{"_id":"5de2b8af8ebc3e54e95ec36f","slug":"500-hiv-positive-increase-in-the-district-jaunpur-news-vns49724523","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले में बढ़ गए 500 एचआईवी पाजिटिव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले में बढ़ गए 500 एचआईवी पाजिटिव
विज्ञापन
जिले में बढ़ गए 500 एचआईवी पाजिटिव
संक्रमित 3000 लोग जिले में करा रहे इलाज
जौनपुर। जिले में एचआईवी पाजीटिव की संख्या बढ़ती जा रही है। विगत एड्स दिवस से इस साल एड्स दिवस के बीच 500 एचआईवी पाजिटिव की संख्या बढ़ गई है। जागरुकता अभियान चलाए जाने के बाद भी जिले में एचआईवी पा जिटिव की संख्या बढ़ना चिंता का विषय है। 29 नवंबर 2018 से 29 नवंबर 2019 के बीच 500 एचआईवी पाजीटिव बढ गए हैं। अंकड़ों पर नजर डाली जाए तो वर्ष 2018 में एचआईवी संक्र मित लोगों की संख्या 5240 थी। जबकि 29 नवंबर 2019 को यह संख्या बढ़ कर 5740 पहुंच गई है। इसमें से 3000 लोग जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर में इलाज करा रहे हैं। बाकी बाहर इलाज करा रहे हैं। एड्स से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग के अलावा कई निजी और स्वयं सेवी संस्थाओं की ओर पूरे साल भर जागरूकता अभियान चलाया जाता है।
एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशियेंसी सिन्ड्रोम) के कारण होने वाली मौतों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। चिकित्सकों का कहना है कि कुछ सरल उपाय अपनाकर इस बीमारी पर लगाम लगाई जा सकती है। जिला अस्ताल के सीएमएस डा. अभिमन्यु कुमार का कहना है कि एड्स एचआईवी के कारण होता है। इस सिन्ड्रोम में शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत कमजोर हो जाती है। जिससे व्यक्ति बड़ी आसानी से किसी भी संक्रमण या अन्य बीमारी की चपेट में आ जाता है। सिन्ड्रोम के बढ़ने के साथ लक्षण और गंभीर होते चले जाते हैं।
इनसेट-----
क्या है एड्स --
जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर के चिकित्सक डा. शफीक खान का कहना है कि एड्स (एचआईवी) नामक विषाणु से होता है। संक्रमण के लगभग 12 सप्ताह के बाद ही रक्त की जॉंच से ज्ञात होता है कि यह विषाणु शरीर में प्रवेश कर चुका है। ऐसे व्यक्ति को एचआईवी पाजिटिव कहते हैं। एचआईवी. पाजिटिव व्यक्ति कई वर्षो (6 से 10 वर्ष) तक सामान्य प्रतीत होता है। और सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है। लेकिन दूसरो को बीमारी फैलाने में सक्षम होता है।
विज्ञापन
यह विषाणु मुख्यत शरीर को बाहरी रोगों से सुरक्षा प्रदान करने वाले रक्त में मौजूद टी कोशिकाओं (सेल्स) व मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रभावित करता है। और धीरे-धीरे उन्हें नष्ट करता रहता है। कुछ वर्षो बाद (6 से 10 वर्ष) यह स्थिति हो जाती है कि शरीर आम रोगों के कीटाणुओं से अपना बचाव नहीं कर पाता और संक्रमण (इन्फेक्शन) से ग्रसित होने लगता है।
इनसेट--
कैसे फैलता है एड्स
एक से अधिक लोगों से यौन संबंध रखने वाला व्यक्ति में एड्स होने का खतरा बढ़ जाता है। वेश्यावृति करने वालों से यौन सम्पर्क रखने वाला व्यक्ति, नशीली दवाईयां इन्जेकशन के द्वारा लेने वाला व्यक्ति, यौन रोगों से पीडित व्यक्ति के अलावा माता और पिता के एचआईवी संक्रमण के पश्चात पैदा होने वाले बच्चें में इसकी संभावना अधिक रहती है। किसी भी अन्य व्यक्ति के खून या अन्य बॉडी फ्लूड से दूर रहना चाहिए। ड्रग्स के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सिरिंज को शेयर करना एचआईवी फैलने का मुख्य कारण माना जाता है। एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला से उसके बच्चे में एचआईवी का संक्रमण हो सकता है।
इनसेट---
कैसे करें एड्स से बचाव--
एड्स से बचावके लिए यह जरूरी है कि जीवन साथी के अलावा किसी अन्य से यौन संबंध न बनाए। यौन सम्पर्क के समय निरोध (कण्डोम) का प्रयोग करें। मादक औषधियों के आदी व्यक्ति के द्वारा उपयोग में ली गई सिरिंज व सूई का प्रयोग न करें। एड्स पीडित महिलाएं गर्भधारण न करने पाए। क्योंकि उनसे पैदा होने वाले शिशुओं में भी यह रोग फैल सकता है। रक्त की आवश्यकता होने पर अनजान व्यक्ति का रक्त नहीं लेना चाहिए। सुरक्षित रक्त के लिए एचआईवी की जांच करा कर ही रक्त लेना चाहिए। सिरिंज एवं सूई तथा अन्य चिकित्सीय उपकरणों का 20 मिनट पानी में उबालकर जीवाणुरहित करके ही उपयोग में लाना चाहिए। दूसरे व्यक्ति के दरा प्रयोग में लाए गए ब्लेड का उपयोग न करें।
विज्ञापन
संक्रमित 3000 लोग जिले में करा रहे इलाज
जौनपुर। जिले में एचआईवी पाजीटिव की संख्या बढ़ती जा रही है। विगत एड्स दिवस से इस साल एड्स दिवस के बीच 500 एचआईवी पाजिटिव की संख्या बढ़ गई है। जागरुकता अभियान चलाए जाने के बाद भी जिले में एचआईवी पा जिटिव की संख्या बढ़ना चिंता का विषय है। 29 नवंबर 2018 से 29 नवंबर 2019 के बीच 500 एचआईवी पाजीटिव बढ गए हैं। अंकड़ों पर नजर डाली जाए तो वर्ष 2018 में एचआईवी संक्र मित लोगों की संख्या 5240 थी। जबकि 29 नवंबर 2019 को यह संख्या बढ़ कर 5740 पहुंच गई है। इसमें से 3000 लोग जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर में इलाज करा रहे हैं। बाकी बाहर इलाज करा रहे हैं। एड्स से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग के अलावा कई निजी और स्वयं सेवी संस्थाओं की ओर पूरे साल भर जागरूकता अभियान चलाया जाता है।
एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशियेंसी सिन्ड्रोम) के कारण होने वाली मौतों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। चिकित्सकों का कहना है कि कुछ सरल उपाय अपनाकर इस बीमारी पर लगाम लगाई जा सकती है। जिला अस्ताल के सीएमएस डा. अभिमन्यु कुमार का कहना है कि एड्स एचआईवी के कारण होता है। इस सिन्ड्रोम में शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत कमजोर हो जाती है। जिससे व्यक्ति बड़ी आसानी से किसी भी संक्रमण या अन्य बीमारी की चपेट में आ जाता है। सिन्ड्रोम के बढ़ने के साथ लक्षण और गंभीर होते चले जाते हैं।
विज्ञापन
इनसेट-----
क्या है एड्स --
जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर के चिकित्सक डा. शफीक खान का कहना है कि एड्स (एचआईवी) नामक विषाणु से होता है। संक्रमण के लगभग 12 सप्ताह के बाद ही रक्त की जॉंच से ज्ञात होता है कि यह विषाणु शरीर में प्रवेश कर चुका है। ऐसे व्यक्ति को एचआईवी पाजिटिव कहते हैं। एचआईवी. पाजिटिव व्यक्ति कई वर्षो (6 से 10 वर्ष) तक सामान्य प्रतीत होता है। और सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है। लेकिन दूसरो को बीमारी फैलाने में सक्षम होता है।
विज्ञापन
यह विषाणु मुख्यत शरीर को बाहरी रोगों से सुरक्षा प्रदान करने वाले रक्त में मौजूद टी कोशिकाओं (सेल्स) व मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रभावित करता है। और धीरे-धीरे उन्हें नष्ट करता रहता है। कुछ वर्षो बाद (6 से 10 वर्ष) यह स्थिति हो जाती है कि शरीर आम रोगों के कीटाणुओं से अपना बचाव नहीं कर पाता और संक्रमण (इन्फेक्शन) से ग्रसित होने लगता है।
इनसेट--
कैसे फैलता है एड्स
एक से अधिक लोगों से यौन संबंध रखने वाला व्यक्ति में एड्स होने का खतरा बढ़ जाता है। वेश्यावृति करने वालों से यौन सम्पर्क रखने वाला व्यक्ति, नशीली दवाईयां इन्जेकशन के द्वारा लेने वाला व्यक्ति, यौन रोगों से पीडित व्यक्ति के अलावा माता और पिता के एचआईवी संक्रमण के पश्चात पैदा होने वाले बच्चें में इसकी संभावना अधिक रहती है। किसी भी अन्य व्यक्ति के खून या अन्य बॉडी फ्लूड से दूर रहना चाहिए। ड्रग्स के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सिरिंज को शेयर करना एचआईवी फैलने का मुख्य कारण माना जाता है। एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला से उसके बच्चे में एचआईवी का संक्रमण हो सकता है।
इनसेट---
कैसे करें एड्स से बचाव--
एड्स से बचावके लिए यह जरूरी है कि जीवन साथी के अलावा किसी अन्य से यौन संबंध न बनाए। यौन सम्पर्क के समय निरोध (कण्डोम) का प्रयोग करें। मादक औषधियों के आदी व्यक्ति के द्वारा उपयोग में ली गई सिरिंज व सूई का प्रयोग न करें। एड्स पीडित महिलाएं गर्भधारण न करने पाए। क्योंकि उनसे पैदा होने वाले शिशुओं में भी यह रोग फैल सकता है। रक्त की आवश्यकता होने पर अनजान व्यक्ति का रक्त नहीं लेना चाहिए। सुरक्षित रक्त के लिए एचआईवी की जांच करा कर ही रक्त लेना चाहिए। सिरिंज एवं सूई तथा अन्य चिकित्सीय उपकरणों का 20 मिनट पानी में उबालकर जीवाणुरहित करके ही उपयोग में लाना चाहिए। दूसरे व्यक्ति के दरा प्रयोग में लाए गए ब्लेड का उपयोग न करें।