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जिले में एड्स के 2835 मरीज, घर पर रहकर करा रहे इलाज

Wed, 01 Dec 2021 12:07 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 01 Dec 2021 12:07 PM IST
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2835 AIDS patients in the district, getting treatment at home
जौनपुर। जिले में एड्स के मरीजों की संख्या हर साल बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान के बावजूद मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस समय जिले में कुल 2835 मरीज इलाज ले रहे हैं। अप्रैल 2021 से अक्तूबर 2021 तक 2959 लोगों की स्क्रीनिंग कराई गई, जिसमें 90 पॉजीटिव पाए गए। इनका इलाज जिला के एआरटी केंद्रों के जरिए चल रहा है। विगत वर्ष अप्रैल 2020 से मार्च 2021 कुल 7484 लोगों की स्क्रीनिंग कराई गई थी। इसमें कुल 180 लोग एचआईवी पॉजीटिव मिले थे। इनका उपचार एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी) केंद्र पर शुरू किया गया था। वर्तमान में जिले में कुल 2835 लोग इलाज ले रहे हैं। एड्स के जिला नोडल समन्वयक डा. राकेश कुमार का कहना है कि एड्स एक यौन जनित रोग है, जो एक से अधिक लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाने, संक्रमित खून चढ़ाने, संक्रमित सुई लगने और संक्रमित मां से नवजात में हो सकता है। अब यह बीमारी लाइलाज नहीं है। बचाव ही इसका समाधान है। यह रोग किशोरों और युवाओं में यौन संबंध बनाने से होता है। इसलिए समाज में जागरूकता बहुत जरूरी है। जरा भी शंका होने पर तुरंत जांच करानी चाहिए।
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एड्स का ऐसे चलता है पता
जौनपुर। एड्स एचआईवी संक्रमण की आखिरी स्थिति होती है। बुखार आना, वजन कम होना, खासी आना, सांस फूलना, थकावट महसूस करना इसके लक्षण होते हैं। ऐसा होने पर खून की जांच करानी चाहिए। ताकि संक्रमण का पता लग सके। एचआइवी की बीमारी 20-35 उम्र के युवाओं में अधिक होती है। 95 फीसद लोगों को यौन जनित कारणों, संक्रमित खून चढ़ने, संक्रमित मां से नवजात में, संक्रमित सुई से इंजेक्शन लगाने वालों में फैलने की संभावना रहती है। हर एचआइवी संक्रमित को दवा की जरूरत नहीं होती है। जरूरत पड़ती है तो सरकारी और प्राइवेट स्तर पर इलाज हो सकता है। नाको (नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन) की मदद से एआरटी सेंटर चलाए जा रहे है। जहां मरीजों की मुफ्त जांच और दवाइयां दी जाती है।
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एड्रस से बचाव के लिए बरतें सावधानी
सुरक्षित यौन संबंध पर रखें ध्यान।
सुई लगवाते समय हमेश नई सुई का इस्तेमाल करें।
ब्लड ट्रांसफ्यूजन के समय जांच जरूर कराएं।
एड्स का कोई उपचार बचाव का टीका नहीं हैं।
जीवाणुरहित अथवा डिस्पोजेबल सिरिंज ही उपयोग करें।
एचआइवी संक्रमित महिला गर्भधारण न करें।
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