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राम और सीता का व्यक्तित्व असाधारण था: संत उमादास जी
Updated Sat, 26 May 2018 12:24 AM IST
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बरईपार। अयोध्या से पधारे संत उमादास महाराज ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम और माता सीता एक मानव के रूप में अवश्य जन्म लिया लेकिन उनका व्यक्तित्व असाधारण था। सीता स्वयंवर की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि सीता माता जनक की पुत्री अवश्य थी लेकिन वह धरती माता के कोख से पैदा हुई थी। इसीलिए उन्हें भूमिजा भी कहा जाता था।
कहा कि राजा जनक ने एक दिन देखा कि जिस शिव धनुष को कोई हिला नहीं पा रहा था। उसे सीता जैसी नन्हीं बच्ची उठाकर इधर से उधर कर दे रही थी। जनक जी समझ गए कि यह कोई साधारण कन्या नहीं यह अलौकिक कन्या है। वह गोनापार गांव में राजेश यादव के निवास पर भक्तों के बीच कथा के दौरान बोल रहे थे।
सीता के बड़ी होने पर शादी के लिए दिव्य पुरुष की तलाश शुरू कर दिया। इसीलिए उन्होंने सीता की शादी के लिए स्वयंवर कराया। स्वयंवर में आए बड़े-बड़े शक्तिशाली राजा धनुष को हिला नहीं सके। प्रत्यंचा चढ़ाने की बात तो बहुत दूर रही। उसी समय गुरु वशिष्ठ के साथ पहुंचे श्री राम ने शिव धनुष को उठाकर पलक झपकते ही प्रत्यंचा चढ़ा दिया। कथा में आयोजक राजेश यादव ने आगंतुकों का स्वागत किया। इस मौके पर रामजस यादव, चंद्रप्रकाश मिश्र, अजय यादव, भोल्लर यादव, रामचंद्र यादव रामजीत, राजेन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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कहा कि राजा जनक ने एक दिन देखा कि जिस शिव धनुष को कोई हिला नहीं पा रहा था। उसे सीता जैसी नन्हीं बच्ची उठाकर इधर से उधर कर दे रही थी। जनक जी समझ गए कि यह कोई साधारण कन्या नहीं यह अलौकिक कन्या है। वह गोनापार गांव में राजेश यादव के निवास पर भक्तों के बीच कथा के दौरान बोल रहे थे।
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सीता के बड़ी होने पर शादी के लिए दिव्य पुरुष की तलाश शुरू कर दिया। इसीलिए उन्होंने सीता की शादी के लिए स्वयंवर कराया। स्वयंवर में आए बड़े-बड़े शक्तिशाली राजा धनुष को हिला नहीं सके। प्रत्यंचा चढ़ाने की बात तो बहुत दूर रही। उसी समय गुरु वशिष्ठ के साथ पहुंचे श्री राम ने शिव धनुष को उठाकर पलक झपकते ही प्रत्यंचा चढ़ा दिया। कथा में आयोजक राजेश यादव ने आगंतुकों का स्वागत किया। इस मौके पर रामजस यादव, चंद्रप्रकाश मिश्र, अजय यादव, भोल्लर यादव, रामचंद्र यादव रामजीत, राजेन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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