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उतम भक्ति वही, जो समर्पित भाव से की जाती है - संत प्रभुदयाल
Updated Mon, 16 Jul 2018 12:44 AM IST
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जौनपुर। अनेक कारणों से लोग भक्ति करते हैं। कोई तकलीफ मुक्ति तो कोई ज्ञान बढ़ाने के लिए भक्ति कर रहा है लेकिन यह भक्ति नहीं सौदेबाजी है। यह बात पंजाब से आए संत प्रभुदयाल सिंह ने रविवार को संत निरंकारी सत्संग भवन में सत्संग समागम में कही।
उन्होंने कहा कि सबसे उत्तम भक्ति वह होती है, जो समर्पण के भाव से की जाती है। इंसान को मानवीय गुणों से युक्त होकर मानवता का रुतबा बुलंद करना चाहिए। जातपांत के भेदभावों से ऊपर उठकर एक प्रभु का बोध प्राप्त करें। तभी सबके अंदर प्रभु का दर्शन हो पाएगा। भगवान के नाम पर इंसान लड़ाई व झगड़ा करने को तैयार है लेकिन असली मर्म समझने की कोशिश नहीं करता। दुनिया की तरक्की तो इतनी हो गई है कि चांद और मंगल ग्रह पर इंसान को बसाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। मगर इंसान से प्रेम और नम्रता खत्म हो रही है। अपने फायदे के लिए लोग दूसरे का नुकसान करने के लिए तैयार रहते हैं। जब इस निरंकार प्रभु का ज्ञान इंसान के जीवन में आ जाता है तब उसकी अवस्था सहज और जीवन आनंदमयी बन जाता है। सद्गुरु माता सविंदर हरदेव महाराज दुनिया के किसी एक हिस्से में नहीं बल्कि पूरे विश्व में ब्रम्हज्ञान देकर समस्त मानव का कल्याण कर रही हैं। श्यामलाल साहू, श्रीराम पाल, वशिष्ट नारायण पांडेय, श्रीजय राम,राधेश्याम, रोली जायसवाल, चंदा,गीता,उदय नारायण जायसवाल व जगन्नाथ आदि उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि सबसे उत्तम भक्ति वह होती है, जो समर्पण के भाव से की जाती है। इंसान को मानवीय गुणों से युक्त होकर मानवता का रुतबा बुलंद करना चाहिए। जातपांत के भेदभावों से ऊपर उठकर एक प्रभु का बोध प्राप्त करें। तभी सबके अंदर प्रभु का दर्शन हो पाएगा। भगवान के नाम पर इंसान लड़ाई व झगड़ा करने को तैयार है लेकिन असली मर्म समझने की कोशिश नहीं करता। दुनिया की तरक्की तो इतनी हो गई है कि चांद और मंगल ग्रह पर इंसान को बसाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। मगर इंसान से प्रेम और नम्रता खत्म हो रही है। अपने फायदे के लिए लोग दूसरे का नुकसान करने के लिए तैयार रहते हैं। जब इस निरंकार प्रभु का ज्ञान इंसान के जीवन में आ जाता है तब उसकी अवस्था सहज और जीवन आनंदमयी बन जाता है। सद्गुरु माता सविंदर हरदेव महाराज दुनिया के किसी एक हिस्से में नहीं बल्कि पूरे विश्व में ब्रम्हज्ञान देकर समस्त मानव का कल्याण कर रही हैं। श्यामलाल साहू, श्रीराम पाल, वशिष्ट नारायण पांडेय, श्रीजय राम,राधेश्याम, रोली जायसवाल, चंदा,गीता,उदय नारायण जायसवाल व जगन्नाथ आदि उपस्थित रहे।
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