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28 सफर पर निकला जुलूस, अंजुमनों ने किया नौहा मातम
Updated Sun, 19 Nov 2017 12:48 AM IST
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पैगंबरे खुदा की याद में मातम करते मुस्लिम बंधु
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जौनपुर। हजरत मोहम्मद मुस्तफा स.अ. की वफात और उनके बड़े नवासे इमाम हसन अ.स. की शहादत की याद में शनिवार को शहर तथा ग्रामीण इलाकों में 28 सफर का जुलूस निकाला गया। इसमें शामिल अंजुमनों ने नौहा मातम कर खेराजे अकीदत पेश किया। अंजुमन जाफरी के नेतृत्व में नगर के मखदूम शाह अढ़न मोहल्ला स्थित इमाम बारगाह सिब्तैन खां से निकाला गया। इस दौरान ताजिया, शबीहे ताबूत व अलम मुबारक के साथ नगर की सभी अंजुमनों ने नौहा-मातम किया।
जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ कोतवाली चौराहे पहुंचा जहां मातमी दस्तों ने जंजीर और कमा का मातम किया। इसके बाद जुलूस बड़ी मस्जिद, पुरानी बाजार होता हुआ बेगमगंज स्थित सदर इमाम बारगाह पहुंचा, जहां शबीहे ताबूत, आलम ठंडा किया गया और ताजिये को सुपुर्दे खाक किया गया। इससे पहले सोजख्वानी र्हुई। डा. सैय्यद कमर अब्बास ने मजलिस में कहा कि अल्लाह के रसूल ने अपनी पूरी जिंदगी इस्लाम को फैलाने में सर्फ की। बड़े नवासे इमाम हसन को जब छह बार जहर देकर भी नहीं मारा जा सका तो सातवीं बार ऐसा जहर लाया गया जिसकी एक बूंद दुनिया के सभी समुंदरों के जीवों को मारने के लिए काफी था। वह जहर इमाम के पानी में उनकी एक पत्नी द्वारा मिला दिया गया जिसे पीने के बाद वह शहीद हो गए। मजलिस के बाद शबीहे अलम, ताबूत व ताजिया उठाया गया। जिसके हमराह अंजुमनों ने नौहा और मातम किया। मखदूम शाह अढ़न से उठा यह जुलूस अपने कदीमी रास्तो से गुजरता हुआ कोतवाली तिराहे पर पहुंचा जहां जंजीर और कमा का मातम किया गया। जुलूस मल्हनी रोड होते हुए पुरानी बाजार से गुजरता हुआ सदर इमाम बारगाह बेगमगंज पहुंचा जहां नौहा और मातम के बाद तुर्बत व ताबूत को सुपुर्द ए खाक किया गया। वास्ती हाउस स्थित इमाम बारगाह में भी मजलिस का आयोजन हुआ। इसके बाद तारीखी जुलूस उठाया गया जिसके हमराह अंजुमन सज्जादिया मुफ्ती मोहल्ला ने नौहा मातम किया। बारादुअरिया मोहल्ला स्थित मरकजी चौक पर जुलूस का अयोजन किया गया। चौक पर रखी ताजिया उठाई गई। बख्शा क्षेत्र के रन्नो व कर्तिहां गांव में 28 सफर का कदीमी जुलूस निकाला गया। इसके पूर्व सभी गांवों के इमामबाड़ों में मजलिसें आयोजित हुई। खेतासराय के मानीकला गांव में शिया समुदाय ने शनिवार को 28 सफर का जुलूस निकाला। जुलूस में इमामबाड़ा से शुरू होकर ईदगाह स्थित कर्बला में जाकर समाप्त हो गया।
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जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ कोतवाली चौराहे पहुंचा जहां मातमी दस्तों ने जंजीर और कमा का मातम किया। इसके बाद जुलूस बड़ी मस्जिद, पुरानी बाजार होता हुआ बेगमगंज स्थित सदर इमाम बारगाह पहुंचा, जहां शबीहे ताबूत, आलम ठंडा किया गया और ताजिये को सुपुर्दे खाक किया गया। इससे पहले सोजख्वानी र्हुई। डा. सैय्यद कमर अब्बास ने मजलिस में कहा कि अल्लाह के रसूल ने अपनी पूरी जिंदगी इस्लाम को फैलाने में सर्फ की। बड़े नवासे इमाम हसन को जब छह बार जहर देकर भी नहीं मारा जा सका तो सातवीं बार ऐसा जहर लाया गया जिसकी एक बूंद दुनिया के सभी समुंदरों के जीवों को मारने के लिए काफी था। वह जहर इमाम के पानी में उनकी एक पत्नी द्वारा मिला दिया गया जिसे पीने के बाद वह शहीद हो गए। मजलिस के बाद शबीहे अलम, ताबूत व ताजिया उठाया गया। जिसके हमराह अंजुमनों ने नौहा और मातम किया। मखदूम शाह अढ़न से उठा यह जुलूस अपने कदीमी रास्तो से गुजरता हुआ कोतवाली तिराहे पर पहुंचा जहां जंजीर और कमा का मातम किया गया। जुलूस मल्हनी रोड होते हुए पुरानी बाजार से गुजरता हुआ सदर इमाम बारगाह बेगमगंज पहुंचा जहां नौहा और मातम के बाद तुर्बत व ताबूत को सुपुर्द ए खाक किया गया। वास्ती हाउस स्थित इमाम बारगाह में भी मजलिस का आयोजन हुआ। इसके बाद तारीखी जुलूस उठाया गया जिसके हमराह अंजुमन सज्जादिया मुफ्ती मोहल्ला ने नौहा मातम किया। बारादुअरिया मोहल्ला स्थित मरकजी चौक पर जुलूस का अयोजन किया गया। चौक पर रखी ताजिया उठाई गई। बख्शा क्षेत्र के रन्नो व कर्तिहां गांव में 28 सफर का कदीमी जुलूस निकाला गया। इसके पूर्व सभी गांवों के इमामबाड़ों में मजलिसें आयोजित हुई। खेतासराय के मानीकला गांव में शिया समुदाय ने शनिवार को 28 सफर का जुलूस निकाला। जुलूस में इमामबाड़ा से शुरू होकर ईदगाह स्थित कर्बला में जाकर समाप्त हो गया।
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