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बारिश से जिला सहकारी बैंक की छत ढही
Updated Tue, 04 Jul 2017 12:39 AM IST
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मछलीशहर। कस्बे के कायस्थाना मोहल्ला स्थित जिला सहकारी बैंक की छत पहली ही बारिश में अचानक ढह गई। बैंक कर्मी व ग्राहक बाल- बाल बच गए। 56 वर्षों पुराने किराए के भवन में संचालित होने वाले बैंक के मरम्मत की मांग 13 वर्षों से अधिकारी कर रहे थे।
स्टेट बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव के मकान में विगत 30 वर्षों से जिला सहकारी बैंक का कार्यालय चल रहा है। भवन का निर्माण वर्ष 1961 में होने के कारण अत्यंत जीर्ण शीर्ण हो चुका है। बैंक की रिकार्ड रूम की छत पहली ही बारिश में ढह गई। संयोग अच्छा था कि मौके पर उस कमरे में कोई अधिकारी, कर्मचारी व ग्राहक मौजूद नहीं था। अन्यथा मलबे में दबने से किसी की जान भी जा सकती थी। घटना के समय मौजूद बैंक शाखा में प्रबंधक नरेंद्र बहादुर सिंह, कैशियर मोहनलाल विश्वकर्मा व सहयोगी नरेंद्र यादव इस घटना से बेहद सहमे हुए हैं। शाखा प्रबंधक का कहना है कि भवन के मरम्मत के लिए महा प्रबंधक, जिला सहकारी बैंक को 18 मई 2004, 2 अगस्त 2012, 28 जून 2013, 5 जुलाई 2016, 15 व 18 अक्टूबर 2016, 22 नवम्बर 2016, 2 दिसम्बर 2016 तथा बारिश के पहले 30 जून 2017 को पत्र भेजा गया। लेकिन न तो बजट ही पास हुआ न ही मरम्मत कराई गई। बैंक का जर्जर भवन किसी भी समय ढह सकता है।
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स्टेट बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव के मकान में विगत 30 वर्षों से जिला सहकारी बैंक का कार्यालय चल रहा है। भवन का निर्माण वर्ष 1961 में होने के कारण अत्यंत जीर्ण शीर्ण हो चुका है। बैंक की रिकार्ड रूम की छत पहली ही बारिश में ढह गई। संयोग अच्छा था कि मौके पर उस कमरे में कोई अधिकारी, कर्मचारी व ग्राहक मौजूद नहीं था। अन्यथा मलबे में दबने से किसी की जान भी जा सकती थी। घटना के समय मौजूद बैंक शाखा में प्रबंधक नरेंद्र बहादुर सिंह, कैशियर मोहनलाल विश्वकर्मा व सहयोगी नरेंद्र यादव इस घटना से बेहद सहमे हुए हैं। शाखा प्रबंधक का कहना है कि भवन के मरम्मत के लिए महा प्रबंधक, जिला सहकारी बैंक को 18 मई 2004, 2 अगस्त 2012, 28 जून 2013, 5 जुलाई 2016, 15 व 18 अक्टूबर 2016, 22 नवम्बर 2016, 2 दिसम्बर 2016 तथा बारिश के पहले 30 जून 2017 को पत्र भेजा गया। लेकिन न तो बजट ही पास हुआ न ही मरम्मत कराई गई। बैंक का जर्जर भवन किसी भी समय ढह सकता है।
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