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कुरनी की राम लीला में धनुष यज्ञ का हुआ मंचन

Wed, 24 Oct 2018 12:05 AM IST
Updated Wed, 24 Oct 2018 12:05 AM IST
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कुरनी की राम लीला में धनुष यज्ञ का हुआ मंचन
सिकरारा। जनक के दरबार में उस समय सन्नाटा छा गया जब शिव धनुष के टूटने की घनघोर आवाज सुनकर परशुराम का क्रोधित मुद्रा में पदार्पण हुआ। उनके क्रोध को देख कर राजा जनक के होश उड़ गए। सभी राजा उनके क्रोध को देखकर परशुराम से विनयावत मुद्रा में खड़े हो गए। राजा जनक से शिव धनुष तोड़ने वाले का नाम पूछने पर श्री राम ने कहा ,नाथ शम्भु धनु भंजन हारा, होइहि कोउ एक दास तुम्हारा। लेकिन लक्ष्मण कुटिल मुस्कान तथा उनके द्वारा उकसाने वाली बात सुनकर मुनि क्रोधित होकर बोल उठे- रे नृप बालक कल बस बोलत तोहि न सम्हार, धनुही सम त्रिपुरारि धनु विदित सकल संसार। उनकी बात सुन सारा दरबार सन्न रह गया। राम के अनुनय विनय पर जब परशुराम का क्रोध कम हुआ तो उन्हें ज्ञान हुआ की शिव धनुष तोड़ने वाले कोई साधारण इंसान नहीं हैं। उन्होंने अपनी धनुष का प्रत्यंचा चढ़ाने को कहा जिसे लेते ही परशुराम का संदेह दूर हो गया। उन्होंने प्रभु श्री राम के चरणों में नमन कर जंगल की ओर तपस्या करने को प्रस्थान किया। लोगों ने जयश्री राम का जय घोष किया। इससे पहले पुष्प वाटिका में जानकी व राम का मिलन तथा गौरी पूजन कर निज अनुरूप सुभग वर मांगा का सुंदर मंचन किया गया।
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