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भागवत कथा
Updated Mon, 11 Sep 2017 12:35 AM IST
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जलालपुर। कथावाचक आचार्य अमित कुमार दुबे ने कहा कि मनोयोग के साथ कथा श्रवण करने मात्र से ही मनुष्य के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन होता हैं। श्रीमद भागवत में तमाम ऐसी कथाएं हैं जो हमें प्रेरणा देती है। कलयुग में जीवन को कलात्मक ढंग से जीने का मार्ग प्रशस्त करती है। मानव जन्म पाकर मनुष्य अमृत पी ले और उसके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं हो तो उस अमृत पीने का कोई लाभ नहीं। नेवादा ग्राम में प्रवक्ता बयालसी इंटर कालेज विनय सिंह के आवास पर चल रहे श्रीमदभागवत महापुराण कथा में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि राहु ने भी अमृत पिया और अमर हो गए। लेकिन उसके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं होने के कारण उसे कोई लाभ नहीं मिला। वहीं धुंधकारी जैसे पापी भी कथामृत श्रवण करने मात्र से मोक्ष को प्राप्त किए। भागवत कथा अमृत सामान है तभी मोक्ष प्राप्ति के लिए राजा परीक्षित अपने जीवन के अंतिम सात दिन कथामृत श्रवण कर पुण्य के भागी बने। उन्होंने कहां की अमृत पीने मात्र से कुछ नहीं होता। भागवत सप्ताह में कथा सुनना जीवनोपयोगी है। उन्होंने कहा कि कलयुग में भगवत प्राप्ति के लिए अत्यंत सरल मार्ग निर्धारित किए गए हैं। भगवान के नाम मात्र का जाप करने से कलयुग में मुक्त पाने का विधान है। भागवत कथा के अवसर पर गांव के अनेक धर्म प्रेमी व श्रद्धालु उपस्थित हुए। कथा के पहले दिन ब्यास तीर्थराज चौबे के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणेश वंदना व भागवत पुराण पूजन हुआ। भक्ति से ज्ञान, वैराग्य पैदा होता है, संसार में पुण्य कार्य करना चाहिए। शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित से कहा कि भागवत कथा अज्ञान से ज्ञान और सत्य की ओर ले जाने वाली है। संसार के प्राणी अनेक चीजों से पीड़ित है उसका एक ही समाधान है कथा का श्रवण करना। दैविक, भौतिक, तापों से जो पीड़ित है उनके कष्ट दूर हो जाते हैं। विजय शास्त्री महाराज (अयोध्या) ने कहा की भक्ति रूपी तत्व के जीवन में आने पर व्यक्ति का आत्मबल बढने लगता है। प्रभु की कृपा होती है। इसलिए भक्ति करनी चाहिए। इस मौके पर विनय सिंह, अजय सिंह, दुर्गेश सिंह, रेनू सिंह, रेखा सिंह, रितु सिंह, रीना सिंह, सुषमा सिंह, शांति सिंह, अमरनाथ सिंह, पार्वती सिंह दुर्गा सिंह आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि राहु ने भी अमृत पिया और अमर हो गए। लेकिन उसके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं होने के कारण उसे कोई लाभ नहीं मिला। वहीं धुंधकारी जैसे पापी भी कथामृत श्रवण करने मात्र से मोक्ष को प्राप्त किए। भागवत कथा अमृत सामान है तभी मोक्ष प्राप्ति के लिए राजा परीक्षित अपने जीवन के अंतिम सात दिन कथामृत श्रवण कर पुण्य के भागी बने। उन्होंने कहां की अमृत पीने मात्र से कुछ नहीं होता। भागवत सप्ताह में कथा सुनना जीवनोपयोगी है। उन्होंने कहा कि कलयुग में भगवत प्राप्ति के लिए अत्यंत सरल मार्ग निर्धारित किए गए हैं। भगवान के नाम मात्र का जाप करने से कलयुग में मुक्त पाने का विधान है। भागवत कथा के अवसर पर गांव के अनेक धर्म प्रेमी व श्रद्धालु उपस्थित हुए। कथा के पहले दिन ब्यास तीर्थराज चौबे के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गणेश वंदना व भागवत पुराण पूजन हुआ। भक्ति से ज्ञान, वैराग्य पैदा होता है, संसार में पुण्य कार्य करना चाहिए। शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित से कहा कि भागवत कथा अज्ञान से ज्ञान और सत्य की ओर ले जाने वाली है। संसार के प्राणी अनेक चीजों से पीड़ित है उसका एक ही समाधान है कथा का श्रवण करना। दैविक, भौतिक, तापों से जो पीड़ित है उनके कष्ट दूर हो जाते हैं। विजय शास्त्री महाराज (अयोध्या) ने कहा की भक्ति रूपी तत्व के जीवन में आने पर व्यक्ति का आत्मबल बढने लगता है। प्रभु की कृपा होती है। इसलिए भक्ति करनी चाहिए। इस मौके पर विनय सिंह, अजय सिंह, दुर्गेश सिंह, रेनू सिंह, रेखा सिंह, रितु सिंह, रीना सिंह, सुषमा सिंह, शांति सिंह, अमरनाथ सिंह, पार्वती सिंह दुर्गा सिंह आदि मौजूद रहे।
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