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बाड़ लगाने के बाद भी नही बच पा रही फसलें
Updated Sat, 23 Jun 2018 12:24 AM IST
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सिंगरामऊ। छुट्टा पशुओं के आतंक से क्षेत्र के किसान परेशान हैं। इनसे फसल की रक्षा करना चुनौती बन गयी है।
सिंगरामऊ व बदलापुर क्षेत्र की प्रमुख आर्थिक गतिविधि खेती है। वर्तमान समय में गन्ना, सब्जी व धान की नर्सरी खेतों में है। इनके लिए छुट्टा पशु मुसीबत बन गए हैं। भीषण गर्मी में फसल की रखवाली किसानों पर भारी पड़ रही है। रात में तो हालत यह है कि छुट्टा पशु देखते ही देखते पूरी फसल बर्बाद कर दे रहे हैं। धान की नर्सरी तो बाड़ लगाने के बाद भी नहीं बच पा रही है। पशुओं का झुंड बाड़ तोड़कर खेत में घुस जाता है। तियरा निवासी सच्चिदानंद तिवारी ने कहा कि अगर इन पशुओं का आतंक न रुका तो किसान खेती छोड़ देने को विवश हो जाएंगे। रतासी के अमरनाथ यादव ने बताया कि इस मंहगाई मे खर्च करने के बाद इन पशुओं के चलते पकी फसल मिलना मुश्किल हो गया है। इनामीपुर निवासी संजय सिंह ने बताया कि छुट्टा पशु पूरे दिन झुंड बनाकर किसी बाग या पेड़ के नीचे दिन बिताते हैं। शाम को गन्ने के खेत व धान की नर्सरी में धावा बोल देते है। जब धान की नर्सरी नहीं बचेगी तो धान की रोपाई कहां से होगी। पूरे क्षेत्र के गांवों के लोगों के लिए पशुओं की बढ़ती संख्या मुसीबत बन गई है। सरकार को छुट्टा पशुओं के लिए कुछ व्यवस्था करनी चाहिए जिससे किसानों की फसल बच सके।
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सिंगरामऊ व बदलापुर क्षेत्र की प्रमुख आर्थिक गतिविधि खेती है। वर्तमान समय में गन्ना, सब्जी व धान की नर्सरी खेतों में है। इनके लिए छुट्टा पशु मुसीबत बन गए हैं। भीषण गर्मी में फसल की रखवाली किसानों पर भारी पड़ रही है। रात में तो हालत यह है कि छुट्टा पशु देखते ही देखते पूरी फसल बर्बाद कर दे रहे हैं। धान की नर्सरी तो बाड़ लगाने के बाद भी नहीं बच पा रही है। पशुओं का झुंड बाड़ तोड़कर खेत में घुस जाता है। तियरा निवासी सच्चिदानंद तिवारी ने कहा कि अगर इन पशुओं का आतंक न रुका तो किसान खेती छोड़ देने को विवश हो जाएंगे। रतासी के अमरनाथ यादव ने बताया कि इस मंहगाई मे खर्च करने के बाद इन पशुओं के चलते पकी फसल मिलना मुश्किल हो गया है। इनामीपुर निवासी संजय सिंह ने बताया कि छुट्टा पशु पूरे दिन झुंड बनाकर किसी बाग या पेड़ के नीचे दिन बिताते हैं। शाम को गन्ने के खेत व धान की नर्सरी में धावा बोल देते है। जब धान की नर्सरी नहीं बचेगी तो धान की रोपाई कहां से होगी। पूरे क्षेत्र के गांवों के लोगों के लिए पशुओं की बढ़ती संख्या मुसीबत बन गई है। सरकार को छुट्टा पशुओं के लिए कुछ व्यवस्था करनी चाहिए जिससे किसानों की फसल बच सके।