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हिंदी के प्रति युवा पीढ़ी का कम हो रहा लगाव
Updated Sat, 15 Sep 2018 01:13 AM IST
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जौनपुर। हिंदी दिवस पर शु्क्रवार को विद्यालयों एवं कई स्थानों पर हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने हिंदी को अधिक से अधिक उपयोग में लाने की जरूरत है। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी में देश को एकसूत्र में पिरोने की क्षमता है।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में हिंदी दिवस पर संकाय भवन के कांफ्रेंस हाल में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विभागाध्यक्ष डा. मनोज मिश्र ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में हिंदी के प्रति युवा पीढ़ी का लगाव कम हो रहा है जो एक दुखद है। भारत में आम जनमानस को अगर एक सूत्र में कोई भाषा पिरो सकती है तो वह हिंदी है। डा. अवध बिहारी सिंह ने कहा कि अन्य भाषाओं की पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद नहीं हो रहा है ताकि लोग उससे जुड़ सकें। अनुवादकों की एक नई फौज तैयार करने की आवश्यकता है। डा. सुनील कुमार ने कहा कि हिंदी हमें जोड़ना सिखाती है। प्रतीक पांडे, सुरेश यादव, संदीप कुमार चौहान, बलराम यादव, राहुल गुप्ता एवं उपेंद्र पांडे ने विचार व्यक्त किए।
टीडी कालेज में हिंदी पखवारा के तहत आयोजित कार्यक्रम में डा. सरोज सिंह ने कहा कि हिंदी का दायरा बहुत बड़ा है। डा. सुषमा सिंह ने कहा कि हिंदी का दायरा तो बढ़ा है लेकिन अभी न्यायालयों में हिंदी को नहीं अपनाया जा रहा है। डा. राजदेव दुबे ने कहा कि सोशल मीडिया ने हिंदी का दायरा बढ़ाने में काफी सहयोग किया है। डा. महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि आज इंटरनेट में हिंदी का उपयोग तेजी से हो रहा है। डा. ओपी सिंह, डा. सीबी सिंह ने विचार व्यक्त किए। समारोह का शुभारंभ नगर प्रचारक डा. सुरेश कुमार ने सरस्वती की प्रतिमा के समझ दीप जलाकर किया। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारे विचारों तके आदान-प्रदान की उपयुक्त भाषा है। डा. वीरेंद्र प्रताप सिंह, डा. बह्मेश शुकला, डा. पीसी विश्वकर्मा, अजय विक्रम सिंह, गिरीश श्रीवास्तव आदि ने भी संबोधित किया। हिंदी पखबारा के तहत आयोजित प्रतियोगिता में छात्रों के बीच निबंध प्रतियोगिता आयोजित किया गया।
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राजा श्रीकृष्ण दत्त पीजी कालेज में प्राचार्य में प्राचार्य डा. विष्णु चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी भाषा एक सशक्त भाषा है। हमारजे अभिव्यक्ति का माध्यम है। इस मौके पर डा. सुधा सिंह, डा. उर्मिला सिंह, डा. मधु पाठक, डा. रागिनी राय, डा. मायानंद उपाध्याय, डा. आरपी ओझा, डा. सुनीता गुप्ता आदि मौजूद थी। जस्ट डांस फाउंडेशन के कार्यक्रम में साहित्यकार डा. ब्रजेश यदुवंशी ने कहा कि जब तक हिंदी को रोजी-रोटी से नहीं जोड़ा जायेगा, तब तक युवा वर्ग का रुझान इसमें नहीं बढ़ेगा। अध्यक्षता डा. देवेन्द्र उपाध्याय ने की। विवेक यादव, विकास सिंह रागी, डा. शैलेन्द्र यादव, ऋषभ सिंह, कमलेश मौर्या, भोलू सिंह, अनिल केसरवानी, शैलेन्द्र सिंह, कपिलराज यदुवंशी, हरिओम यादव, विशाल मौर्या ने विचार व्यक्त किए। नेहरू युवा केंद्र मुरादगंज में हुई संगोष्ठी में समन्वयक समर बहादुर सिंह, अखिलेश पांडेय, आशीष सिंह, सुरेंद्र बहादुर सिंह, राजेश कुमार महाविद्यालय कोहड़े सुल्तानपुर में डा. शिव प्रसाद प्रजापति, डा. राघवेंद्र श्रीवास्तव, डा. श्रुति मिश्रा, सुनील सिंह, सौम्या सिंह अरूण कुमार सिंह, कृपाशंकर सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए।
खेतासराय के आदर्श भारती संस्कृत महाविद्यालय एवं वासुदेव तपेश्वरी गर्ल्स इंटर कॉलेज के कार्यक्रम में डा. कपिलदेव मिश्र, डा. कृष्ण शर्मा, उमादत्त मिश्र , विनय कुमार सिंह, मुकेश कुमार पाठक ,डा. अजय कुमार तिवारी,चंद्रवीर सिंह, सुनीता मिश्रा , विभा पांडेय ,मीरा पांडेय,ओम प्रकाश पांडेय,अखिलेश मिश्र ,शशीभूषण मिश्र,विजय कुमार पांडेय ,गिरीश चंद्र मिश्र. विकास पांडेय, मनकामेश्वर तिवारी ने विचार व्यक्त किए। बक्शा के सन्त परमहंस इंटर कॉलेज औंका में गीतकार गिरीशचंद्र, प्रधानाचार्य डा. अखिलेशचंद्र श्रीवास्तव, जनार्दन अस्थाना, कमलेश बहादुर, सुरेशचन्द्र, रामपाल यादव, कृपाशंकर मिश्र, सुशील यादव, ओंकारनाथ, शेषनाथ, संचालन विशुन चंद यादव एवं आभार अखिलेशचंद्र श्रीवास्तव विचार व्यक्त किए।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में हिंदी दिवस पर संकाय भवन के कांफ्रेंस हाल में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विभागाध्यक्ष डा. मनोज मिश्र ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में हिंदी के प्रति युवा पीढ़ी का लगाव कम हो रहा है जो एक दुखद है। भारत में आम जनमानस को अगर एक सूत्र में कोई भाषा पिरो सकती है तो वह हिंदी है। डा. अवध बिहारी सिंह ने कहा कि अन्य भाषाओं की पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद नहीं हो रहा है ताकि लोग उससे जुड़ सकें। अनुवादकों की एक नई फौज तैयार करने की आवश्यकता है। डा. सुनील कुमार ने कहा कि हिंदी हमें जोड़ना सिखाती है। प्रतीक पांडे, सुरेश यादव, संदीप कुमार चौहान, बलराम यादव, राहुल गुप्ता एवं उपेंद्र पांडे ने विचार व्यक्त किए।
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टीडी कालेज में हिंदी पखवारा के तहत आयोजित कार्यक्रम में डा. सरोज सिंह ने कहा कि हिंदी का दायरा बहुत बड़ा है। डा. सुषमा सिंह ने कहा कि हिंदी का दायरा तो बढ़ा है लेकिन अभी न्यायालयों में हिंदी को नहीं अपनाया जा रहा है। डा. राजदेव दुबे ने कहा कि सोशल मीडिया ने हिंदी का दायरा बढ़ाने में काफी सहयोग किया है। डा. महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि आज इंटरनेट में हिंदी का उपयोग तेजी से हो रहा है। डा. ओपी सिंह, डा. सीबी सिंह ने विचार व्यक्त किए। समारोह का शुभारंभ नगर प्रचारक डा. सुरेश कुमार ने सरस्वती की प्रतिमा के समझ दीप जलाकर किया। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारे विचारों तके आदान-प्रदान की उपयुक्त भाषा है। डा. वीरेंद्र प्रताप सिंह, डा. बह्मेश शुकला, डा. पीसी विश्वकर्मा, अजय विक्रम सिंह, गिरीश श्रीवास्तव आदि ने भी संबोधित किया। हिंदी पखबारा के तहत आयोजित प्रतियोगिता में छात्रों के बीच निबंध प्रतियोगिता आयोजित किया गया।
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राजा श्रीकृष्ण दत्त पीजी कालेज में प्राचार्य में प्राचार्य डा. विष्णु चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी भाषा एक सशक्त भाषा है। हमारजे अभिव्यक्ति का माध्यम है। इस मौके पर डा. सुधा सिंह, डा. उर्मिला सिंह, डा. मधु पाठक, डा. रागिनी राय, डा. मायानंद उपाध्याय, डा. आरपी ओझा, डा. सुनीता गुप्ता आदि मौजूद थी। जस्ट डांस फाउंडेशन के कार्यक्रम में साहित्यकार डा. ब्रजेश यदुवंशी ने कहा कि जब तक हिंदी को रोजी-रोटी से नहीं जोड़ा जायेगा, तब तक युवा वर्ग का रुझान इसमें नहीं बढ़ेगा। अध्यक्षता डा. देवेन्द्र उपाध्याय ने की। विवेक यादव, विकास सिंह रागी, डा. शैलेन्द्र यादव, ऋषभ सिंह, कमलेश मौर्या, भोलू सिंह, अनिल केसरवानी, शैलेन्द्र सिंह, कपिलराज यदुवंशी, हरिओम यादव, विशाल मौर्या ने विचार व्यक्त किए। नेहरू युवा केंद्र मुरादगंज में हुई संगोष्ठी में समन्वयक समर बहादुर सिंह, अखिलेश पांडेय, आशीष सिंह, सुरेंद्र बहादुर सिंह, राजेश कुमार महाविद्यालय कोहड़े सुल्तानपुर में डा. शिव प्रसाद प्रजापति, डा. राघवेंद्र श्रीवास्तव, डा. श्रुति मिश्रा, सुनील सिंह, सौम्या सिंह अरूण कुमार सिंह, कृपाशंकर सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए।
खेतासराय के आदर्श भारती संस्कृत महाविद्यालय एवं वासुदेव तपेश्वरी गर्ल्स इंटर कॉलेज के कार्यक्रम में डा. कपिलदेव मिश्र, डा. कृष्ण शर्मा, उमादत्त मिश्र , विनय कुमार सिंह, मुकेश कुमार पाठक ,डा. अजय कुमार तिवारी,चंद्रवीर सिंह, सुनीता मिश्रा , विभा पांडेय ,मीरा पांडेय,ओम प्रकाश पांडेय,अखिलेश मिश्र ,शशीभूषण मिश्र,विजय कुमार पांडेय ,गिरीश चंद्र मिश्र. विकास पांडेय, मनकामेश्वर तिवारी ने विचार व्यक्त किए। बक्शा के सन्त परमहंस इंटर कॉलेज औंका में गीतकार गिरीशचंद्र, प्रधानाचार्य डा. अखिलेशचंद्र श्रीवास्तव, जनार्दन अस्थाना, कमलेश बहादुर, सुरेशचन्द्र, रामपाल यादव, कृपाशंकर मिश्र, सुशील यादव, ओंकारनाथ, शेषनाथ, संचालन विशुन चंद यादव एवं आभार अखिलेशचंद्र श्रीवास्तव विचार व्यक्त किए।