2014 05:31 AM IST
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जौनपुर। शहर के रुहट्टा स्थित ओम साईं बाल चिकित्सालय में रविवार को बाल रोग विशेषज्ञ डा. अभिषेक मिश्र ने एक्सचेंज ट्रांसफ्युजन कर नवजात की जान बचाई । मां का ब्लड ग्रुप निगेटिव और पिता का पाजिटिव होने के कारण इससे पहले दो बच्चों की मौत हो चुकी है।
शहर के अटाला मस्जिद निवासी अबुहुरैरा का ब्लड ग्रुप पाजिटिव व पत्नी नुसरत का ब्लड ग्रुप निगेटिव है। इसके चलते उनके दो बच्चों की गर्भ में ही विकृतियां उत्पन्न होने के कारण मौत हो चुकी है। शहर के एक अस्पताल में नुसरत को बच्ची पैदा हुई। प्रसव के तुरंत बाद बच्ची को पीलिया हो गया। परिवार के लोग बच्ची को लेकर ओम साईं हास्पिटल पहुंचे। यहां डा. अभिषेक मिश्र ने बच्ची का पूरा रक्त बदल दिया। डाक्टर के मुताबिक अब बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है। डा. मिश्र ने बताया कि मां का ब्लड ग्रुप निगेटिव और पिता का पाजिटिव होने की वजह से बच्चों में आरएच इनकाम्पेटिविलटी होती है, और पैदा होने के साथ ही बच्चे पीलिया से ग्रसित हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों को तुरंत एनआईसीयू में भर्ती करना चाहिए और और पीलिया बहुत तेजी से बढ़ रहा हो तो तुरंत पूरा खून निकाल कर, ओ निगेटिव ग्रुप का खून या मां के ब्लड ग्र्रुप का खून चढ़ाया जाना चाहिए। इससे बच्चे की जान बच जाएगी। इस प्रक्रिया को एक्सचेंज ट्रांसफ्युजन कहते हैं।
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शहर के अटाला मस्जिद निवासी अबुहुरैरा का ब्लड ग्रुप पाजिटिव व पत्नी नुसरत का ब्लड ग्रुप निगेटिव है। इसके चलते उनके दो बच्चों की गर्भ में ही विकृतियां उत्पन्न होने के कारण मौत हो चुकी है। शहर के एक अस्पताल में नुसरत को बच्ची पैदा हुई। प्रसव के तुरंत बाद बच्ची को पीलिया हो गया। परिवार के लोग बच्ची को लेकर ओम साईं हास्पिटल पहुंचे। यहां डा. अभिषेक मिश्र ने बच्ची का पूरा रक्त बदल दिया। डाक्टर के मुताबिक अब बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है। डा. मिश्र ने बताया कि मां का ब्लड ग्रुप निगेटिव और पिता का पाजिटिव होने की वजह से बच्चों में आरएच इनकाम्पेटिविलटी होती है, और पैदा होने के साथ ही बच्चे पीलिया से ग्रसित हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों को तुरंत एनआईसीयू में भर्ती करना चाहिए और और पीलिया बहुत तेजी से बढ़ रहा हो तो तुरंत पूरा खून निकाल कर, ओ निगेटिव ग्रुप का खून या मां के ब्लड ग्र्रुप का खून चढ़ाया जाना चाहिए। इससे बच्चे की जान बच जाएगी। इस प्रक्रिया को एक्सचेंज ट्रांसफ्युजन कहते हैं।
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