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वविह शारीरिक संबंध नहीं बल्कि दो आत्माओं का है मिलन
Updated Tue, 27 Nov 2018 12:31 AM IST
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सतहरिया। महाराष्ट्र के कथावाचक आचार्य पंडित मनोज पांडेय ने रुक्मिणी व कृष्ण विवाह प्रसंग का मनोहारी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि विवाह दो आत्माओं का मिलन है। कृष्ण और रुक्मिणी का विवाह भगवान कृष्ण के प्रति भाव भक्ति के साथ समर्पण था। वह मुंगराबादशाहपुर मोहल्ला कटरा के बलिभद्र पैलैस में चल रहे कथा के आखिरी दिन भक्तों के बीच प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण की आठ पटरानियां व सोलह हजार एक सौ रानियां थीं। महर्षि नारद जब द्वारिका धीश के महल में परीक्षा के लिए पहुंचे तो उन्होंने ने देखा कि हर कक्ष में भगवान कृष्ण अपने रानियों के साथ मौजूद हैं। तब नारद को पता चला कि कृष्ण ब्रह्रम है। जिसकी लीला अपरम्पार है। रुक्मिणी और कृष्ण का विवाह दृश्य देखकर भक्त गण झूम उठे। मंगल गीतों व नृत्य से पैलेस परिसर कृष्ण मय हो गया। श्रद्धालुओं ने रुक्मिणी व कृष्ण नृत्य को देख कर भाव विभोर हो गए। पुष्पों की वर्षा से उनका अभिवादन किया गया। रुक्मिणी शिवांगी तिवारी तथा कृष्ण की शिखा तिवारी ने भूमिका निभाई। आचार्य ने सुदामा चरित्र का भाव पूर्ण वर्णन किया। कहा कि निर्धन ब्राह्रमण सुदामा के साथ भगवान कृष्ण का व्यवहार दोस्ताना था। भगवान के प्रति भाव भक्ति के कारण वह अटूट था। दरिद्रता के समय सीमा के अंतर्गत भगवान चाह कर भी उसकी मदद नहीं कर सकते है। सपा नगर अध्यक्ष ओमप्रकाश टैगोर ने अंगवस्त्र देकर आचार्य को सम्मानित किया। पांव पूजन के साथ मुख्य यजमान राजेंद्र तिवारी सहित परिजनों, श्रद्धालुओ ने संत के चरणों का आशीर्वाद लिया। उन्हे उपहार भेंट कर उनकी विदाई की। संचालन पं. जयदीप शास्त्री ने तथा मुख्य यजमान राजेंद्र तिवारी ने आभार ज्ञापित किया। मुख्य रूप से सभासद गणेश कुमार गुप्त, संगमलाल गुप्त, हौसला प्रसाद, राकेश कुमार, सतीश चन्द्र, राजेश चन्द्र, इन्द्र मणि, नन्हकू महराज, पूर्व चेयरमैन कपिल मुनि आदि मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण की आठ पटरानियां व सोलह हजार एक सौ रानियां थीं। महर्षि नारद जब द्वारिका धीश के महल में परीक्षा के लिए पहुंचे तो उन्होंने ने देखा कि हर कक्ष में भगवान कृष्ण अपने रानियों के साथ मौजूद हैं। तब नारद को पता चला कि कृष्ण ब्रह्रम है। जिसकी लीला अपरम्पार है। रुक्मिणी और कृष्ण का विवाह दृश्य देखकर भक्त गण झूम उठे। मंगल गीतों व नृत्य से पैलेस परिसर कृष्ण मय हो गया। श्रद्धालुओं ने रुक्मिणी व कृष्ण नृत्य को देख कर भाव विभोर हो गए। पुष्पों की वर्षा से उनका अभिवादन किया गया। रुक्मिणी शिवांगी तिवारी तथा कृष्ण की शिखा तिवारी ने भूमिका निभाई। आचार्य ने सुदामा चरित्र का भाव पूर्ण वर्णन किया। कहा कि निर्धन ब्राह्रमण सुदामा के साथ भगवान कृष्ण का व्यवहार दोस्ताना था। भगवान के प्रति भाव भक्ति के कारण वह अटूट था। दरिद्रता के समय सीमा के अंतर्गत भगवान चाह कर भी उसकी मदद नहीं कर सकते है। सपा नगर अध्यक्ष ओमप्रकाश टैगोर ने अंगवस्त्र देकर आचार्य को सम्मानित किया। पांव पूजन के साथ मुख्य यजमान राजेंद्र तिवारी सहित परिजनों, श्रद्धालुओ ने संत के चरणों का आशीर्वाद लिया। उन्हे उपहार भेंट कर उनकी विदाई की। संचालन पं. जयदीप शास्त्री ने तथा मुख्य यजमान राजेंद्र तिवारी ने आभार ज्ञापित किया। मुख्य रूप से सभासद गणेश कुमार गुप्त, संगमलाल गुप्त, हौसला प्रसाद, राकेश कुमार, सतीश चन्द्र, राजेश चन्द्र, इन्द्र मणि, नन्हकू महराज, पूर्व चेयरमैन कपिल मुनि आदि मौजूद रहे।
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