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Jalaun News: यमुना ने दी राहत, अब खाने, रहने व बीमारी की आफत

Tue, 05 Aug 2025 01:32 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 05 Aug 2025 01:32 AM IST
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Yamuna gave relief, now there is problem of food, shelter and disease
उरई/कालपी। यमुना का जलस्तर बेहद धीमी गति से घटकर 109 मीटर पर पहुंचा गया है। हालांकि अभी भी यह खतरे के निशान 108 मीटर से ऊपर है। खाने, आशियाने और बीमारी की खतरे को लेकर लोगों की मुश्किलें अभी भी बरकरार है। सोमवार को जल शक्ति मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री ने प्रभावित गांवों दौरा कर राहत सामग्री बांटी।
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दो अगस्त को यमुना का जलस्तर 112.14 मीटर पर पहुंच गया था। तीन दिनों में केवल तीन मीटर की कमी आई है। जलस्तर कम होने से कई गांवों का सड़क संपर्क बहाल हो गया है। पड़री और रायढ़ दिवारा जैसे गांव अभी सड़क से कटे हुए हैं। लोगों को नाव के जरिये ही आना-जाना पड़ रहा है। प्रशासन का अनुमान है कि इन गांवों में एक-दो दिन में स्थिति सामान्य हो जाएगी। सोमवार को जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और जिले के प्रभारी मंत्री संजय सिंह गंगवार ने प्रभावित गांवों रायढ़ दिवारा और तरीबुल्दा का दौरा किया। बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरित की।
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आपदाएं रोकी नहीं जा सकतीं, लेकिन सरकार को हर पीड़ित की चिंता : स्वतंत्र देव
कालपी तहसील सभागार में आयोजित कार्यक्रम में 79 पीड़ितों को चावल, दाल, नमक, बिस्किट, तिरपाल, प्लास्टिक की बाल्टी और पशुओं के लिए चारा जैसी जरूरी वस्तुएं दी गईं। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि आपदाएं रोकी नहीं जा सकतीं, लेकिन मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हर पीड़ित की चिंता की जा रही है।
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प्रभारी मंत्री संजय सिंह गंगवार ने बताया कि बाढ़ राहत शिविर, स्वास्थ्य परीक्षण, पशु चिकित्सा कैंप और चारा वितरण जैसे कार्य प्राथमिकता से चल रहे हैं। विधायक विनोद चतुर्वेदी ने कहा कि हर साल बाढ़ इन इलाकों में तबाही मचाती है। इसके स्थायी समाधान के लिए डूब क्षेत्र में बसे लोगों को ऊंचाई वाले स्थानों पर बसाना होगा और उन्हें आवासीय पट्टे देने होंगे।
इस मौके पर माधौगढ़ विधायक मूलचंद निरंजन, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. घनश्याम अनुरागी, जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय, पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार, सीएमओ डॉ. एनडी शर्मा, सीओ अवधेश कुमार सिंह मौजूद रहे।


मिर्जापुर के ग्रामीण बोले- नेताओं की तस्वीरों में मिल रही मदद
रामपुरा। क्षेत्र के नदिया पार का गांव मिर्जापुरा चारों ओर से सिंध नदी से घिरा हुआ है । प्रत्येक वर्ष जब बाढ़ आती है तो सबसे ज्यादा इसी गांव के लोग परेशान होते हैं। मध्य प्रदेश के भिंड जिले की सीमाओं से लगे गांव में जब बाढ़ आती है तो निकलने का कोई रास्ता नहीं रह जाता है। पानी का बहाव जब ज्यादा होता है तब कुछ ग्रामीण छतों पर पन्नी लगाकर रहने को विवश होते हैं ।
बॉर्डर पर होने के चलते इस गांव में कोई मदद नहीं पहुंचती है राहत सामग्री और लंच पैकेट से भी यहां के वाशिंदे दूर रहते हैं। अधिकारी और नेता निनावली या इसके आसपास राहत सामग्री और लंच पैकेट बांटकर फोटो खिंचवाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं।
ग्रामीण छोटे लाल, नरेंद्र गिरजा सिंह, अनोज ने बताया कि पांच दिन से गांव वाले बाढ़ से घिरे हैं, अधिकारी छोड़िए लेखपाल ने भी गांव में आना मुनासिब नहीं समझा। प्रधान के पति राम शंकर पाल ने बताया कि केवल विधायक मूल चंद्र निरंजन कॉल के माध्यम से जानकारी लेते रहते हैं। (संवाद)

निनावली के ग्रामीणों से प्रभारी मंत्री ने किया संवाद, राहत सामग्री बांटी
माधौगढ़। प्रभारी मंत्री संजय सिंह गंगवार बाढ़ प्रभावित गांव निनावली का दौरा कर वहां के पीड़ित ग्रामीणों से संवाद किया और उन्हें राहत सामग्री वितरित की। माधौगढ़ विधायक मूलचंद निरंजन ने कहा कि, बाढ़ की इस आपदा में हमारी पहली प्राथमिकता है कि हर प्रभावित व्यक्ति तक आवश्यक सहायता समय से पहुंचे। (संवाद)
प्रशासन ने दिया बचाव कार्य का ब्योरा
डीएम ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत पहुंचाने के लिए 28 नावें, 590 राहत कर्मी, 31 चिकित्सकीय टीम, 62 ग्राम पंचायत सचिव व 27 राजस्व कर्मी तैनात किए गए। 20 हजार प्रभावित परिवारों की संख्या 18,650 रही, जबकि 36,510 व्यक्तियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। साथ ही 1,087 बाढ़ पीड़ितों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, 1,654 परिवारों को सूखा राशन, और 8,756 लोगों को पका हुआ भोजन वितरित किया गया। खराब पानी से जनस्वास्थ्य प्रभावित न हो, इसके लिए 34,000 लीटर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई। किसानों की हुई फसल का नुकसान के लिए सर्वे कराया जा रहा है। बारिश वह बाढ़ में हुए क्षतिग्रस्त घरों का सर्वे कर उनके परिवारों को 48 घंटे में सहायता दी जा रही है।

फोटो 40- पाली गांव में चारपाई को अपनी झोपड़ी में ले जाती बेघर हुई महिला। स्रोत ग्रामीण



फोटो 41- सड़क पर पानी में घुसकर जाते ग्रामीण। संवाद



निस्वापुर में भरा पानी, ट्रांसफार्मर डूबे, बिजली आपूर्ति ठप



कदौरा। ब्लॉक के निस्वापुर गांव में बाढ़ का पानी अब तक नहीं उतर पाया है। गांव के बीचोंबीच सड़कों और घरों में पानी भरा हुआ है। ग्रामीण प्रेम बाबू, सोनू यादव, कालका कुशवाहा, सती, रामेश्वर कुशवाहा और संतोष कुशवाहा ने बताया कि आधे से अधिक गांव अभी भी जलमग्न हैं। लोग कमर के नीचे तक पानी में डूबकर घरों से बाहर निकल रहे हैं। कई घरों में पानी अंदर तक भरा है, जिससे लोगों ने घर के सामान को ऊपर शिफ्ट कर लिया है। कच्चे मकानों के गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है। वहीं, गुलौली गांव में पानी धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन ट्रांसफार्मर के आसपास अभी भी पानी जमा है, जिसके चलते बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। क्षेत्र के निदान का डेरा, पाली, पिपरायां का डेरा, रामेश्वर का डेरा और झकराई का डेरा सहित करीब छह गांवों में अभी भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है। (संवाद)
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