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पाइप क्षतिग्रस्त होने से सात वर्षो से पेयजल आपूर्ति है ठप
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केराकत। नगर के नहरन स्थित सिंचाई डाक बंगला परिसर में स्थित 63 वर्ष पूरानी पानी की टंकी जर्जर हो चुकी है, जो कभी भी गिर सकती है। वहीं इस टंकी की पाइप क्षतिग्रस्त होने से सात वर्षो से पेयजल आपूर्ति ठप हो गई है। जिससे 30 घरों में पानी की सप्लाई नहीं हो रही है। वे पानी के लिए इधर-उधर भटकने को विवश हैं।
नरहन स्थित सिंचाई डाक बंगला में डाक बंगला में प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत वर्ष 1956 में पानी की टंकी का निर्माण किया गया था। इस पानी की टंकी से सिंचाई और पीने के लिए पानी की आपूर्ति की जाती थी। लेकिन धीरे-धीरे मरम्मत नहीं होने से पानी की टंकी जर्जर हो चुकी हैख् जो कभी भी गिर सकती है। वहीं इस पर पेड़ उग आए हैं। वहीं इस पानी की टंकी से अभी भी खेतों की सिंचाई होती है। लेकिन पानी सप्लाई की पाइप क्षतिग्रस्त हो गई है। जिससे पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। जिससे 30 घरों के लोगों को पानी के लिए दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वे इधर-उधर भटकने को विवश हैं।
सिंचाई विभाग का डाक बंगला बदहाल
केराकत। नरहन में बना सिंचाई विभाग का डाकबंगला इस समय भूत खाना बन चुका है। चार पांच दशक पूर्व कभी शासन प्रशासन में बैठे अधिकारियों, मंत्रियों, जन प्रतिनिधियों के क्षेत्र भ्रमण के दौरान यह डाकबंगला आशियाना हुआ करता था। किन्तु विभागीय उदासीनता के चलते इस समय जर्जर हो चला है कि इसमें हर कोई रहने से कतराता है। सींच पर्यवेक्षक अर्जुन सिंह, जिलेदार प्रभूनाथ, मुंशी अनिल कुमार व चौकीदार कुंवर यादव का कहना है कि हम लोगों के रहने के लिए बना आवास भी काफी जर्जर हो चुका है। उसमें हम लोग जान जोखिम में डालकर रहने पर विवश हैं। उनका कहना है कि डाकबंगला में रात में रहने पर कभी भयानक डरावने जैसी आवाज आती है। इस लिए और भी कोई रहन चाहता।
नरहन स्थित सिंचाई डाक बंगला में डाक बंगला में प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत वर्ष 1956 में पानी की टंकी का निर्माण किया गया था। इस पानी की टंकी से सिंचाई और पीने के लिए पानी की आपूर्ति की जाती थी। लेकिन धीरे-धीरे मरम्मत नहीं होने से पानी की टंकी जर्जर हो चुकी हैख् जो कभी भी गिर सकती है। वहीं इस पर पेड़ उग आए हैं। वहीं इस पानी की टंकी से अभी भी खेतों की सिंचाई होती है। लेकिन पानी सप्लाई की पाइप क्षतिग्रस्त हो गई है। जिससे पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। जिससे 30 घरों के लोगों को पानी के लिए दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वे इधर-उधर भटकने को विवश हैं।
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सिंचाई विभाग का डाक बंगला बदहाल
केराकत। नरहन में बना सिंचाई विभाग का डाकबंगला इस समय भूत खाना बन चुका है। चार पांच दशक पूर्व कभी शासन प्रशासन में बैठे अधिकारियों, मंत्रियों, जन प्रतिनिधियों के क्षेत्र भ्रमण के दौरान यह डाकबंगला आशियाना हुआ करता था। किन्तु विभागीय उदासीनता के चलते इस समय जर्जर हो चला है कि इसमें हर कोई रहने से कतराता है। सींच पर्यवेक्षक अर्जुन सिंह, जिलेदार प्रभूनाथ, मुंशी अनिल कुमार व चौकीदार कुंवर यादव का कहना है कि हम लोगों के रहने के लिए बना आवास भी काफी जर्जर हो चुका है। उसमें हम लोग जान जोखिम में डालकर रहने पर विवश हैं। उनका कहना है कि डाकबंगला में रात में रहने पर कभी भयानक डरावने जैसी आवाज आती है। इस लिए और भी कोई रहन चाहता।
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