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चिलचिलाती धूप ने लोगों को किया बेहाल
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जौनपुर। चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के थपेड़ों से रविवार को जनजीवन बेहाल रहा। तेज धूप के चलते सुबह आठ बजे से ही लू चलने लगी और नौ बजे तक सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। शहर में सद्भावना पुल पर जहां पूरे दिन चहल-पहल रहती है, वहां भी सन्नाटा पसरा रहा। भीड़-भाड़ वाले बाजारों में इक्का-दुक्का लोग नजर आए। रविवार को जिले में अधिकतम तापमान 43 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। लोग इस बात से हैरान हैं कि अगर अभी इस कदर गर्मी पड़ रही है तो जून में क्या हाल होगा। सुबह तेज धूप निकलने के बाद आठ बजे से ही लू चलने लगी। तेज गर्म हवाओं के झोंकों से लोग परेशान हो उठे। तेज हवाओं के चलते सड़कों पर पैदल और साइकिल से चलना मुश्किल हो रहा था। दिन चढ़ने के साथ-साथ धूप और गर्मी इतनी तेज होती गई कि बर्दाश्त से बाहर होने लगी। गर्मी के चलते राहगीर परेशान रहे। वहीं, बच्चे और बुजुर्गों को अधिक परेशानी उठानी पड़ रही। बाजार और सड़कों पर लोग गला तर करने के लिए ठंडा पानी व अन्य शीतल पेय का सहारा ले रहे हैं। घर से बाहर निकलने वाले गर्मी व लू से बचने का पूरा इंतजाम करने के बाद भी बेहाल रहे। तेज धूप से बचने के लिए गमछा, टोपी लगाकर ही लोग निकल रहे हैं। राह चलते लोग छांव की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर भटकते देखे गए। शीतल पेयजल, जूस और शर्बत की दुकानों पर लोगों की भीड़ लगने लगी है। वहीं, पक्षियों को गर्मी से निजात दिलाने के लिए लोगों ने घर की छतों पर बर्तनों में पानी रखना शुरू कर दिया है।
बच्चों और बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यान
जौनपुर। गर्मी के मौसम में बच्चों को दस्त व उल्टी की शिकायत अधिक होती है। बदलापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय दुबे का कहना है कि 40 डिग्री तापमान पहुंचने पर बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि पानी से फैलने वाली बीमारियां जैसे डायरिया, टाइफाइड, उल्टी-दस्त और बुखार का खतरा बढ़ जाता है। अगर बच्चा बीमार हो जाए तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। गर्मी से बचाव के लिए स्वच्छ पानी, नींबू, नमक और शक्कर के घोल का सेवन करना चाहिए। घर से बाहर निकलने से पहले शीतल पेय का सेवन करें। साथ ही ककड़ी, खीरा, प्याज व तरबूज का प्रयोग करें। दही, ठंडाई और सत्तू भी गर्मी से राहत दिलाते हैं।
गर्मी के साथ रुला रही बिजली
जौनपुर। गर्मी से बेहाल लोगों को बिजली की कटौती भी रुला रही है। रविवार को शहर के उत्तरी इलाके में कई बार कटौती होने से लोग परेशान रहे। सुबह आठ बजे बिजली कटी तो एक बजे के करीब बिजली आई और दस मिनट बाद फिर कट गई तो चार बजे आपूर्ति बहाल हुई। आधे घंटे बाद फिर बिजल कट गई तो छह बजे आई। इसके अलावा रात में भी बिजली की कटौती हो रही है, जिससे लोगों की नींद में खलल पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे बिजली की आपूर्ति का दावा किया जा रहा है लेकिन 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल रही है। अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड तृतीय एससी सनोरिया का कहना है कि अधिकतर इलाकों में बिजली की समस्या में सुधार हो गया है। दिन में तेज हवा चलने पर शार्ट सर्किट से फसलों में आग लगने की घटनाएं होती हैं। इसको देखते हुए कुछ इलाकों में सप्लाई बंद कर दी जाती है।
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बच्चों और बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यान
जौनपुर। गर्मी के मौसम में बच्चों को दस्त व उल्टी की शिकायत अधिक होती है। बदलापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय दुबे का कहना है कि 40 डिग्री तापमान पहुंचने पर बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि पानी से फैलने वाली बीमारियां जैसे डायरिया, टाइफाइड, उल्टी-दस्त और बुखार का खतरा बढ़ जाता है। अगर बच्चा बीमार हो जाए तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। गर्मी से बचाव के लिए स्वच्छ पानी, नींबू, नमक और शक्कर के घोल का सेवन करना चाहिए। घर से बाहर निकलने से पहले शीतल पेय का सेवन करें। साथ ही ककड़ी, खीरा, प्याज व तरबूज का प्रयोग करें। दही, ठंडाई और सत्तू भी गर्मी से राहत दिलाते हैं।
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गर्मी के साथ रुला रही बिजली
जौनपुर। गर्मी से बेहाल लोगों को बिजली की कटौती भी रुला रही है। रविवार को शहर के उत्तरी इलाके में कई बार कटौती होने से लोग परेशान रहे। सुबह आठ बजे बिजली कटी तो एक बजे के करीब बिजली आई और दस मिनट बाद फिर कट गई तो चार बजे आपूर्ति बहाल हुई। आधे घंटे बाद फिर बिजल कट गई तो छह बजे आई। इसके अलावा रात में भी बिजली की कटौती हो रही है, जिससे लोगों की नींद में खलल पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे बिजली की आपूर्ति का दावा किया जा रहा है लेकिन 10 से 12 घंटे ही बिजली मिल रही है। अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड तृतीय एससी सनोरिया का कहना है कि अधिकतर इलाकों में बिजली की समस्या में सुधार हो गया है। दिन में तेज हवा चलने पर शार्ट सर्किट से फसलों में आग लगने की घटनाएं होती हैं। इसको देखते हुए कुछ इलाकों में सप्लाई बंद कर दी जाती है।
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