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...तो अशुद्व हुआ गोमती नदी का पानी !
Updated Mon, 12 Nov 2018 12:20 AM IST
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जौनपुर। गोमती नदी प्रदूषित हो गई है। पानी अशुद्ध हो गया है। बावजूद इसके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा किसी तरह की कोई जांच नहीं कराई गई है। स्वच्छ गोमती अभियान की ओर से संकट मोचन फाउंडेशन से तकरीबन एक साल पूर्व कराई गई जांच में गोमती नदी का पानी पशुओं के पीने योग्य भी नहीं पाया गया था। हाल ही में जल निगम ने नदी के पानी की जांच कराई जिसमें वीओडी 360 से अधिक पाया गया है। सीधे तौर पर कहा जाए तो नदी का पानी सौ फीसदी खराब हो चुका है।
जिले में ग्रामीण अंचल से लेकर शहरी क्षेत्र में गोमती नदी का दायरा तकरीबन 70 किमी का है। इसमें शहर के 21 छोटे-बड़े नालों का पानी गिर रहा है। जल निगम ने अमृत योजना के तहत इन नालों को टैप करके सीवरेज एसटीपी तक ले जाने की योजना का प्रस्ताव शासन को दुबारा भेजा है। इस पर तकरीबन 255 करोड़ 19 लाख तक का खर्च आएगा। नगर विकास राज्यमंत्री गिरीशचंद्र यादव का क्षेत्र होने के नाते लोगों को उम्मीद है कि इसकी मंजूरी मिल सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हाल ही में कहा था कि गंगा के साथ गोमती को भी स्वच्छ करने का प्रयास किया जा रहा है। गोमती का पानी गाजीपुर में गंगा में मिलता है। ऐसे में गंगा गोमती के पानी से और अधिक मैली हो रही है।
कलीचाबाद पर 5.5 शास्त्री पुल पर 28.4 है वीओडी
गोमती जैसे नगरीय क्षेत्र में बढ़ती है प्रदूषण स्तर बढ़ता जाता है। स्लाटर हाउस से लेकर सराफा मार्केट तक का केमिकल युक्त पानी इसमें लगातार गिरता है। इससे नदी की ऊपरी जलधारा में स्थित कलीचाबाद के पास पानी का वीओडी 5.5 है, जबकि नगरीय क्षेत्र के बजरंग घाट के पास यह 28.4, हनुमान घाट के पास 12.2, सद्भावना पुल के पास 8.8, शास्त्री पुल के पास 34.8 व सूरज घाट के पास 26.8 हो जाता है। यह आंकड़ा कुछ पुराना है पर नदी की स्थिति और खराब ही हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि गंगा के साथ गोमती को भी स्वच्छ करने का प्रयास किया जा रहा है। गोमती का पानी गाजीपुर में गंगा में मिलता है। ऐसे में गंगा गोमती के पानी से और अधिक मैली हो रही है पर सीएम के कहने के बाद भी कहीं कोई परिवर्तन नहीं दिख रहा है।
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क्या कहते हैं वैज्ञानिक
देश के जाने माने रसायन विज्ञानी और आईएमएस धनबाद के डीन प्रो. इंद्रमणि मिश्र कहते हैं कि जौनपुर के नगरीय क्षेत्र में प्रदूषण के स्तर में 10 गुने की वृद्धि चिंताजनक है। नगरीय क्षेत्र में गोमती को प्रदूषित करने वाले 21 नालों पर जलमल शोधन यंत्र लगाकर जब तक उन्हें बंद नहीं किया जाएगा तब तक इस समस्या का हल संभव नहीं है।
बंद नहीं हुए नाले तो गंदा पानी पीएंगे लोग
जौनपुर। स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता का कहना है कि जौनपुर शहर की आबादी तकरीबन चार लाख है। इन्हें पेयजल की आपूर्ति करने वाले जल संस्थान की निर्भरता काफी हद तक गोमती पर है। अगर गोमती नदी में नालों का गिरना बंद नहीं हुआ तो लोग गंदा पानी पीने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि नदी में फीकल कॉलीफार्म काउंट पांच हजार से कम होना चाहिए जबकि संकट मोचन फाउंडेशन लैब वाराणसी की जांच में स्लाटर हाउस के पास से हनुुमान घाट पर पौने दो लाख और शास्त्री पुल से बलुआ घाट के बीच तीन लाख काउंट कॉलीफॉर्म मिला है।
जिले में ग्रामीण अंचल से लेकर शहरी क्षेत्र में गोमती नदी का दायरा तकरीबन 70 किमी का है। इसमें शहर के 21 छोटे-बड़े नालों का पानी गिर रहा है। जल निगम ने अमृत योजना के तहत इन नालों को टैप करके सीवरेज एसटीपी तक ले जाने की योजना का प्रस्ताव शासन को दुबारा भेजा है। इस पर तकरीबन 255 करोड़ 19 लाख तक का खर्च आएगा। नगर विकास राज्यमंत्री गिरीशचंद्र यादव का क्षेत्र होने के नाते लोगों को उम्मीद है कि इसकी मंजूरी मिल सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हाल ही में कहा था कि गंगा के साथ गोमती को भी स्वच्छ करने का प्रयास किया जा रहा है। गोमती का पानी गाजीपुर में गंगा में मिलता है। ऐसे में गंगा गोमती के पानी से और अधिक मैली हो रही है।
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कलीचाबाद पर 5.5 शास्त्री पुल पर 28.4 है वीओडी
गोमती जैसे नगरीय क्षेत्र में बढ़ती है प्रदूषण स्तर बढ़ता जाता है। स्लाटर हाउस से लेकर सराफा मार्केट तक का केमिकल युक्त पानी इसमें लगातार गिरता है। इससे नदी की ऊपरी जलधारा में स्थित कलीचाबाद के पास पानी का वीओडी 5.5 है, जबकि नगरीय क्षेत्र के बजरंग घाट के पास यह 28.4, हनुमान घाट के पास 12.2, सद्भावना पुल के पास 8.8, शास्त्री पुल के पास 34.8 व सूरज घाट के पास 26.8 हो जाता है। यह आंकड़ा कुछ पुराना है पर नदी की स्थिति और खराब ही हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि गंगा के साथ गोमती को भी स्वच्छ करने का प्रयास किया जा रहा है। गोमती का पानी गाजीपुर में गंगा में मिलता है। ऐसे में गंगा गोमती के पानी से और अधिक मैली हो रही है पर सीएम के कहने के बाद भी कहीं कोई परिवर्तन नहीं दिख रहा है।
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क्या कहते हैं वैज्ञानिक
देश के जाने माने रसायन विज्ञानी और आईएमएस धनबाद के डीन प्रो. इंद्रमणि मिश्र कहते हैं कि जौनपुर के नगरीय क्षेत्र में प्रदूषण के स्तर में 10 गुने की वृद्धि चिंताजनक है। नगरीय क्षेत्र में गोमती को प्रदूषित करने वाले 21 नालों पर जलमल शोधन यंत्र लगाकर जब तक उन्हें बंद नहीं किया जाएगा तब तक इस समस्या का हल संभव नहीं है।
बंद नहीं हुए नाले तो गंदा पानी पीएंगे लोग
जौनपुर। स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता का कहना है कि जौनपुर शहर की आबादी तकरीबन चार लाख है। इन्हें पेयजल की आपूर्ति करने वाले जल संस्थान की निर्भरता काफी हद तक गोमती पर है। अगर गोमती नदी में नालों का गिरना बंद नहीं हुआ तो लोग गंदा पानी पीने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि नदी में फीकल कॉलीफार्म काउंट पांच हजार से कम होना चाहिए जबकि संकट मोचन फाउंडेशन लैब वाराणसी की जांच में स्लाटर हाउस के पास से हनुुमान घाट पर पौने दो लाख और शास्त्री पुल से बलुआ घाट के बीच तीन लाख काउंट कॉलीफॉर्म मिला है।