{"_id":"5bd8aad5bdec22696e0e4fbb","slug":"154092612517-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाव से की गई भक्ति से प्रसंन्न होते हैं भगवान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाव से की गई भक्ति से प्रसंन्न होते हैं भगवान
Updated Wed, 31 Oct 2018 01:25 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बरईपार/,सुजानगंज। चित्रकूट तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गगुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि जिसके जीवन में अहंकार होगा उसके जीवन में भगवान कभी नहीं आते हैं। सामान्य आदमी भी अगर भगवान का नाम लेता है तो उसके प्रेम से भगवान दौड़े आते है। वह क्षेत्र के साड़ी खुर्द गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भक्तों के बीच भगवान श्रीकृष्ण बाल चरित्र, गोवर्धन धारण की कथा का बड़े ही मनोरम तरीके से वर्णन किया।
कथा के प्रारंभ में जगद्गगुरु ने बहुत से श्रोताओं के सवालों का जवाब भी दिया। भगवान के बाल रुप गोविंद के अवतार की कथा के रूप में बताया। जिसमें भगवान की दिव्य ,लीलाओं, भगवान के दस अवतार मतस्यावतार , कक्षपावतार , वाराह अवतार , नरसिंह अवतार , वामनावतार , परशुराम अवतार , भगवान राम का अवतार कृष्ण अवतार बुद्ध वारह अवतार की कथा को सुनाया। कहा कि धन्य है भारत की भूमि जहां देवताओ ने अवतार लिया। भगवान किसी अन्य देश में जन्म नहीं लिए है। बस भारत में ही अवतार लेते हैं। किसी अन्य देश की महिला भगवान को अपने गर्भ में धारण नहीं कर सकती हैं। आगे कथा में भगवान के में दशावतार में दैत्यों का समूल नाश किया सबसे पहले पूतना को मारा। सकासुर, प्रणव्रत, बकासुर, अघासुर, संघचुड, त्रुणासुर, अरिसष्टा सुर , आदि दस दैत्य का वध भगवान ने किया। जगद्गगुर की कथा सुनकर पंडाल में सभी भाव विभोर हो गए। मंच का संचालन आयुष्मान जय मिश्र ने किया। कथा के आयोजक रमापति मिश्र , चंद्रकांत मिश्र ,ओमप्रकाश मिश्र रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डा. ओमप्रकाश शुक्ला इस अवसर पर एस पी मिश्र, शेषधर शुक्ला, आचार्य दिनेश जयोतिषी, आचार्य वाचस्पति मिश्र , संतोष त्रिपाठी , विनय कुमार सिंह प्रत्यूष मिश्र , अमृताशु मिश्र , प्रांजल मिश्र, हषर्वर्धन दिवेदी मौजूद थे।
कथा के प्रारंभ में जगद्गगुरु ने बहुत से श्रोताओं के सवालों का जवाब भी दिया। भगवान के बाल रुप गोविंद के अवतार की कथा के रूप में बताया। जिसमें भगवान की दिव्य ,लीलाओं, भगवान के दस अवतार मतस्यावतार , कक्षपावतार , वाराह अवतार , नरसिंह अवतार , वामनावतार , परशुराम अवतार , भगवान राम का अवतार कृष्ण अवतार बुद्ध वारह अवतार की कथा को सुनाया। कहा कि धन्य है भारत की भूमि जहां देवताओ ने अवतार लिया। भगवान किसी अन्य देश में जन्म नहीं लिए है। बस भारत में ही अवतार लेते हैं। किसी अन्य देश की महिला भगवान को अपने गर्भ में धारण नहीं कर सकती हैं। आगे कथा में भगवान के में दशावतार में दैत्यों का समूल नाश किया सबसे पहले पूतना को मारा। सकासुर, प्रणव्रत, बकासुर, अघासुर, संघचुड, त्रुणासुर, अरिसष्टा सुर , आदि दस दैत्य का वध भगवान ने किया। जगद्गगुर की कथा सुनकर पंडाल में सभी भाव विभोर हो गए। मंच का संचालन आयुष्मान जय मिश्र ने किया। कथा के आयोजक रमापति मिश्र , चंद्रकांत मिश्र ,ओमप्रकाश मिश्र रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डा. ओमप्रकाश शुक्ला इस अवसर पर एस पी मिश्र, शेषधर शुक्ला, आचार्य दिनेश जयोतिषी, आचार्य वाचस्पति मिश्र , संतोष त्रिपाठी , विनय कुमार सिंह प्रत्यूष मिश्र , अमृताशु मिश्र , प्रांजल मिश्र, हषर्वर्धन दिवेदी मौजूद थे।
विज्ञापन