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पूविवि ने स्ववितपोषित शिक्षकों का मांगा डिटेल
Updated Wed, 22 Aug 2018 12:00 AM IST
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जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने स्व वित्तपोषित योजना के तहत अनुमोदित और कार्यरत शिक्षकों का ब्यौरा उपलब्ध कराने को कहा है। कालेजों को 25 सितंबर तक शिक्षकों के नियुक्ति तिथि समेत उनका फोन नंबर आदि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं कालेज में जिन शिक्षकों का अनुमोदन मानदेय प्रवक्ता पद के लिए किया गया है, उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई तो नहीं की गई है।
कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने कहा कि जिन कालेजों में स्व वित्तपोषित योजना के तहत अनुमोदित एवं कार्यरत प्राचार्य और प्रवक्ताओं का विवरण तथा उच्च शिक्षा निदेशालय से अनुमोदित मानदेय प्रवक्ताओं का विवरण अलग-अलग प्रारूप पर विश्वविद्यालय के गोपनीय विभाग को 25 सितंबर तक उपलब्ध कराना है। कालेज द्वारा प्राचार्य और प्रवक्ता का पूरा नाम, किस विषय में डिग्री हासिल की है। जन्मतिथि, कालेज में अनुमोदन संख्या और तिथि, कार्यभार ग्रहण करने की तिथि और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराना होगा। उन्होंने कहा कि कालेज से शिक्षकों का डिटेल मिलने के बाद उनके परीक्षकत्व पर निर्णय लिया जाएगा। शिक्षकों के अनुमोदन की छाया प्रति भी उपलब्ध करानी होगी। प्राचार्य और शिक्षक के लगातार कार्यरत होने का अनुभव प्रमाण पत्र भी देना होगा। प्राचार्य और शिक्षकों के लिए न्यूनतम तीन वर्ष के वेतन भुगतान किए जाने संबंधी बैंक के डिटेल की प्रमाणित छाया प्रति सलंग्न करनी होगी। प्राचार्य और परीक्षकों का डिटेल मिलने के बाद ही उन्हें परीक्षक बनाए जाने पर निर्णय लिया जाएगा।
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कुलसचिव सुजीत कुमार जायसवाल ने कहा कि जिन कालेजों में स्व वित्तपोषित योजना के तहत अनुमोदित एवं कार्यरत प्राचार्य और प्रवक्ताओं का विवरण तथा उच्च शिक्षा निदेशालय से अनुमोदित मानदेय प्रवक्ताओं का विवरण अलग-अलग प्रारूप पर विश्वविद्यालय के गोपनीय विभाग को 25 सितंबर तक उपलब्ध कराना है। कालेज द्वारा प्राचार्य और प्रवक्ता का पूरा नाम, किस विषय में डिग्री हासिल की है। जन्मतिथि, कालेज में अनुमोदन संख्या और तिथि, कार्यभार ग्रहण करने की तिथि और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराना होगा। उन्होंने कहा कि कालेज से शिक्षकों का डिटेल मिलने के बाद उनके परीक्षकत्व पर निर्णय लिया जाएगा। शिक्षकों के अनुमोदन की छाया प्रति भी उपलब्ध करानी होगी। प्राचार्य और शिक्षक के लगातार कार्यरत होने का अनुभव प्रमाण पत्र भी देना होगा। प्राचार्य और शिक्षकों के लिए न्यूनतम तीन वर्ष के वेतन भुगतान किए जाने संबंधी बैंक के डिटेल की प्रमाणित छाया प्रति सलंग्न करनी होगी। प्राचार्य और परीक्षकों का डिटेल मिलने के बाद ही उन्हें परीक्षक बनाए जाने पर निर्णय लिया जाएगा।
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