{"_id":"5ba29704867a557f5e02c6d4","slug":"153738212919-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब्बास का मातम है, वफादार का मातम...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब्बास का मातम है, वफादार का मातम...
Updated Thu, 20 Sep 2018 12:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जौनपुर। आठ मोहर्रम को जनपद के सभी इलाकों में मजलिसों एवं जुलूस का आयोजन हुआ। नगर का ऐतिहासिक आठ मोहर्रम का जुलूस अपने रिवायती अंदाज में मोहल्ला नसीब खां मंडी स्थित इमामाबाड़ा नाजिम अली खां से उठा। जो अटाला मस्जिद स्थित इमामबाड़ा शेख अलताफ हुसैन पर पहुंचकर समाप्त हुआ। ग्वालियर से आए मशहूर वैज्ञानिक जाकिर डा. कल्बे रजा नकवी ने मजलिस को संबोधित करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया में इमाम हुसैन का गम इस समय मनाया जा रहा है।
इमाम हुसैन ने उस समय के सबसे बड़े आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाकर न सिर्फ अपना भरा पूरा परिवार कुर्बान कर दिया बल्कि आज जो इस्लाम जिंदा है वो उनकी शहादत के दम पर ही है। आज जिस तरह से पूरी दुनिया में आतंकवाद फैल रहा है जरूरत है उसे भी हम सब मिलकर उखाड़े फेंकने में मुल्क की मदद करें, तभी इमाम हुसैन को सच्ची श्रद्धांजलि दी जाएगी। कर्बला में जिस तरह से हजरत इमाम हुसैन ने अपने छह माह के बच्चे जनाबे अली असगर की शहादत पेश करने से भी पीछे नहीं हटे। जिसके बाद अंजुमन हुसैनिया बलुआ घाट के नेतृत्व में शबीहे अलम जुलजनाह और गहवारे अली असगर बरामद हुआ। साथ ही नगर की सभी अंजुमने नौहा मातम करने लगीं। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ अटाला मस्जिद तक पहुँचा। यहां इमामबाड़ा शेख इल्ताफ हुसैन से तुर्बत को निकालकर गहवारे अली असगर व जुलजनाह से मिलाया गया। इस मिलन को देखकर लोगों की आंखों से आंसू छलकने लगीं। जुलूस का संचालन परवेज हसन कर रहे थे। जुलूस में डा. मेहर अब्बास, शोएब अहमद, हाजी जफर अब्बास,अजादारी कॉउंसिल के अध्यक्ष तहसीन शाहिद, हाजी असगर हुसैन जैदी, हैदर मेंहदी, बाकर मिर्जा आदि शामिल रहे। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सिटी मजिस्ट्रेट सीओ सिटी नृपेंद्र कुमार, शहर कोतवाल विनय प्रकाश सिंह सभी चौकी इंचार्ज व भारी पुलिस बल तैनात रहे।
विज्ञापन
इमाम हुसैन ने उस समय के सबसे बड़े आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाकर न सिर्फ अपना भरा पूरा परिवार कुर्बान कर दिया बल्कि आज जो इस्लाम जिंदा है वो उनकी शहादत के दम पर ही है। आज जिस तरह से पूरी दुनिया में आतंकवाद फैल रहा है जरूरत है उसे भी हम सब मिलकर उखाड़े फेंकने में मुल्क की मदद करें, तभी इमाम हुसैन को सच्ची श्रद्धांजलि दी जाएगी। कर्बला में जिस तरह से हजरत इमाम हुसैन ने अपने छह माह के बच्चे जनाबे अली असगर की शहादत पेश करने से भी पीछे नहीं हटे। जिसके बाद अंजुमन हुसैनिया बलुआ घाट के नेतृत्व में शबीहे अलम जुलजनाह और गहवारे अली असगर बरामद हुआ। साथ ही नगर की सभी अंजुमने नौहा मातम करने लगीं। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ अटाला मस्जिद तक पहुँचा। यहां इमामबाड़ा शेख इल्ताफ हुसैन से तुर्बत को निकालकर गहवारे अली असगर व जुलजनाह से मिलाया गया। इस मिलन को देखकर लोगों की आंखों से आंसू छलकने लगीं। जुलूस का संचालन परवेज हसन कर रहे थे। जुलूस में डा. मेहर अब्बास, शोएब अहमद, हाजी जफर अब्बास,अजादारी कॉउंसिल के अध्यक्ष तहसीन शाहिद, हाजी असगर हुसैन जैदी, हैदर मेंहदी, बाकर मिर्जा आदि शामिल रहे। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सिटी मजिस्ट्रेट सीओ सिटी नृपेंद्र कुमार, शहर कोतवाल विनय प्रकाश सिंह सभी चौकी इंचार्ज व भारी पुलिस बल तैनात रहे।
विज्ञापन