फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   Why was the police station pressing for three hours if it was a suicide

सुसाइड ही था तो तीन घंटे क्यों दबाए रही थाना पुलिस

Fri, 24 Jul 2020 12:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2020 12:12 AM IST
विज्ञापन
Why was the police station pressing for three hours if it was a suicide
कदौरा थाने में गुस्साए खड़ी महिलाएं - फोटो : ORAI
उरई/कदौरा। सिपाही का शव थाना परिसर में मिलने के मामले में पुलिस की लापरवाही ही अब उसके गले की फांस बन गई है। पुलिस को मामले की जानकारी सुबह 8 बजे ही हो गई थी, इलाके में भी चर्चा हो गई थी द्धद्भ तीन घंटे यानि 11 बजे तक नीचे की मंजिल पर बने मुंशीयाने का कामकाज रोज की तरह चलता रहा और थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह भी अपने कमरे की कुर्सी पर ऐसे बैठे रहे जैसे कि कुछ हुआ ही न हो।
विज्ञापन

थाने के बाकी सिपाही भी शांत भाव से इधर-उधर टहलते दिखाई दे रहे थे। सुबह जब 11 बजे के आसपास अपर पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे तब जाकर सिपाही के शव मिलने की पुष्टि पूरी तरह से हो सकी। इलाकाई लोगों का कहना है कि यदि मामला वाकई सुसाइड का है तो थाना पुलिस को मामले को दबाने का प्रयास करने की क्या जरूरत थी। अधिकारियों को सुबह ही क्यों नहीं जानकारी दी गई। फिलहाल इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। पुलिस ने सिपाही रमेश का मोबाइल भी अपने कब्जे में लिया है। ललितपुर में सिपाही के पद पर कार्यरत रमेश के भाई अर्जुन का कहना है कि शव की स्थिति देख साफ है कि भाई के साथ कुछ गलत हुआ है। इसलिए उन्हें इंसाफ चाहिए है। सात भाइयों में रमेश सबसे छोटा था। दो भाइयों की मौत हो चुकी है। रमेश के दो बेटे शिवम (17), हिमांशु (13) व एक बेटी सीमा (20) झांसी में रहते हैं।
विज्ञापन

भइया कौ खा गयो दरोगा और दीवान
दोपहर बाद थाने पहुंचने वाले रमेश के परिजनों की भीड़ में महिलाओं की संख्या भी काफी थी। गुस्साई महिलाएं कई बार थाने के भीतर भी जा घुसी। रमेश की बहन बृजकुमारी बार-बार चिल्ला कर कह रही थी कि भइया कौ खा गयो दरोगा और दीवान। महिलाओं की चीखों से पूरा थाना काफी देर तक गूंजता रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

साथी की मौत से सिपाही गमगीन
एक दिन पहले तक जिस रमेश के साथ उसके साथी सिपाही हंसते बोलते थे, उसी को फंदे से लटका देख सभी की आंखें नम और जुबां खामोश थी। कोई कुछ नहीं बोल रहा था। कुछ सिपाहियों ने सिर्फ इतना ही बताया कि रमेश काफी सरल स्वभाव का था और सभी से हंसता बोलता था, कभी किसी बीमारी का भी जिक्र नहीं किया।
बेमर्जी ड्यूटी भी हो सकती वजह
सिपाही भले ही अपने मुंह से कुछ न कह रहे हों लेकिन घटना के पीछे कहीं न कहीं सिपाहियों का ड्यूटी को लेकर तनाव ही मुख्य वजह मानी जा रही है। सूत्रोंनुसार अक्सर सिपाहियों की अपने अधिकारियों से कहासुनी भी इसी ड्यूटी के कारण होती है। किसी की अनावश्यक जगह तो किसी की लगातार ड्यूटी लगाए जाना भी मानसिक तनाव देता है।

रात में की थी पत्नी से बात
पत्नी शैल ने बताया कि पति से रात में रोज की तरह फोन पर साधारण बातचीत हुई थी। घर के हाल चाल और बच्चों के बारे में पूछा था। पति को बड़ी बेटी की पढ़ाई के साथ साथ उसकी शादी की भी चिंता रहती थी। अक्सर वह बेटी की शादी बड़े धूमधाम से करने की बात किया करते थे। बीमारी या फिर तनाव की कोई बात ही नहीं थी।

थाने के बाहर लगी भीड़

थाने के बाहर लगी भीड़- फोटो : ORAI

कदौरा थाने मैं जिस बेरिंग में सिपाही ने फांसी लगाई उसका निरीक्षण करते अपर पुलिस अधीक्षक अवधेश कु?

कदौरा थाने मैं जिस बेरिंग में सिपाही ने फांसी लगाई उसका निरीक्षण करते अपर पुलिस अधीक्षक अवधेश कु?- फोटो : ORAI

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed