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घाटे में चल रही सहकारी समितियां
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खाद के लिए लाइन लगाए किसान।
- फोटो : ORAI
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माधौगढ़। कृषि अधिकारियों की निष्क्रियता सचिवों की लापरवाही के चलते 6 साधन सहकारी समितियां घाटे में चल रही है। यही कारण है किसानों को खाद लेने के लिए भटकना पड़ रहा है। सरकार ने खाद बीज के साथ साथ गेहूं क्रय खरीद करने के लिए साधन सहकारी समिति की स्थापना की। जिससे किसान साल में दो बार खाते से खाद ले सकते हैं। वही समिति में खुले गेहूं क्रय केंद्र में गेहूं देकर किसान कर्जा से मुक्त हो जाता था लेकिन सचिवों की लापरवाही के चलते फायदे वाली सहकारी समितियां घाटे में चल रही है।
क्षेत्र में साधन सहकारी समिति गोपालपुरा, मिझौना, अटागांव, हरौली, रूदपुरा,धमना, गोहन, गोराभूपका,अमखेड़ा, सरावन सहित दस समिति है। जिसमें हरौली, धमना, अमखेडा़ सहकारी समितियों में एक-दो गाड़ी ही खाद की मंगाई गई। इस कारण किसान परेशान है। उन्होंने समिति के पदाधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाया है। साथ ही जल्द खाद मुहैया कराने की मांग की है। जिला निबंधक सहकारी समितियां पीएन अनुरागी का कहना है कि समिति द्वारा चेक आने पर समितियों को खाद भेज दी जाती है।
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फोटो-14-अमर सिंह।
अटागांव समिति में नहीं आई खाद
अटागांव निवासी अमर सिंह मास्टर का कहना है कि समितियों को घाटे में लाने का श्रेय सचिवों को है। सचिवों की जिम्मेदारी है कि जून में किसानों की साख (क्रेडिट) बैंक से बनवा लें। चेक पीसीएफ में जमा कर दें। पीसीएफ समितियों को खाद भेजती रहती है। अटागांव की समिति के सचिव प्रेमचंद शर्मा की लापरवाही का आलम है समिति में एक बोरी खाद नहीं आई। जबकि एक समिति की साख (क्रेडिट) 6 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक हो सकती है।
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फोटो-15-कौशलेंद्र सिंह।
किसानों के चेक समिति के कर्मचारियों के पास
चितौरी निवासी किसान कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि गांव में साधन सहकारी समिति खुली है। 80 प्रतिशत किसानों की चेक समितियों के कर्मचारी ही भरते हैं। इस कारण चेक को कर्मचारी अपने पास ही रखे रहते हैं। जिससे अनपढ़ किसानों को लेनदेन में जमकर ठगा जाता है। सहकारी समिति में श्यामबिहारी की दो जगह तैनाती है। फिर भी किसानों के लिए एक-दो ट्रक खाद भेजी गई। जिससे समिति में लगने वाले एक दर्जन गांवों के किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।
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फोटो-16-नारायण सिंह।
समय से नहीं हो पाती है बुवाई
किसान नारायण सिंह भदौरिया का कहना है कि क्रय विक्रय समिति ही खाद वितरित कर रही है। इतना बड़ा क्षेत्र होने से क्रय विक्रय में खाद के लिए मारामारी मची रहती है। खाद के अभाव में हमेशा किसानों को समय से बुवाई नहीं हो पाती है। यही कारण है फसल के उत्पादन में पड़ जाता है।
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क्षेत्र में साधन सहकारी समिति गोपालपुरा, मिझौना, अटागांव, हरौली, रूदपुरा,धमना, गोहन, गोराभूपका,अमखेड़ा, सरावन सहित दस समिति है। जिसमें हरौली, धमना, अमखेडा़ सहकारी समितियों में एक-दो गाड़ी ही खाद की मंगाई गई। इस कारण किसान परेशान है। उन्होंने समिति के पदाधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाया है। साथ ही जल्द खाद मुहैया कराने की मांग की है। जिला निबंधक सहकारी समितियां पीएन अनुरागी का कहना है कि समिति द्वारा चेक आने पर समितियों को खाद भेज दी जाती है।
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फोटो-14-अमर सिंह।
अटागांव समिति में नहीं आई खाद
अटागांव निवासी अमर सिंह मास्टर का कहना है कि समितियों को घाटे में लाने का श्रेय सचिवों को है। सचिवों की जिम्मेदारी है कि जून में किसानों की साख (क्रेडिट) बैंक से बनवा लें। चेक पीसीएफ में जमा कर दें। पीसीएफ समितियों को खाद भेजती रहती है। अटागांव की समिति के सचिव प्रेमचंद शर्मा की लापरवाही का आलम है समिति में एक बोरी खाद नहीं आई। जबकि एक समिति की साख (क्रेडिट) 6 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक हो सकती है।
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फोटो-15-कौशलेंद्र सिंह।
किसानों के चेक समिति के कर्मचारियों के पास
चितौरी निवासी किसान कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि गांव में साधन सहकारी समिति खुली है। 80 प्रतिशत किसानों की चेक समितियों के कर्मचारी ही भरते हैं। इस कारण चेक को कर्मचारी अपने पास ही रखे रहते हैं। जिससे अनपढ़ किसानों को लेनदेन में जमकर ठगा जाता है। सहकारी समिति में श्यामबिहारी की दो जगह तैनाती है। फिर भी किसानों के लिए एक-दो ट्रक खाद भेजी गई। जिससे समिति में लगने वाले एक दर्जन गांवों के किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।
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फोटो-16-नारायण सिंह।
समय से नहीं हो पाती है बुवाई
किसान नारायण सिंह भदौरिया का कहना है कि क्रय विक्रय समिति ही खाद वितरित कर रही है। इतना बड़ा क्षेत्र होने से क्रय विक्रय में खाद के लिए मारामारी मची रहती है। खाद के अभाव में हमेशा किसानों को समय से बुवाई नहीं हो पाती है। यही कारण है फसल के उत्पादन में पड़ जाता है।