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जमीन के अभाव में दो साल से अधर में लटकी है विद्युत परियोजना

Mon, 27 Aug 2018 12:08 AM IST
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:08 AM IST
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जमीन के अभाव में दो साल से अधर में लटकी है विद्युत परियोजना
जौनपुर। जमीन के अभाव में जिले में 400 केवीए का विद्युत उपकेंद्र स्थापित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना अधर में लटक गई है । परियोजना के स्वीकृत हुए दो साल से अधिक का समय गुजर गया है लेकिन अभी तक जिला प्रशासन जमीन उपलब्ध नहीं करा सका है। इस उपकेंद्र के निर्माण से आसपास के सभी 132 केवी उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ा पाना संभव हो जाएगा। इससे ओवर लोडिंग और लो वोल्टेज की समस्या से जिले भर को निजात मिल जाएगी। साथ ही शेड्यूल के मुताबिक विद्युत आपूर्ति करना संभव हो जाएगा।
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जिले में लगभग चार लाख 68 हजार बिजली उपभोक्ता हैं। शहरी क्षेत्र में 24 घंटे, तहसील क्षेत्र में 20 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति करने का शेड्यूल हैं लेकिन पारेषण उपकेंद्र की क्षमता कम होने के कारण मांग बढ़ने पर आपात कटौती करनी पड़ती है। ग्रामीण इलाकों में विद्युतीकरण के चलते नए-नए उपकेंद्र बनाए गए हैं, उनको भरपूर विद्युत आपूर्ति तभी संभव है जब पारेषण उपकेंद्रों की क्षमता अधिक हो। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार ने दो साल पहले 400 केवीए का पारेषण विद्युत उपकेंद्र बनाने के लिए 700 करोड़ का बजट मंजूर किया था। इसके निर्माण के लिए भूमि की तालाश शुरू की गई लेकिन अभी तक जिला प्रशासन द्वारा भूमि उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। पहले शाहगंज के गैरवाह में जमीन की तलाश उपलब्ध कराई गई थी लेकिन वहां हरे पेड़ होने के कारण लोगों ने जनहित याचिका दायर कर दिया। इसके बाद डोभी ब्लाक के हरिहरपुर गांव में जमीन चिह्नित की लेकिन हरिहरपुर रेलवे क्रासिंग 16 सी पर रेलवे विभाग द्वारा अंडर पास के निर्माण के कारण उपकेंद्र निर्माण के लिए सामान ले जाने के लिए रेलवे से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिला। लिहाजा वहां भी उपकेंद्र निर्माण को निरस्त कर दिया गया है। उसके बाद जिला प्रशासन द्वारा मछलीशहर ब्लाक के कटाहित खास गांव में पास भूमि चिह्नित की है लेकिन उसको अभी विद्युत पारेषण विभाग को स्थानांतरित नहीं किया जा सका है।
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400 केवीए उपकेंद्र के निर्माण के लिए 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। इस उपकेंद्र को सोनभद्र जिले के ओबरा से डबल सर्किट 400 केवी लाइन और वाराणसी के कटरा पीजीसीआईएल से डबल सर्किट 400 केवी लाइन आएगी। जिससे जिले को पर्याप्त बिजली मिल सकेगी।
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400 केवीए उपकेंद्र के निर्माण के लिए वर्ष 2016 से भूमि की खोज हो रही है। लेकिन अभी तक जमीन नहीं मिल पाई है।अगर इस उपकेंद्र का निर्माण हो जाएगा तो जिले में लो वोल्टेज व ओवर लोडिंग आदि की समस्या समाप्त हो जाएगी।-अजय कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, विद्युत परेषण

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