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गोवर्धन पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा
Updated Sat, 10 Nov 2018 12:22 AM IST
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जौनपुर। ढालगर टोला में गुरुवार को श्रीरसिया संकीर्तन मंडल की ओर से गोवर्धन पूजा का आयोजन किया गया। शशांक सिंह ‘रानू’ ने रसिया के माध्यम से गोवर्धन लीला का बखान किया।
उन्होंने कहा कि प्रभु ने विचार किया कि जब तक इन ब्रजवासियों के हृदय में भक्ति नहीं होगी, उनका कल्याण नहीं होगा। माता यशोदा उनका ध्यान रखने की बजाए प्रसाद बनाने में लगी थी तो कृष्ण ने रोना आरम्भ कर दिया। परन्तु माता यशोदा ने ध्यान ही नहीं दिया। नंद बाबा ने उनको बताया कि मैया इंद्र भगवान के पूजन के लिए प्रसाद बना रही हैं। कन्हैया ने पूछा कि इंद्र ने कभी दर्शन दिए, प्रसाद ग्रहण किया? अगर नहीं तो हमें गिरिराज का पूजन करना चाहिए। वे दर्शन भी देंगे तथा प्रसाद को भी ग्रहण करेंगे। ब्रजवासियों के हृदय में कृष्ण के प्रति प्रेम था। उन्होंने कन्हैया की बात मान ली। गिरिराज का पूजन किया। इंद्र पूजन बंद करने से कुपित हो गए और मेघ को बुलाकर ब्रज को तहसनहस करने का आदेश दे दिया। सात दिन लगातार वर्षा होती रही। गोविंद ने अपनी कानी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र के अभिमान को नष्ट किया। पूर्व डा. जीसी चौबे, शम्भूनाथ टंडन, अमरनाथ मिश्र, अवनीन्द्र तिवारी, ज्ञान जायसवाल, विद्याशंकर प्रजापति आदि ने भजनों की प्रस्तुति की। गोवर्धन का षोडशोपचार पूजन राजनारायन शुक्ल व डा. रजनीकांत द्विवेदी ने कराया। महंत महेंद्र दास, रवि मिगलानी, हरदेव सिंह, संजय पाठक, विनय बरौतिया, रत्नेश गाढ़ा, राजेश सिंह, नीरज उपाध्याय, अनिल प्रजापति, सुनील यादव, डा. विकास रस्तोगी, रत्नेश, किशोर ओझा, निशाकांत द्विवेदी, अल्का उपाध्याय, यवनिका सिंह, कुमुद पाठक आदि उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि प्रभु ने विचार किया कि जब तक इन ब्रजवासियों के हृदय में भक्ति नहीं होगी, उनका कल्याण नहीं होगा। माता यशोदा उनका ध्यान रखने की बजाए प्रसाद बनाने में लगी थी तो कृष्ण ने रोना आरम्भ कर दिया। परन्तु माता यशोदा ने ध्यान ही नहीं दिया। नंद बाबा ने उनको बताया कि मैया इंद्र भगवान के पूजन के लिए प्रसाद बना रही हैं। कन्हैया ने पूछा कि इंद्र ने कभी दर्शन दिए, प्रसाद ग्रहण किया? अगर नहीं तो हमें गिरिराज का पूजन करना चाहिए। वे दर्शन भी देंगे तथा प्रसाद को भी ग्रहण करेंगे। ब्रजवासियों के हृदय में कृष्ण के प्रति प्रेम था। उन्होंने कन्हैया की बात मान ली। गिरिराज का पूजन किया। इंद्र पूजन बंद करने से कुपित हो गए और मेघ को बुलाकर ब्रज को तहसनहस करने का आदेश दे दिया। सात दिन लगातार वर्षा होती रही। गोविंद ने अपनी कानी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र के अभिमान को नष्ट किया। पूर्व डा. जीसी चौबे, शम्भूनाथ टंडन, अमरनाथ मिश्र, अवनीन्द्र तिवारी, ज्ञान जायसवाल, विद्याशंकर प्रजापति आदि ने भजनों की प्रस्तुति की। गोवर्धन का षोडशोपचार पूजन राजनारायन शुक्ल व डा. रजनीकांत द्विवेदी ने कराया। महंत महेंद्र दास, रवि मिगलानी, हरदेव सिंह, संजय पाठक, विनय बरौतिया, रत्नेश गाढ़ा, राजेश सिंह, नीरज उपाध्याय, अनिल प्रजापति, सुनील यादव, डा. विकास रस्तोगी, रत्नेश, किशोर ओझा, निशाकांत द्विवेदी, अल्का उपाध्याय, यवनिका सिंह, कुमुद पाठक आदि उपस्थित रहे।
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