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Jalaun News: बेतवा नदी का जलस्तर बढ़ा, तटवर्ती गांवों में खतरा
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मुहम्मदाबाद। शनिवार और रविवार की रात लहचूरा व माताटीला बांधों से एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद बेतवा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे मुहाना, मकरेछा, बंधौली, गुढ़ा, सिमरिया, खरका, ददरी टीकर जैसे तटवर्ती गांवों के लिए बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों को पहले ही अलर्ट कर दिया गया है।
बेतवा का खतरे का निशान 122.66 मीटर और चेतावनी बिंदु 121.66 मीटर निर्धारित है। रविवार शाम 4 बजे नदी का जलस्तर 119.10 मीटर था, जो सोमवार दोपहर 1 बजे तक 120.5 मीटर तक पहुंच गया। यानी यह फिलहाल खतरे के निशान से मात्र 2.1 मीटर नीचे और चेतावनी बिंदु से 1.1 मीटर नीचे है। लगातार बारिश और बांधों के जलस्तर अधिकतम सीमा पर पहुंचने के कारण बांधों से पानी छोड़ा जा रहा है। शुक्रवार को 40 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जिससे जलस्तर 111.66 मीटर पर बना हुआ था। लेकिन इसके बाद अचानक जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। बेतवा किनारे तैनात कर्मचारी देवेंद्र ने बताया कि यदि और पानी छोड़ा गया तो जलस्तर खतरे के निशान को पार कर सकता है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों के निवासियों को सतर्क रहने और रात में विशेष रूप से सतर्कता बरतने की सलाह दी है। स्थानीय निवासी वीरेंद्र, संजीव, रामकुमार, योगेंद्र और पवन ने बताया कि हर साल बेतवा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंचती है। बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ता है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर गांवों के अंदर पानी पहुंचता है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में रहती है। केवल श्मशान घाट (मरघट) जाने में परेशानी होती है।
एसडीएम ने किया दौरा, ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
कालपी। बेतवा नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। सोमवार को एसडीएम अतुल कुमार ने राजस्व और पुलिस अधिकारियों के साथ बेतवा नदी की तलहटी में बसे गांवों का दौरा किया और ग्रामीणों को सतर्कता बरतने की सलाह दी।
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प्रशासन ने रविवार को ही संभावित बाढ़ की चेतावनी जारी कर दी थी। इसमें बताया गया था कि राजघाट बांध से 30,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। सोमवार को इसका प्रभाव बेतवा नदी में दिखना शुरू हो गया। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, सोमवार को बेतवा नदी का जलस्तर 119 मीटर को पार कर गया है। हालांकि यह अभी भी खतरे के निशान से करीब तीनमीटर नीचे है।
एसडीएम अतुल कुमार ने थाना अध्यक्ष कदौरा, राजस्व कर्मियों के साथ हेमनपुरा, पथरेहठा और क्योटरा जैसे तटीय गांवों का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि वह नदी के पास न जाए और मवेशियों को भी दूर रखें। एसडीएम ने कहा कि फिलहाल नदी का जलस्तर आबादी से दूर है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। यमुना नदी के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। फिलहाल इसका स्तर 98.90 सेंटीमीटर पर दर्ज किया गया है। केंद्रीय जल आयोग के सदस्य रूपेश कुमार ने बताया कि अभी यमुना का जलस्तर सामान्य है, लेकिन आगामी दो दिनों में इसकी सहायक नदियों का पानी मिलने से इसका स्तर बढ़ सकता है। फिलहाल बाढ़ की कोई तात्कालिक आशंका नहीं है। (संवाद)
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बेतवा का खतरे का निशान 122.66 मीटर और चेतावनी बिंदु 121.66 मीटर निर्धारित है। रविवार शाम 4 बजे नदी का जलस्तर 119.10 मीटर था, जो सोमवार दोपहर 1 बजे तक 120.5 मीटर तक पहुंच गया। यानी यह फिलहाल खतरे के निशान से मात्र 2.1 मीटर नीचे और चेतावनी बिंदु से 1.1 मीटर नीचे है। लगातार बारिश और बांधों के जलस्तर अधिकतम सीमा पर पहुंचने के कारण बांधों से पानी छोड़ा जा रहा है। शुक्रवार को 40 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जिससे जलस्तर 111.66 मीटर पर बना हुआ था। लेकिन इसके बाद अचानक जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। बेतवा किनारे तैनात कर्मचारी देवेंद्र ने बताया कि यदि और पानी छोड़ा गया तो जलस्तर खतरे के निशान को पार कर सकता है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों के निवासियों को सतर्क रहने और रात में विशेष रूप से सतर्कता बरतने की सलाह दी है। स्थानीय निवासी वीरेंद्र, संजीव, रामकुमार, योगेंद्र और पवन ने बताया कि हर साल बेतवा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंचती है। बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ता है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर गांवों के अंदर पानी पहुंचता है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में रहती है। केवल श्मशान घाट (मरघट) जाने में परेशानी होती है।
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एसडीएम ने किया दौरा, ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
कालपी। बेतवा नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। सोमवार को एसडीएम अतुल कुमार ने राजस्व और पुलिस अधिकारियों के साथ बेतवा नदी की तलहटी में बसे गांवों का दौरा किया और ग्रामीणों को सतर्कता बरतने की सलाह दी।
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प्रशासन ने रविवार को ही संभावित बाढ़ की चेतावनी जारी कर दी थी। इसमें बताया गया था कि राजघाट बांध से 30,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। सोमवार को इसका प्रभाव बेतवा नदी में दिखना शुरू हो गया। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, सोमवार को बेतवा नदी का जलस्तर 119 मीटर को पार कर गया है। हालांकि यह अभी भी खतरे के निशान से करीब तीनमीटर नीचे है।
एसडीएम अतुल कुमार ने थाना अध्यक्ष कदौरा, राजस्व कर्मियों के साथ हेमनपुरा, पथरेहठा और क्योटरा जैसे तटीय गांवों का निरीक्षण किया। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि वह नदी के पास न जाए और मवेशियों को भी दूर रखें। एसडीएम ने कहा कि फिलहाल नदी का जलस्तर आबादी से दूर है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। यमुना नदी के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। फिलहाल इसका स्तर 98.90 सेंटीमीटर पर दर्ज किया गया है। केंद्रीय जल आयोग के सदस्य रूपेश कुमार ने बताया कि अभी यमुना का जलस्तर सामान्य है, लेकिन आगामी दो दिनों में इसकी सहायक नदियों का पानी मिलने से इसका स्तर बढ़ सकता है। फिलहाल बाढ़ की कोई तात्कालिक आशंका नहीं है। (संवाद)