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गोशालाओं का बुरा हाल, टीन है न तिरपाल़़़़
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एट की गोशाला तालाब में तब्दील, जमी काई की परतें।
- फोटो : ORAI
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उरई। लगातार तीन दिन से हो रही बारिश ने गोशालाओं की सूरत बिगाड़ दी है। रही सही कसर जिम्मेदारों की अनदेखी ने पूरी कर दी है। गोशालाओं में न तो टिनशेड है और न तिरपाल। ऐसे में मवेशी भी कैसे रहेेंगे। अनदेखी के चलते गोशालाओं में सिर्फ कीचड़, दलदल और जलभराव ही देखने को मिल रहा है। एट की गोशाला तो चालू न होने के कारण तालाब में तब्दील हो गई है। एसडीएम कौशल कुमार का कहना है कि जल्द ही व्यवस्थाओं को ठीक किया जाएगा। प्रस्तुत है कालपी तहसील क्षेत्र की गोशालाओं पर आधारित पड़ताल करती एक रिपोर्ट-
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साहब, कब तक अमल में आएंगे निर्देश
कालपी। क्षेत्र की आलमपुर गोशाला में बारिश के चलते कीचड़ और दलदल ही नजर आ रहा है। लिहाजा मवेशी नहीं टिकते है। पानी और चारे की भी स्थिति खराब है। अन्ना मवेशियों की भीड़ बारिश के वक्त पेड़ की छांव में खड़े दिखाई देती हैं। शुक्रवार को ही क्षेत्रीय विधायक व एसडीएम ने गोशाला जाकर वहां की हालत देखी और तत्काल ही उसकी साफ सफाई के निर्देश दिए, देखना है कि कब तक उन्हें अमल में लाया जाता है।
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कार्रवाई बेअसर, मवेशी भटके दर दर
कदौरा। ब्लाक क्षेत्र में 800 से अधिक मवेशी है लेकिन ठीक ठाक गोशाला एक भी नहीं है। उस पर बारिश ने कोढ़ में खाज का काम किया है। ग्राम गरहेरी, कुरहना, आलमगीर व बबीना की गोशालाएं बदहाल है। पानी और कीचड़ ही है। कुछ ही दिन पहले नोडल अधिकारी ने ग्राम विकास अधिकारी को मवेशियों की मौत पर निलंबित भी किया था। फिर भी हालात जस के तस है। इस बारिश ने तो व्यवस्था की पोल ही खोलकर रख दी है।
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चरही में डाली चारपाई, कौन पूछेगा
आटा। क्षेत्र की गोशालाएं भी बारिश की चपेट से दूर नहीं है। अधिकांश गोशालाओं में सिर्फ कीचड़ और जलभराव ही दिखाई देता है। रास्ता ऐसा कि दो कदम भी चलना मुश्किल हो जाए। अधिकांश गोशालाएं चारे पानी के न होने व कीचड़ भरा होने से खाली पड़ी है। गोशाला के गेट से लेकर भीतर तक सिर्फ कीचड़ ही दिखाई देता है। कस्बे की कृष्णा गोशाला में तो कर्मचारियों ने सूखा स्थान देख चरही में ही चारपाई डाल रखी है। कोई देखने वाला नहीं है।
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साहब, कब तक अमल में आएंगे निर्देश
कालपी। क्षेत्र की आलमपुर गोशाला में बारिश के चलते कीचड़ और दलदल ही नजर आ रहा है। लिहाजा मवेशी नहीं टिकते है। पानी और चारे की भी स्थिति खराब है। अन्ना मवेशियों की भीड़ बारिश के वक्त पेड़ की छांव में खड़े दिखाई देती हैं। शुक्रवार को ही क्षेत्रीय विधायक व एसडीएम ने गोशाला जाकर वहां की हालत देखी और तत्काल ही उसकी साफ सफाई के निर्देश दिए, देखना है कि कब तक उन्हें अमल में लाया जाता है।
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कार्रवाई बेअसर, मवेशी भटके दर दर
कदौरा। ब्लाक क्षेत्र में 800 से अधिक मवेशी है लेकिन ठीक ठाक गोशाला एक भी नहीं है। उस पर बारिश ने कोढ़ में खाज का काम किया है। ग्राम गरहेरी, कुरहना, आलमगीर व बबीना की गोशालाएं बदहाल है। पानी और कीचड़ ही है। कुछ ही दिन पहले नोडल अधिकारी ने ग्राम विकास अधिकारी को मवेशियों की मौत पर निलंबित भी किया था। फिर भी हालात जस के तस है। इस बारिश ने तो व्यवस्था की पोल ही खोलकर रख दी है।
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चरही में डाली चारपाई, कौन पूछेगा
आटा। क्षेत्र की गोशालाएं भी बारिश की चपेट से दूर नहीं है। अधिकांश गोशालाओं में सिर्फ कीचड़ और जलभराव ही दिखाई देता है। रास्ता ऐसा कि दो कदम भी चलना मुश्किल हो जाए। अधिकांश गोशालाएं चारे पानी के न होने व कीचड़ भरा होने से खाली पड़ी है। गोशाला के गेट से लेकर भीतर तक सिर्फ कीचड़ ही दिखाई देता है। कस्बे की कृष्णा गोशाला में तो कर्मचारियों ने सूखा स्थान देख चरही में ही चारपाई डाल रखी है। कोई देखने वाला नहीं है।