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सत्कर्म से बढ़कर कोई पूजा नहीं
Updated Thu, 10 May 2018 11:52 PM IST
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भागवत सबसे प्राचीन धर्म ग्रंथ है। इसे श्रवण, मनन, वाचन और आचरण में समाहित कर लेने मात्र से मानव भव सागर को पार हो जाता है। यह हमें सत्कर्म की प्रेरणा देती है। उक्त बातें वृंदावन से पधारे संजय जी महराज ने बुधवार की शाम शहाबुद्दीनपुर गांव में साप्ताहिक श्रीमद्भागवत भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में प्रवचन के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन बड़े भाग्य से मिला है। इसे व्यर्थ में नहीं गवाना चाहिए। गृहस्थ आश्रम का पालन करते हुए उस परम पिता का स्मरण भी करते रहना चाहिए। सबसे बड़ा पूण्य है, सत्कर्म। इसे अपने जीवन चरित्र में धारण कर मानव ईश्वर को आसानी से प्राप्त कर सकता है। झूठ मत बोलो, बेमानी से बचो, ईर्ष्या द्वेष और अहंकार को पास मत आने दो। आपका स्वत: ही कल्याण हो जाएगा। इस मौके पर शिव पूजन मिश्रा, छोटेलाल मिश्रा, बिजय बहादुर, श्री कृष्ण पांडेय, नीमर मिश्रा, गुलाब सिंह, अशोक मिश्रा, इंद्रजीत आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि मानव जीवन बड़े भाग्य से मिला है। इसे व्यर्थ में नहीं गवाना चाहिए। गृहस्थ आश्रम का पालन करते हुए उस परम पिता का स्मरण भी करते रहना चाहिए। सबसे बड़ा पूण्य है, सत्कर्म। इसे अपने जीवन चरित्र में धारण कर मानव ईश्वर को आसानी से प्राप्त कर सकता है। झूठ मत बोलो, बेमानी से बचो, ईर्ष्या द्वेष और अहंकार को पास मत आने दो। आपका स्वत: ही कल्याण हो जाएगा। इस मौके पर शिव पूजन मिश्रा, छोटेलाल मिश्रा, बिजय बहादुर, श्री कृष्ण पांडेय, नीमर मिश्रा, गुलाब सिंह, अशोक मिश्रा, इंद्रजीत आदि मौजूद रहे।
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