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क साल में 3168 बच्चों ने छोड़ दी कोरोना काल में पढ़ाई
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उरई। कोरोना महामारी ने कई नौनिहालों की पढ़ाई पर सीधे तौर पर असर डाला है। वर्ष 2021-2022 में ही जिले के 3160 बच्चों को पढ़ाई छोड़नी पड़ी है। इसमें लड़कियों की अपेक्षा लड़कों का प्रतिशत अधिक है।
कोरोना की पहली लहर में बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार, व्यापार प्रभावित हुए। शहरों में या बाहर जाकर अपने परिवार को पालने वाले मजदूरों, छोटे कर्मचारियों पर इसका असर अधिक हुआ। जबकि कोरोना की दूसरी लहर में एकाएक मौतों की संख्या बढ़ने पर कई लोग अपना रोजगार छोड़कर घर चले आए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस बार जिले में ऐसे छात्र-छात्राओं की संख्या 3168 है, जिन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की संख्या अधिक है। इनमें से अधिकांश लोग ऐसे हैं, जिन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान मोबाइल, लैपटाप की व्यवस्था न होने की वजह से स्कूल से नाम कटवा लिया था। कई अभिभावकों ने जागरुकता और तकनीकी जानकारी कम होने की वजह से अपने बच्चों को नाम कटवाना ज्यादा ठीक समझा।
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ऐसे बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देने के निर्देश
शासन ने अधिकारियों को 2021-2022 में पढ़ाई छोड़ने वाले सभी बच्चों को चिह्ति करने के आदेश दिए हैं। ताकि उन बच्चों का फिर से पढ़ाई की ओर रूझान बढ़े। इसके लिए शासन स्तर से धनराशि भी आवंटित की गई है। इसके लिए बच्चों को पेंसिल, रबड़, कटर इत्यादि भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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पढ़ाई छोड़ने में लड़कों की संख्या अधिक
जिले में पढ़ाई छोड़ने वाले कुल छात्र-छात्राओं 3168 में से सबसे अधिक छात्र हैं। इनमें से 1682 यानी 53.23 प्रतिशत छात्र और 1478 यानी 46.77 प्रतिशत छात्राएं शामिल हैं।
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फिर से स्कूल से जोड़ने का अभियान शुरू
बीएसए प्रेमचंद यादव का कहना है कि स्कूल छोडने वाले बच्चों को फिर से स्कूल से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। विभाग की टीमें बच्चों को चिह्नित कर रही है। जिन बच्चों को चिह्नित कर लिया गया है। उन्हें फिर से स्कूलों में दाखिला दिलाकर पढ़ाई कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि वैसे हर साल स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को स्कूल से जोड़ने का अभियान चलता है।
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कोरोना की पहली लहर में बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार, व्यापार प्रभावित हुए। शहरों में या बाहर जाकर अपने परिवार को पालने वाले मजदूरों, छोटे कर्मचारियों पर इसका असर अधिक हुआ। जबकि कोरोना की दूसरी लहर में एकाएक मौतों की संख्या बढ़ने पर कई लोग अपना रोजगार छोड़कर घर चले आए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस बार जिले में ऐसे छात्र-छात्राओं की संख्या 3168 है, जिन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। इसमें ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की संख्या अधिक है। इनमें से अधिकांश लोग ऐसे हैं, जिन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान मोबाइल, लैपटाप की व्यवस्था न होने की वजह से स्कूल से नाम कटवा लिया था। कई अभिभावकों ने जागरुकता और तकनीकी जानकारी कम होने की वजह से अपने बच्चों को नाम कटवाना ज्यादा ठीक समझा।
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ऐसे बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देने के निर्देश
शासन ने अधिकारियों को 2021-2022 में पढ़ाई छोड़ने वाले सभी बच्चों को चिह्ति करने के आदेश दिए हैं। ताकि उन बच्चों का फिर से पढ़ाई की ओर रूझान बढ़े। इसके लिए शासन स्तर से धनराशि भी आवंटित की गई है। इसके लिए बच्चों को पेंसिल, रबड़, कटर इत्यादि भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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पढ़ाई छोड़ने में लड़कों की संख्या अधिक
जिले में पढ़ाई छोड़ने वाले कुल छात्र-छात्राओं 3168 में से सबसे अधिक छात्र हैं। इनमें से 1682 यानी 53.23 प्रतिशत छात्र और 1478 यानी 46.77 प्रतिशत छात्राएं शामिल हैं।
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फिर से स्कूल से जोड़ने का अभियान शुरू
बीएसए प्रेमचंद यादव का कहना है कि स्कूल छोडने वाले बच्चों को फिर से स्कूल से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। विभाग की टीमें बच्चों को चिह्नित कर रही है। जिन बच्चों को चिह्नित कर लिया गया है। उन्हें फिर से स्कूलों में दाखिला दिलाकर पढ़ाई कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि वैसे हर साल स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को स्कूल से जोड़ने का अभियान चलता है।