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बूंदाबादी के साथ पड़े ओले, गलन बढ़ी

Tue, 13 Feb 2018 12:36 AM IST
Updated Tue, 13 Feb 2018 12:36 AM IST
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बूंदाबादी के साथ पड़े ओले, गलन बढ़ी

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जौनपुर। मौसम का मिजाज अचानक बदलने से ठंड का असर बढ़ गया है। रविवार की रात जिले के कई हिस्सों में बूंदाबांदी हुई और ओले पड़े। सोमवार को पूरे दिन आसमान में घने बादल छाए रहे। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ का असर दो दिनों तक रहने की संभावना है। इस दौरान हल्की बारिश हो सकती है। बारिश गेहूं की फसल के लिए लाभदायक है जबकि तिलहन, दलहन, आलू और सब्जियों की फसल में कीट का प्रकोप बढ़ने की आशंका है।
तेज धूप के चलते ठंड गायब हो गई थी। लोगों ने स्वेटर, शाल रख दिए थे। मगर रविवार की दोपहर बाद से ही मौसम का मिजाज बदल गया। आसमान में बादल उमड़ने लगे। देर रात को जिले के सिकरारा, बरईपार, सुजानगंज, मुंगराबादशाहपु, मछलीशहर, बक्शा, खुटहन, शाहगंज इलाकों में हल्की बारिश हुई। कई अन्य इलाकों में भी बूंदाबांदी होने की की खबर है। रात में बक्शा, बदलापुर, खुटहन, सुइथाकला, सिकरारा आदि इलाकों में ओले पड़े जिससे सुबह तक गलन बढ़ गई। सोमवार को दिन में धूप नहीं निकलने से ठंड का एहसास तो था लेकिन हवा की रफ्तार धीमी होने के कारण तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं दर्ज की गई। दोपहर में कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी भी हुई। मौसम विज्ञानी डीपी उपाध्याय का कहना है कि यह पश्चिमी विक्षोभ का असर है। इसका असर एक से दो दिनों तक रह सकता है। बारिश और ओले पड़ने से 24 घंटे में में तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। रविवार को अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि सोमवार को अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अगले 24 घंटे में तापमान में और गिरावट आने का अनुमान है।
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बारिश से गेहूं की फसल को होगा लाभ
जौनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डा. संदीप कुमार कहते हैं कि लंबे समय बाद बारिश होने से फसलों को काफी नाइट्रोजन मिलेगी। गेहूं की फसल के लिए यह फायदेमंद है। बादल छाए रहने पर सरसों, आलू, आम और सब्जियों की फसल में माहो का प्रकोप बढ़ सकता है। माहो से बचाने के लिए टीन को पीले रंग में रंग कर उस पर ग्री लगाकर ऊंचाई पर टांग देना चाहिए। दलहन व तिलहन को माहो से बचाने के लिए इमिडाक्लोप्रिड आधा ग्राम को एक ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। एसेटामीप्रिड नामक दवा का भी छिड़काव इतनी ही मात्रा में की जा सकती है। गोभी, मिर्च, आलू आदि सब्जियों पर हो तो इसके लिए रेडोमिल दो ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव कर सकते हैं।
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आम को भी हो सकता नुकसान
जौनपुर। कृषि वैज्ञानिक डा. संदीप कुमार कहते हैं कि आसमान में बादल ऐसे ही कुछ दिनों तक छाए रहे तो आम की फसल में मैंगो हापर नामक रोग लग सकता है। इर रोग वाले कींच बौर का रस चूस लेते हैं और टहनियों पर मीठा चिपचिपा पदार्थ छोड़ देते हैं जिससे उसमें चींटी और फंगस लग जाते हैं और फल नहीं लगता। इस रोग से बचाने के लिए किसानों को ढाई ग्राम सल्फर प्रति लीटर की दर से छिड़काव करना चाहिए।
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