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माता जानकी की रक्षा करते हुए जटायू ने त्याग दिए प्राण
Updated Fri, 26 Oct 2018 12:01 AM IST
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बदलापुर/घनश्यामपुर। श्री अखण्ड रामलीला धर्म मंडल दाउदपुर बरुआन में लक्ष्मण द्वारा जी द्वारा सुपर्णखा के नाक कान काटने , रावण द्वारा सीताहरण तथा लंका दहन का मंचन किया गया। चौदह वर्ष के लिए बन जा रहे भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को मुनि बशिष्ठ के साथ भाई भरत उन्हें अयोध्या वापस लौटने के लिए मना रहे है। किन्तु श्रीराम अयोध्या वापस लौटने से जब इनकार कर देते हैं तो भरत जी उनका खड़ाऊं लेकर वापस अयोध्या चले आते हैं। उसे राज सिंहासन पर रख कर चौदह वर्षों तक बनवासी जैसा जीवन जीने का संकल्प लिया। बन में सुपर्णखा भगवान राम के सौन्दर्य पर मोहित होकर अपनी जीवन संगनी बनने का प्रस्ताव किया। उस दौरान उन्होंने अपने को विवाहित बताते हुए भाई ल मण के कुंवारे पन को बताया। सुपुर्णखा फिर लक्ष्मण से शादी की बात करती है। लक्ष्मण ने उसे दुश्मन की बहन बताते हुए उसका नाक कान काट लेते हैं। यह सूचना सुपर्णखा अपने भाई खरदूषण को देती है। खरदूषण राम लक्ष्मण तथा सीता पर आक्रमण करने के दौरान मारे जाते हैं। उसके बाद वह भाई रावण को सारी बात बताती है। रावण मारीच की मदद से माता जानकी का हरण कर लेता है। उसके अनाचार को देख कर जटायू रावण को अपनी चोंच से मार कर मुर्छित कर देता है। होश आने के बाद रावण तलवार से जटायू को मारने के बाद सीता को लेकर जाने में सफल रहा। उसके बाद हनुमान जी सीता की खोज में लंका पहुँचते हैं और मेघनाद द्वारा बन्दी बना लिए जाते हैं। जब राक्षस लोग उनकी पूँछ में तेल डाल कर जलाते हैं उसी पूँछ से हनुमान लंका जला कर भस्म कर देते हैं। राम का अभिनय विकास , लक्ष्मण का सत्या ,सीता का संयोग ,भरत का मनीष , सुपर्णखा का आशीष शुक्ल , खरदूषण का महेन्द्र शुक्ल , मारीच का विजय शंकर शुक्ल , रावण का छोटेलाल , हनुमान का अच्युतानंद ने किया।
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