{"_id":"5c169301bdec2253a424114a","slug":"15449833359-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्वांचल राज्य निर्माण करने की बुलंद की आवाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्वांचल राज्य निर्माण करने की बुलंद की आवाज
Updated Sun, 16 Dec 2018 11:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मड़ियाहूं । पूर्वांचल राज्य निर्माण को लेकर पूर्वांचल राज्य गठन मोर्चा की रविवार को बलभद्र इंटर कालेज पाली सुबासपुर में हुई जन सभा में पूर्वांचल राज्य निर्माण की मांग को लेकर आवाज बुलंद की गई।
मोर्चा के संयोजक राजकुमार ओझा ने कहा कि पूर्वांचल की दुर्दशा, गरीबी, बेकारी, पिछड़ेपन को दूर करने के लिए लगातार आवाज उठाई जाती रही है लेकिन सरकार को इसकी चिंता नहिीं सता रही है। जब तक पूर्वांचल राज्य का गठन नहीं होगा तब तक पूर्वांचल की दुर्दशा दूर नहीं होगी। पूर्वांचल की धरती के बूते पर ही कोई केंद्र की सत्ता में आसीन हो सकता है। पिछले 70 वर्षों में 40 साल देश व प्रदेश सरकारों के गठन में पूर्वांचल की भूमिका रही है लेकिन उसकी लगातार उपेक्षा की जाती रही। पहले कांग्रेस ने छला और अब भाजपा, सपा व बसपा ने जाति, धर्म, संप्रदाय से जनता को गुमराह कर सत्ता हथियाने में जुटी हैं।
इससे पूर्वांचल का विकास नहीं हो पाया। पूर्वांचल राज्य गठन मोर्चा पूर्वांचल राज्य गठन और उसकी राजधानी जौनपुर बनाने की मांग करता रहा है। क्षेत्र के औद्योगिक विकास कर युवाओं का पलायन रोका जा सकता है। गोरखपुर-नेपाल सीमा पर बिजलीघर की सथापना, गोरखपुर, शिवपुर व वाराणसी में स्थापित खाद फैक्ट्री का जीर्णोद्धार करने, सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में तकनीकि शिक्षा अनिवार्य होगी, समान शिखा कानून को लागू कराना आदि है।कार्यक्रम की अध्यक्षता इस्तियाक खां व संचालन नूर अहमद ने किया। इस अवसर पर डा.गौरीशंकर त्रिपाठी, संजय उपाध्याय, अमित तिवारी, राजकुमार गौतम, तिलकधारी यादव आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
मोर्चा के संयोजक राजकुमार ओझा ने कहा कि पूर्वांचल की दुर्दशा, गरीबी, बेकारी, पिछड़ेपन को दूर करने के लिए लगातार आवाज उठाई जाती रही है लेकिन सरकार को इसकी चिंता नहिीं सता रही है। जब तक पूर्वांचल राज्य का गठन नहीं होगा तब तक पूर्वांचल की दुर्दशा दूर नहीं होगी। पूर्वांचल की धरती के बूते पर ही कोई केंद्र की सत्ता में आसीन हो सकता है। पिछले 70 वर्षों में 40 साल देश व प्रदेश सरकारों के गठन में पूर्वांचल की भूमिका रही है लेकिन उसकी लगातार उपेक्षा की जाती रही। पहले कांग्रेस ने छला और अब भाजपा, सपा व बसपा ने जाति, धर्म, संप्रदाय से जनता को गुमराह कर सत्ता हथियाने में जुटी हैं।
विज्ञापन
इससे पूर्वांचल का विकास नहीं हो पाया। पूर्वांचल राज्य गठन मोर्चा पूर्वांचल राज्य गठन और उसकी राजधानी जौनपुर बनाने की मांग करता रहा है। क्षेत्र के औद्योगिक विकास कर युवाओं का पलायन रोका जा सकता है। गोरखपुर-नेपाल सीमा पर बिजलीघर की सथापना, गोरखपुर, शिवपुर व वाराणसी में स्थापित खाद फैक्ट्री का जीर्णोद्धार करने, सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में तकनीकि शिक्षा अनिवार्य होगी, समान शिखा कानून को लागू कराना आदि है।कार्यक्रम की अध्यक्षता इस्तियाक खां व संचालन नूर अहमद ने किया। इस अवसर पर डा.गौरीशंकर त्रिपाठी, संजय उपाध्याय, अमित तिवारी, राजकुमार गौतम, तिलकधारी यादव आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन