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बारिश से नुकसान हुई गेहूं की फसल
Updated Thu, 12 Apr 2018 01:04 AM IST
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जौनपुर। बुधवार को आई बारिश में सबसेे ज्यादा नुकसान किसानों को हुआ। खेत और खलिहान में काटकर रखी गई गहूं के बोझ भीगने से नष्ट हो गए। कई इलाकों में बिजली ने दगा दे दिया जिससे जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। वैसे बरसात की वजह से मौसम में नरमी आई। तापमान में कमी दर्ज की गई और लोगों गर्मी से राहत भी मिली।
शहर और ग्रामीणांचल में दोपहर में अचानक बादल घिर गए। जिससे किसानों का दर्द एक बार फिर बढ़ गया। पूर्वा हवाओं के साथ बरसात हुई जिससे मड़ाई के लिए चल रहे थ्रेसर भी रूक गए। मौसम का यही हाल रहा तो किसानों की कमर टूट जाएगी। उधर खुटहन में आंधी तूफान के थपेड़े को झेल रहे किसान अपनी पककर तैयार फसलों के दाने को घर के अंदर तक पहुँचाने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं। लेकिन प्रकृति का बिगड़ा स्वरूप उन्हें अपने मकसद में मानो कामयाब ही नहीं होने देना चाह रहे हैं। जिसको लेकर उनके चेहरों पर चिंता की लकीरे दिखाई दे रही है। उधर बच्चे भी बारिश का आनंद लिए। बीएड की परीक्षा छूटने के दौरान अभ्यर्थियों को भी हल्की बरसात की वजह से थोड़ी बहुत दिक्कतों से जुझना पड़ा। कलेक्ट्रेट में फरियादियों ने बारिश का आनंद लिया। जहां गर्मी से लोगों को राहत मिली वहीं किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई है। अधिकांश किसानों ने अभी गेहूं की मड़ाई नहीं किया है। कुछ किसानों की फसल भी अभी खेतों में खड़ी है। ऐसे में उनकी चिंता बढ़ गई है।
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शहर और ग्रामीणांचल में दोपहर में अचानक बादल घिर गए। जिससे किसानों का दर्द एक बार फिर बढ़ गया। पूर्वा हवाओं के साथ बरसात हुई जिससे मड़ाई के लिए चल रहे थ्रेसर भी रूक गए। मौसम का यही हाल रहा तो किसानों की कमर टूट जाएगी। उधर खुटहन में आंधी तूफान के थपेड़े को झेल रहे किसान अपनी पककर तैयार फसलों के दाने को घर के अंदर तक पहुँचाने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं। लेकिन प्रकृति का बिगड़ा स्वरूप उन्हें अपने मकसद में मानो कामयाब ही नहीं होने देना चाह रहे हैं। जिसको लेकर उनके चेहरों पर चिंता की लकीरे दिखाई दे रही है। उधर बच्चे भी बारिश का आनंद लिए। बीएड की परीक्षा छूटने के दौरान अभ्यर्थियों को भी हल्की बरसात की वजह से थोड़ी बहुत दिक्कतों से जुझना पड़ा। कलेक्ट्रेट में फरियादियों ने बारिश का आनंद लिया। जहां गर्मी से लोगों को राहत मिली वहीं किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई है। अधिकांश किसानों ने अभी गेहूं की मड़ाई नहीं किया है। कुछ किसानों की फसल भी अभी खेतों में खड़ी है। ऐसे में उनकी चिंता बढ़ गई है।
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