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Jalaun News: जमीन पर खुले पड़े तार तो कहीं बिजली बॉक्स हुआ ध्वस्त
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उरई। करोड़ों खर्च होने के बाद भी बिजली की बदहाल पड़ी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हो पा रही हैं। शहर के अंदर अधिकतर ट्रांसफार्मर खुले में रखे हैं। इनकी जालियां टूट चुकी हैं, तार खुले पड़े हैं। अंडरग्राउंड बॉक्स लगाए गए थे, वह भी ध्वस्त हो चुके हैं।
सबसे ज्यादा खराब स्थिति मंडी के आसपास और इंदिरानगर मोहल्ले की है, जहां पर सालों से ट्रांसफार्मरों के खुले तार पड़े हैं और आसपास दुकानदार दुकानें खोले हुए हैं। वहीं, मंडी के पास जो बॉक्स लगाए गए हैं, वे भी खुले पड़े हैं। उनकी केबल बाहर आने लगी हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। इन व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए करीब 150 करोड़ रुपये से जिले में काम हो रहा है। इन व्यवस्थाओं को देखने के बाद लोगों के सवाल हैं कि आखिर बजट कहां खर्च हो रहा है।
ट्रांसफार्मर के खुले तार जमीन को छू रहे
मंडी गेट से पहले ही दो ट्रांसफार्मर रखे हुए हैं। दोनों ट्रांसफार्मरों से आधा दर्जन नंगे तार निकले हुए हैं, जो जमीन छू रहे हैं। इन ट्रांसफार्मरों के आसपास कोई जाली नहीं है। आसपास कई दुकानें भी खुली हैं। ट्रांसफार्मर के ठीक बगल में टट्टर लगा हुआ है। अगर चिंगारी से आग लगी तो कई दुकानें और घर आग की चपेट में आ सकते हैं। वहीं, इन नंगे तारों और केबलों को बांधा नहीं गया है। गर्मी में अगर आग लगी तो बड़ी घटना हो सकती है। सिर्फ मंडी के पास ही नहीं, इंदिरानगर रोड पर तीन जगह इस तरह की स्थिति है। इन तारों से निकलने वाली चिंगारी से कई बार आग लग चुकी है। इन तारों को सही से न बांधने और नई केबल न डालने से रोजाना फॉल्ट से सप्लाई बाधित रहती है।
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खुले पड़े अंडरग्राउंड केबल के बॉक्स।
मंडी गेट से लेकर इंदिरानगर में जगह-जगह अंडरग्राउंड केबल के बॉक्स खुले पड़े हैं। उनके अंदर लगी हुई केबलें बाहर पड़ी हैं। ये बॉक्स चालू हैं। इन बॉक्स के दरवाजे गायब हो चुके हैं। इनमें लगे हुए पुर्जे भी निकलने वाले हैं। अधिकतर बॉक्सों के दरवाजे नहीं हैं, जबकि केबलें सभी की बाहर निकली हुई हैं। अंडरग्राउंड केबल डालने और बॉक्स लगाने पर करोड़ों रुपये खर्च हुए थे। करीब आठ साल पहले इन्हें लगाया गया था। एक बार इन्हें चालू करने के बाद जिम्मेदारों ने इनकी तरफ ध्यान नहीं दिया। इससे इनकी बदहाली और बढ़ती जा रही है। जब विभाग से कहाे तो उनके पास बजट नहीं होता। अब असुविधा शहरवासियों को झेलनी पड़ रही है।
ट्रांसफार्मर ट्रॉली जर्जर, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान
बिजली विभाग के पास इमरजेंसी के लिए दो ट्रांसफार्मर ट्रॉलियां हैं। वर्तमान में दोनों बदहाल हैं। किसी के टायर खराब हो चुके हैं तो किसी की क्षमता अब ट्रांसफार्मर उठाने की नहीं बची। इंदिरानगर में कई सालों से ट्रांसफार्मर ट्रॉली खड़ी हुई है। वहीं, एक ट्रॉली जो राजेंद्रनगर में खड़ी थी, उसे विभाग के स्टोर में खड़ा कर दिया गया है। दोनों ट्रॉली पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं। इन्हें सालों से ठीक नहीं किया गया। अगर कहीं इमरजेंसी में ट्रांसफार्मर की जरूरत पड़ जाए तो घंटों के इंतजार और कागजी कार्रवाई के बाद ही उस जगह की सप्लाई चालू हो पाती है। इमरजेंसी ट्रांसफार्मर को तत्काल भेजकर सप्लाई चालू की जा सकती है, लेकिन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
खुले तारों और ट्रांसफार्मर ट्रॉली की जानकारी हुई है। ट्रॉली को ठीक करवाया जाएगा। खुले तारों को जाली में बंद करवाया जाएगा। –जितेंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता, बिजली विभाग
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सबसे ज्यादा खराब स्थिति मंडी के आसपास और इंदिरानगर मोहल्ले की है, जहां पर सालों से ट्रांसफार्मरों के खुले तार पड़े हैं और आसपास दुकानदार दुकानें खोले हुए हैं। वहीं, मंडी के पास जो बॉक्स लगाए गए हैं, वे भी खुले पड़े हैं। उनकी केबल बाहर आने लगी हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। इन व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए करीब 150 करोड़ रुपये से जिले में काम हो रहा है। इन व्यवस्थाओं को देखने के बाद लोगों के सवाल हैं कि आखिर बजट कहां खर्च हो रहा है।
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ट्रांसफार्मर के खुले तार जमीन को छू रहे
मंडी गेट से पहले ही दो ट्रांसफार्मर रखे हुए हैं। दोनों ट्रांसफार्मरों से आधा दर्जन नंगे तार निकले हुए हैं, जो जमीन छू रहे हैं। इन ट्रांसफार्मरों के आसपास कोई जाली नहीं है। आसपास कई दुकानें भी खुली हैं। ट्रांसफार्मर के ठीक बगल में टट्टर लगा हुआ है। अगर चिंगारी से आग लगी तो कई दुकानें और घर आग की चपेट में आ सकते हैं। वहीं, इन नंगे तारों और केबलों को बांधा नहीं गया है। गर्मी में अगर आग लगी तो बड़ी घटना हो सकती है। सिर्फ मंडी के पास ही नहीं, इंदिरानगर रोड पर तीन जगह इस तरह की स्थिति है। इन तारों से निकलने वाली चिंगारी से कई बार आग लग चुकी है। इन तारों को सही से न बांधने और नई केबल न डालने से रोजाना फॉल्ट से सप्लाई बाधित रहती है।
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खुले पड़े अंडरग्राउंड केबल के बॉक्स।
मंडी गेट से लेकर इंदिरानगर में जगह-जगह अंडरग्राउंड केबल के बॉक्स खुले पड़े हैं। उनके अंदर लगी हुई केबलें बाहर पड़ी हैं। ये बॉक्स चालू हैं। इन बॉक्स के दरवाजे गायब हो चुके हैं। इनमें लगे हुए पुर्जे भी निकलने वाले हैं। अधिकतर बॉक्सों के दरवाजे नहीं हैं, जबकि केबलें सभी की बाहर निकली हुई हैं। अंडरग्राउंड केबल डालने और बॉक्स लगाने पर करोड़ों रुपये खर्च हुए थे। करीब आठ साल पहले इन्हें लगाया गया था। एक बार इन्हें चालू करने के बाद जिम्मेदारों ने इनकी तरफ ध्यान नहीं दिया। इससे इनकी बदहाली और बढ़ती जा रही है। जब विभाग से कहाे तो उनके पास बजट नहीं होता। अब असुविधा शहरवासियों को झेलनी पड़ रही है।
ट्रांसफार्मर ट्रॉली जर्जर, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान
बिजली विभाग के पास इमरजेंसी के लिए दो ट्रांसफार्मर ट्रॉलियां हैं। वर्तमान में दोनों बदहाल हैं। किसी के टायर खराब हो चुके हैं तो किसी की क्षमता अब ट्रांसफार्मर उठाने की नहीं बची। इंदिरानगर में कई सालों से ट्रांसफार्मर ट्रॉली खड़ी हुई है। वहीं, एक ट्रॉली जो राजेंद्रनगर में खड़ी थी, उसे विभाग के स्टोर में खड़ा कर दिया गया है। दोनों ट्रॉली पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं। इन्हें सालों से ठीक नहीं किया गया। अगर कहीं इमरजेंसी में ट्रांसफार्मर की जरूरत पड़ जाए तो घंटों के इंतजार और कागजी कार्रवाई के बाद ही उस जगह की सप्लाई चालू हो पाती है। इमरजेंसी ट्रांसफार्मर को तत्काल भेजकर सप्लाई चालू की जा सकती है, लेकिन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
खुले तारों और ट्रांसफार्मर ट्रॉली की जानकारी हुई है। ट्रॉली को ठीक करवाया जाएगा। खुले तारों को जाली में बंद करवाया जाएगा। –जितेंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता, बिजली विभाग