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समाज उत्थान से ही देश बनेगा विश्व गुरू
Updated Wed, 10 Jan 2018 12:57 AM IST
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जौनपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के बौद्धिक शिक्षण प्रमुख मिथिलेश नारायण ने हिंदुस्तान की आत्मा में धर्म है। धर्म हमें मरने नहीं देता है। वह हमें सक्रिय करता है। स्वामी विवेकानंद ने दुनिया से कहा था कि आप विश्व को बाजार मानते हैं हम परिवार मानतेे हैं। वह मंगलवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में मंगलवार को प्रखर देशभक्त हिंदू धर्म दर्शन के संवाहक स्वामी विवेकानंद विषयक संगोष्ठी में बोल रहे थे।
उन्होेंने कहा कि हमारे यहां जो नियम है वही धर्म है। भारत का उदय किसी व्यक्ति या सरकार से नहीं बल्कि सभी देशवासियों के सहयोग से हो सकता है। भारत इसी के बल पर विश्व गुरु बन सकता है। पूर्व प्राचार्य डॉ. राधेश्याम सिंह ने कहा कि देश को समृद्ध बनाने में देश की जनता की सामूहिक शक्ति का उन्मेष स्वामी विवेकानंद ने किया। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय सृजन का स्थान है। हमें युवाओं पर विश्वास करके उनकी प्रतिभा का विकास करना चाहिए। जब हम विद्यार्थीयों की समस्याओं को गंभीरता से लेने लगेंगे तब विवेकानंद जैसे युवा पैदा होने लगेंगे। स्वागत प्रोफेसर बीबी तिवारी ने किया। कार्यक्रम में डा. आरएन ओझा की पुस्तक स्फुट विचार का विमोचन किया गया। संचालन डा. अजय द्विवेदी ने किया। डा. राजकुमार सोनी ने परिचय कराया। धन्यवाद ज्ञापन डा. एके श्रीवास्तव ने दिया। इस अवसर पर सुरेंद्र प्रताप सिंह, संतोष त्रिपाठी, डा. बीडी शर्मा, नीरज सिंह, डा. मनोज मिश्र, डा. संतोष कुमार, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. सुनील कुमार, डा. अमरेंद्र सिंह, डा. अरुण कुमार सिंह, डा. विनोद सिंह, डा. सूर्य प्रकाश सिंह, डा. अवनीश कुमार सिंह, इंद्रेश कुमार आदि मौजूद थे।
उन्होेंने कहा कि हमारे यहां जो नियम है वही धर्म है। भारत का उदय किसी व्यक्ति या सरकार से नहीं बल्कि सभी देशवासियों के सहयोग से हो सकता है। भारत इसी के बल पर विश्व गुरु बन सकता है। पूर्व प्राचार्य डॉ. राधेश्याम सिंह ने कहा कि देश को समृद्ध बनाने में देश की जनता की सामूहिक शक्ति का उन्मेष स्वामी विवेकानंद ने किया। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय सृजन का स्थान है। हमें युवाओं पर विश्वास करके उनकी प्रतिभा का विकास करना चाहिए। जब हम विद्यार्थीयों की समस्याओं को गंभीरता से लेने लगेंगे तब विवेकानंद जैसे युवा पैदा होने लगेंगे। स्वागत प्रोफेसर बीबी तिवारी ने किया। कार्यक्रम में डा. आरएन ओझा की पुस्तक स्फुट विचार का विमोचन किया गया। संचालन डा. अजय द्विवेदी ने किया। डा. राजकुमार सोनी ने परिचय कराया। धन्यवाद ज्ञापन डा. एके श्रीवास्तव ने दिया। इस अवसर पर सुरेंद्र प्रताप सिंह, संतोष त्रिपाठी, डा. बीडी शर्मा, नीरज सिंह, डा. मनोज मिश्र, डा. संतोष कुमार, डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. सुनील कुमार, डा. अमरेंद्र सिंह, डा. अरुण कुमार सिंह, डा. विनोद सिंह, डा. सूर्य प्रकाश सिंह, डा. अवनीश कुमार सिंह, इंद्रेश कुमार आदि मौजूद थे।
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