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कबाड़ में फेंका रहता है आक्सीजन का सिलेंडर

Sun, 13 Aug 2017 12:43 AM IST
Updated Sun, 13 Aug 2017 12:43 AM IST
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कबाड़ में फेंका रहता है आक्सीजन का सिलेंडर
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जौनपुर। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में आक्सीजन की कमी के चलते तीस मासूमों की मौत के बाद सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। यहां का जिला और महिला अस्पताल भी बदइंतजामी से अछूता नहीं है। जिला अस्पताल में आक्सीजन सिलेंडर सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है। वर्तमान में यहां 25 सिलेंडर खाली हैं। एनआईसीयू की भी व्यवस्था नहीं है। दवाओं की कमी तो है ही, मरीजों को नाश्ता भी नहीं मिलता। उन्हें अधिकतर दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। महिला अस्पताल में सेंट्रल आक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। छोटे सिलेंडर से नवजात व गर्भवती महिलाओं को आक्सीजन देने की व्यवस्था है।

जिला अस्पताल में सेंट्रल आक्सीजन की व्यवस्था है। अस्पताल में कुल 53 आक्सीजन के सिलेंडर हैं। वर्तमान समय में 27 बड़े सिलेंडर में से आठ और 26 छोटे सिलेंडर में से 10 खाली पड़े हैं। आक्सीजन से भरे सिलेंडर सुरक्षित नहीं रखे गए हैं। एक जगह बेतरतीब रखे गए सिलेंडर से ही पाइप के माध्यम से मरीजों को आक्सीजन भी दिया जाता है। महिला अस्पताल में सेंट्रल आक्सीजन की व्यवस्था नहीं है। सिर्फ छोटे सिलेंडर से नवजात व गर्भवती महिलाओं को आक्सीजन देने की व्यवस्था है। यहां भी सिलेंडरों को सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा जाता है। कुल 25 छोटे सिलेंडर में से पांच सिलेंडर इस समय खाली हैं। जबकि प्रतिदिन एक दर्जन से अधिक महिलाओं का प्रसव कराया जाता है। अस्पतालों में आक्सीजन के लिए अलग से कोई बजट नहीं है। जिला अस्पताल में ओम गैस एजेंसी वाजिदपुर से आक्सीजन सिलेंडर में भरवाया जाता है। इस दौरान चार सौ रुपये प्रति बड़ा सिलेंडर और 125 रुपया प्रति छोटा सिलेंडर की दर से भरवाया जाता है। जिला महिला अस्पताल में सिंह गैस एजेंसी लाइनबाजार जगदीशपुर से आक्सीजन सिलेंडर में भरवाया जाता है। जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशुओं को ट्रे में रखकर आक्सीजन दिया जा रहा है। दोनों अस्पतालों में दवाओं की कमी है जिससे अधिकतर दवाएं मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती है। दोनों अस्पतालों में एंटीबायोटिक दवाएं नहीं है। दोनों अस्पतालों में प्रतिदिन लगभग डेढ़ हजार मरीज आते हैं। सुजानगंज ब्लाक के पराहित की सीमा तिवारी ने बताया कि रक्त चढ़ाने के लिए उससे बाहर से सिरिंज खरीदना पड़ा। मड़ियाहूं के हृदयपुर की बेबी पांडेय ने बताया कि अधिकांश दवाएं बाहर से लिखी गईं। वाजिदपुर के किशन कुमार ने बताया कि मरीजों को नाश्ता नहीं दिया जाता है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एसके पांडेय,अस्पताल में आक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था है। एंटी बायोटिक टैबलेट नहीं है। जिसे मंगाया जा रहा है। मरीजों को सुबह नाश्ता देने और दवाओं को बाहर से नहीं लिखने का निर्देश दिया गया है। शिकायत मिलने पर संबंधितों के विरुद्घ कार्यवाही की जाएगी। महिला अस्पताल की सीएमएस डा. लीली श्रीवास्तव ने बताया कि वेंटीलेटी की व्यवस्था है। आक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था है। एंटी बायोटिक हाई इंजेक्शन नहीं हैं। जिसकी मांग की गई है।
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