{"_id":"5b1ad0f34f1c1b614d8b56c4","slug":"15284840873-jaunpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लुप्त हो रही संस्कृति का सरंक्षण चुनौती: रामकृष्ण त्रिपाठी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लुप्त हो रही संस्कृति का सरंक्षण चुनौती: रामकृष्ण त्रिपाठी
Updated Sat, 09 Jun 2018 12:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बक्शा। विकास खण्ड के सुजियामऊ गांव स्थित श्री महाकाली मंदिर पर गुरुवार की शाम पारंपरिक गीतों पर आधारित दस दिवसीय प्रस्तुति परक लोक गायन कार्यशाला का उद्दघाटन किया गया। क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में लोक गायन की विधा को सहेजने व उसे प्रस्तुतिकरण हेतु युवा टीम को प्रशिक्षित किया जाना है। कार्यशाला के मुख्य अतिथि पण्डित रामकृष्ण त्रिपाठी ने कहा कि लुप्त हो रही संस्कृति की इस विधा का संरक्षण एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि गांव की लुप्त हो चुकी गीत गायन को संरक्षित किया जाना प्रशंसनीय कार्य है। विशिष्ट अतिथि नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन दिनेश टण्डन ने कहा कि इस गीत विधा को सहेजने का कार्य अपने आप में बड़ी बात है। जिले का अनोखा कार्यक्रम बताते हुए यथा सम्भव सहयोग की बात कही। विशिष्ट अतिथि बीएचयू के प्रो. राजेन्द्रनाथ त्रिपाठी ने किसी भी चीज का संरक्षण करने को सराहनीय पहल बताया। लुप्त हो रही संस्कृति को बचाना आज सबसे बड़ी चुनौती है। क्योंकि उसका स्थान आज फूहड़ गीतों ने ले लिया है। अध्यक्षता डा. रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी ने की। आभार पूर्व प्रमुख श्रीपति उपाध्याय ने ज्ञापित किया। संचालन सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया। इस दौरान गायक सत्यदेव पाठक,रामआसरे तिवारी, लालसाहब पाठक, कैलाश शुक्ल, शिवानंद उपाध्याय, जयशंकर दूबे, विनोद तिवारी, वेदप्रकाश शुक्ल, विद्यानंद उपाध्याय, कृष्णानंद उपाध्याय, विपुल उपाध्याय, उत्तम पाण्डेय सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन