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यज्ञ से होता है विश्व का कल्याण
Updated Thu, 15 Mar 2018 12:48 AM IST
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जौनपुर। गायत्री शक्तिपीठ लाइन बाजार में नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ और हवन पूजन का आयोजन किया गया। हवन-पूजन कर देवी-देवताओं का आह्वान किया गया। हरिद्वारा से आई टोली ने वेद मंत्रों के बीच कई पालियों में आहुतियां दीं।
शाम को टोली नायक अवस्थी ने कहा कि हवन-पूजन से देवताओं के प्रसन्न होने पर लोगों का कल्याण होता है। जप करने से पहले अपने चिंतन को बदलें। सदाचारी और सात्विक बनकर स्मरण करने से ही लाभ मिलता है। सत पुरुषों की निंदा अधर्म है। असत्य और पाखंड के आधार पर बढ़े हुए व्यक्तित्व की प्रशंसा करना और देवताओं को अलग-अलग मानना भी अधर्म है। विभिन्न पुस्तकों और संप्रदायों के आधार पर भेद करने वाला व्यक्ति भी पूजा के योग्य नहीं होता। भगवान खुशामद करने वालों का पाप माफ नहीं करता। न तो नास्तिकों के अच्छे कर्म का पुण्य कम करता है। पीपल पर कलावा बांधना, बार-बार दर्शन करना, गंगा नहाने से सिर्फ संतोष हो सकता है लेकिन बिना कुविचारों और कुकर्मों का त्याग किए बिना भगवान प्रसन्न नहीं हो सकते हैं। मुख्य यजमान दिलीप श्रीवास्तव रहे। डा. शीतला प्रसाद, विश्वनाथ सिंह, चंद्र मोहन यादव, चंद्रभान सिंह, अभय सिंह, इंद्रपति मिश्र, शैल श्रीवास्तव, उर्मिला, शशि सिंह आदि मौजूद थी।
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शाम को टोली नायक अवस्थी ने कहा कि हवन-पूजन से देवताओं के प्रसन्न होने पर लोगों का कल्याण होता है। जप करने से पहले अपने चिंतन को बदलें। सदाचारी और सात्विक बनकर स्मरण करने से ही लाभ मिलता है। सत पुरुषों की निंदा अधर्म है। असत्य और पाखंड के आधार पर बढ़े हुए व्यक्तित्व की प्रशंसा करना और देवताओं को अलग-अलग मानना भी अधर्म है। विभिन्न पुस्तकों और संप्रदायों के आधार पर भेद करने वाला व्यक्ति भी पूजा के योग्य नहीं होता। भगवान खुशामद करने वालों का पाप माफ नहीं करता। न तो नास्तिकों के अच्छे कर्म का पुण्य कम करता है। पीपल पर कलावा बांधना, बार-बार दर्शन करना, गंगा नहाने से सिर्फ संतोष हो सकता है लेकिन बिना कुविचारों और कुकर्मों का त्याग किए बिना भगवान प्रसन्न नहीं हो सकते हैं। मुख्य यजमान दिलीप श्रीवास्तव रहे। डा. शीतला प्रसाद, विश्वनाथ सिंह, चंद्र मोहन यादव, चंद्रभान सिंह, अभय सिंह, इंद्रपति मिश्र, शैल श्रीवास्तव, उर्मिला, शशि सिंह आदि मौजूद थी।
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