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पशुओं से फसलों के सुरक्षा का नहीं है ठोस इंतजाम
Updated Mon, 08 Jan 2018 12:53 AM IST
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जौनपुर। छुट्टा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले किसान नीलगायों से ही परेशान थे लेकिन इस साल छुट्टा पशुओं की बढ़ती संख्या परेशानी का सबब बन गई है। किसानों ने कई बार प्रशासन से इनसे निजात दिलाने की गुहार लगाई लेकिन प्रशासन ने फसलों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किया। कड़ाके की सर्दी में खेतों की रखवाली करना भी दुष्कर है। कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक जिले में छुट्टा पशुओं से तकरीबन 20 फीसदी फसलों का नुकसान हो रहा है।
जिले में छह लाख 55 हजार 913 किसान है। जिनके द्वारा दो लाख 26 हजार 518 हेक्टेयर में रबी के फसलों की खेती की गई है। इसमें 207535 हेक्टेयर में गेहूं, 513 हेक्टेयर में जौ, 5220 हेक्टेयर में चना, 6570 हेक्टेयर में मटर, 201 हेक्टेयर में मसूर, 87 मक्का, 3910 हेक्टेयर में सरसों, 2475 हेक्टेयर में तोरिया की खेती की गई है। कृषि विभाग के अनुमान मुताबिक 20 फीसदी फसल को छुट्टा पशु चर जा रहे हैं। इस हिसाब से हर साल 50 हजार हेक्टेयर फसल नीलगायों और छुट्टा पशुओं के चलते बरबाद हो रही है। झुंड के झुंड पशु आते हैं और खेतों को तहसनहस कर देते हैं। फसलों को बचाने के लिए किसानों ने खेतों के चारों तरफ बाड़ तक लगाए लेकिन यह उपाय भी ज्यादा कारगर साबित नहीं हुआ। पशु बाड़ फांदकर या तोड़कर अंदर घुस कर फसलों को बरबाद कर देते हैं। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए किसानों ने कई बार आवाज बुलंद की। कृषि विभाग द्वारा पिछले माह में आयोजित 10 दिवसीय पाठशाला में भी किसानों ने इससे निजात दिलाने की मांग की लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। कृषि विभाग ने भी इस समस्या से कृषि निदेशालय और शासन को अवगत कराया है।
आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा का उपाय करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। किसान पाठशाला में किसानों ने यह मुद्दा उठाया था। फसलों को बचाने के लिए किसानों को स्थानीय स्तर पर कुछ सलाह दी जा रही है।-जय प्रकाश, उप निदेशक कृषि
जिले में छह लाख 55 हजार 913 किसान है। जिनके द्वारा दो लाख 26 हजार 518 हेक्टेयर में रबी के फसलों की खेती की गई है। इसमें 207535 हेक्टेयर में गेहूं, 513 हेक्टेयर में जौ, 5220 हेक्टेयर में चना, 6570 हेक्टेयर में मटर, 201 हेक्टेयर में मसूर, 87 मक्का, 3910 हेक्टेयर में सरसों, 2475 हेक्टेयर में तोरिया की खेती की गई है। कृषि विभाग के अनुमान मुताबिक 20 फीसदी फसल को छुट्टा पशु चर जा रहे हैं। इस हिसाब से हर साल 50 हजार हेक्टेयर फसल नीलगायों और छुट्टा पशुओं के चलते बरबाद हो रही है। झुंड के झुंड पशु आते हैं और खेतों को तहसनहस कर देते हैं। फसलों को बचाने के लिए किसानों ने खेतों के चारों तरफ बाड़ तक लगाए लेकिन यह उपाय भी ज्यादा कारगर साबित नहीं हुआ। पशु बाड़ फांदकर या तोड़कर अंदर घुस कर फसलों को बरबाद कर देते हैं। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए किसानों ने कई बार आवाज बुलंद की। कृषि विभाग द्वारा पिछले माह में आयोजित 10 दिवसीय पाठशाला में भी किसानों ने इससे निजात दिलाने की मांग की लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। कृषि विभाग ने भी इस समस्या से कृषि निदेशालय और शासन को अवगत कराया है।
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आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा का उपाय करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। किसान पाठशाला में किसानों ने यह मुद्दा उठाया था। फसलों को बचाने के लिए किसानों को स्थानीय स्तर पर कुछ सलाह दी जा रही है।-जय प्रकाश, उप निदेशक कृषि
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