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किसानों की बदहाली का कारण बन रहे छुट्टा पशु
Updated Fri, 23 Nov 2018 11:35 PM IST
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क्षेत्र में घूम रहे छुट्टा पशु किसानों की बदहाली का कारण बन गए है। कड़ी मेहनत और महंगी लागत से तैयार खेतों में खड़ी फसल को छुट्टा पशुओं का झुंड खाने के साथ ही तहस नहस कर दे रहा है। जिसे लेकर किसान परेशान हैं। शासन द्वारा ऐसे पशुओं के नियंत्रण के लिए कोई कदम न उठाने से लोगों में आक्रोश है।
ब्लॉक क्षेत्र के रानीपुर, खुरहट फतेहपुर, काझा, गोकुलपुरा, पिरुआ, बस्ती, खिरिया, चकिया, धर्मसिपुर, उमती, तेंदुली, पलिया, बड़ागांव, पडरी सहित 50 गांवों में 500 से ज्यादा छुट्टा पशुओं का झुंड खेतों में लगी फसल बर्बाद कर दे रहे है। किसान संजय, विनोद, शिवनाथ, बेचू, रमेशचंद्र आदि ने बताया कि खेतों में लगी सब्जियों की फसल के साथ पशु चना, मटर, अरहर की फसलों को बर्बाद कर दे रहे है। किसानों ने बताया कि वह किसी तरह से कर्ज लेकर खाद बीज की व्यवस्था कर फसल लगा रहे हैं जबकि छुट्टा पशु उन फसलों को तहस नहस कर उन्हें बर्बाद कर रहे है। किसानों ने आरोप लगाया कि पशुओं के कारण क्षेत्र में सब्जी की खेती घाटे का सौदा होने के कारण बहुत हद तक बंद हो गई। अब अन्य फसलों को भी यह आवारा पशु नष्ट कर दे रहे हैं। यही स्थिति रही तो किसान खेती को बंद कर अन्य रोजगार को करने के लिए विवश है। किसानों ने प्रशासन से मांग की छुट्टा पशुओं को पकड़कर उन्हें इससे निजात दिलाया जाए। अन्यथा किसान अब सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएगा।
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ब्लॉक क्षेत्र के रानीपुर, खुरहट फतेहपुर, काझा, गोकुलपुरा, पिरुआ, बस्ती, खिरिया, चकिया, धर्मसिपुर, उमती, तेंदुली, पलिया, बड़ागांव, पडरी सहित 50 गांवों में 500 से ज्यादा छुट्टा पशुओं का झुंड खेतों में लगी फसल बर्बाद कर दे रहे है। किसान संजय, विनोद, शिवनाथ, बेचू, रमेशचंद्र आदि ने बताया कि खेतों में लगी सब्जियों की फसल के साथ पशु चना, मटर, अरहर की फसलों को बर्बाद कर दे रहे है। किसानों ने बताया कि वह किसी तरह से कर्ज लेकर खाद बीज की व्यवस्था कर फसल लगा रहे हैं जबकि छुट्टा पशु उन फसलों को तहस नहस कर उन्हें बर्बाद कर रहे है। किसानों ने आरोप लगाया कि पशुओं के कारण क्षेत्र में सब्जी की खेती घाटे का सौदा होने के कारण बहुत हद तक बंद हो गई। अब अन्य फसलों को भी यह आवारा पशु नष्ट कर दे रहे हैं। यही स्थिति रही तो किसान खेती को बंद कर अन्य रोजगार को करने के लिए विवश है। किसानों ने प्रशासन से मांग की छुट्टा पशुओं को पकड़कर उन्हें इससे निजात दिलाया जाए। अन्यथा किसान अब सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएगा।
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