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जौनपुर की जनता का सता से बगावत का है पुराना नाता
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जौनपुर। जौनपुर की जनता को धारा के विपरीत तैरने की आदत रही है। पहले और दूसरे लोकसभा चुनाव में तो जिले के मतदाता सत्ता के साथ कदम ताल कर चले लेकिन उसके बाद उन्होंने तीसरी लोकसभा में अपनी उल्टी चाल दिखा दी। ज्यादातर समय जौनपुर ने विपक्ष में ही बैठने वाला सांसद चुनना ही श्रेयष्कर समझा। जिस दल की सरकार बनी उसके बजाय जौनपुर किसी दूसरी पार्टी के नेता को चुनकर संसद में भेजा।
एक बार फिर यहां के वोटरों ने सत्ता विरोधी इतिहास को दोहराया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार जहां एक बार फिर भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापस हुई है लेकिन जौनपुर ने गठबंधन प्रत्याशी श्याम सिंह यादव को जिताया है। आजादी के बाद से लेकर1977 तक लगातार देश में कांग्रेस की सरकार रही है। शुरुआत में दो बार यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी जीते लेकिन 1962 में हुए तीसरे लोकसभा के चुनाव में जौनपुर से जनसंघ के ब्रह्मजीत को जनता ने चुना। 1977 में मोरार जी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी तो उस वक्त जौनपुर से बीएलडी से यादवेंद्र दत्त दुबे सांसद चुने गए थे। 1980 में कांग्रेस की इंदिरा गांधी जब दोबारा पीएम बनी तो उस वक्त जौनपुर से जेएनपी(एस) के अजीजुल्ला सांसद चुने गए। 1991 में जब नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी लेकिन जौैनपुर की जनता ने जनता दल से अर्जुन यादव को सांसद चुना। 1996 में भाजपा के राजकेशर सिंह सांसद चुने गए। अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने लेकिन 13 दिन में सरकार गिर गई। एचडी देव गौड़ा पीएम बने और जौनपुर के सांसद को विपक्ष में बैठना पड़ा। 1998 में जब अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व में दोबारा भाजपा की सरकार बनी तो उस चुनाव में यहां से सपा के पारसनाथ यादव सांसद चुने गए थे। 2004 में यूपीए की सरकार बनी। डा. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। तब सपा के पारसनाथ यादव ही यहां से दोबारा संसद पहुंचे थे। 2009 में मनमोहन सिंह दोबारा पीएम बने तो उस चुनाव में यहां से बसपा से धनंजय सिंह सांसद चुने गए थे। वर्ष 1999 और 2014 का चुनाव इसका अपवाद रहा। 1999 में भाजपा की सरकार बनी तो यहां के सांसद चिन्मयानंद सांसद गृह राज्यमंत्री बने। 2014 में की मोदी लहर में केपी सिंह जीत कर संसद में पहुंचे। मगर अबकी बार जौनपुर ने गठबंधन के प्रत्याशी श्याम सिंह यादव पर भरोसा जताया है।
एक बार फिर यहां के वोटरों ने सत्ता विरोधी इतिहास को दोहराया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार जहां एक बार फिर भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापस हुई है लेकिन जौनपुर ने गठबंधन प्रत्याशी श्याम सिंह यादव को जिताया है। आजादी के बाद से लेकर1977 तक लगातार देश में कांग्रेस की सरकार रही है। शुरुआत में दो बार यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी जीते लेकिन 1962 में हुए तीसरे लोकसभा के चुनाव में जौनपुर से जनसंघ के ब्रह्मजीत को जनता ने चुना। 1977 में मोरार जी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी तो उस वक्त जौनपुर से बीएलडी से यादवेंद्र दत्त दुबे सांसद चुने गए थे। 1980 में कांग्रेस की इंदिरा गांधी जब दोबारा पीएम बनी तो उस वक्त जौनपुर से जेएनपी(एस) के अजीजुल्ला सांसद चुने गए। 1991 में जब नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी लेकिन जौैनपुर की जनता ने जनता दल से अर्जुन यादव को सांसद चुना। 1996 में भाजपा के राजकेशर सिंह सांसद चुने गए। अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने लेकिन 13 दिन में सरकार गिर गई। एचडी देव गौड़ा पीएम बने और जौनपुर के सांसद को विपक्ष में बैठना पड़ा। 1998 में जब अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व में दोबारा भाजपा की सरकार बनी तो उस चुनाव में यहां से सपा के पारसनाथ यादव सांसद चुने गए थे। 2004 में यूपीए की सरकार बनी। डा. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। तब सपा के पारसनाथ यादव ही यहां से दोबारा संसद पहुंचे थे। 2009 में मनमोहन सिंह दोबारा पीएम बने तो उस चुनाव में यहां से बसपा से धनंजय सिंह सांसद चुने गए थे। वर्ष 1999 और 2014 का चुनाव इसका अपवाद रहा। 1999 में भाजपा की सरकार बनी तो यहां के सांसद चिन्मयानंद सांसद गृह राज्यमंत्री बने। 2014 में की मोदी लहर में केपी सिंह जीत कर संसद में पहुंचे। मगर अबकी बार जौनपुर ने गठबंधन के प्रत्याशी श्याम सिंह यादव पर भरोसा जताया है।
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