{"_id":"5ef4de758ebc3e42d74e8b8b","slug":"10-coror-eating-food-jaunpur-news-vns5322445127","type":"story","status":"publish","title_hn":"10 करोड़ का खा गए प्रवासी श्रमिक भोजन व राशन----","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
10 करोड़ का खा गए प्रवासी श्रमिक भोजन व राशन----
विज्ञापन
जौनपुर। मुंबई, सूरत, गुजरात और अहमदाबाद आदि स्थानों से जिले में आए प्रवासी श्रमिक तकरीबन 10 करोड़ का भोजन व राशन खा गए। यह धनराशि प्रवासियों को लंच पैकेट, बोतल बंद पानी, कम्यूनिटी सेंटर में भोजन व राशन किट देने में खर्च किए गए हैं। हालांकि इस खर्च के सापेक्ष शासन से मात्र तीन करोड़ ही मिल पाया है। शेष सात करोड़ रुपये के लिए जिला प्रशासन बार-बार डिमांड भेज रहा है, मगर भुगतान में देरी से परेशानी बढ़ती जा रही है।
24 मार्च को लॉक डाउन होने के बाद जिले में प्रवासी श्रमिकों का आना प्रारंभ हुआ। प्रवासी श्रमिक बस, ट्रक, ट्रेन सहित अन्य साधनों व पैदल जिले में आए। लॉक डाउन अवधि में करीब तीन लाख प्रवासी श्रमिक आए हैं। शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन की ओर से भोजन व राशन सहित अन्य जरुरी सुविधाएं मुहैया कराई गई। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कंयूनिटी सेंटर बनाया गया था। इसमें प्रवासी श्रमिकों को 14 दिन रखने के बाद कोरोना का लक्षण नहीं मिलने पर घर भेज दिया जा रहा था। कम्यूनिटी सेंटर में उन्हें नाश्ता व भोजन आदि की सुविधा उपलब्ध थी। घर भेजने के दौरान उनको राशन का किट भीा दिया जा रहा था। इसके अलावा जिले की सभी छह तहसीलों में 55-55 हजार का राशन किट भेजवाया गया था।
ट्रेनों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों को जौनपुर जंक्शन के बाहर निकलने के बाद लंच पैकेट व पानी की बोतल देकर रोडवेज बसों में बैठाकर गंतव्य के लिए रवाना किया जा रहा था। इस दौरान भोजन व राशन में जिला प्रशासन 10 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। शासन से अभी तक मात्र तीन करोड़ रुपये ही मिले हैं। ऐसे में मांग के बाद भी अभी तक खर्च की गई सात करोड़ रुपये शासन से नहीं मिलने को लेकर जिला प्रशासन परेशान हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
24 मार्च को लॉक डाउन होने के बाद जिले में प्रवासी श्रमिकों का आना प्रारंभ हुआ। प्रवासी श्रमिक बस, ट्रक, ट्रेन सहित अन्य साधनों व पैदल जिले में आए। लॉक डाउन अवधि में करीब तीन लाख प्रवासी श्रमिक आए हैं। शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन की ओर से भोजन व राशन सहित अन्य जरुरी सुविधाएं मुहैया कराई गई। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कंयूनिटी सेंटर बनाया गया था। इसमें प्रवासी श्रमिकों को 14 दिन रखने के बाद कोरोना का लक्षण नहीं मिलने पर घर भेज दिया जा रहा था। कम्यूनिटी सेंटर में उन्हें नाश्ता व भोजन आदि की सुविधा उपलब्ध थी। घर भेजने के दौरान उनको राशन का किट भीा दिया जा रहा था। इसके अलावा जिले की सभी छह तहसीलों में 55-55 हजार का राशन किट भेजवाया गया था।
विज्ञापन
ट्रेनों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों को जौनपुर जंक्शन के बाहर निकलने के बाद लंच पैकेट व पानी की बोतल देकर रोडवेज बसों में बैठाकर गंतव्य के लिए रवाना किया जा रहा था। इस दौरान भोजन व राशन में जिला प्रशासन 10 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। शासन से अभी तक मात्र तीन करोड़ रुपये ही मिले हैं। ऐसे में मांग के बाद भी अभी तक खर्च की गई सात करोड़ रुपये शासन से नहीं मिलने को लेकर जिला प्रशासन परेशान हैं।
विज्ञापन