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हमीरपुर के ध्यानार्थ...अपहरण के मामले में युवक को आजीवन कारावास
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उरई। अपहरण के मामले में दोषी पाए गए युवक को स्पेशल जज एंटी डकैती ने उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामला करीब 22 साल पुराना है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि उरई कोतवाली क्षेत्र के इमिलिया गांव निवासी सुरेश बाबू ने उरई कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 24 अक्तूबर 1999 की रात साढ़े आठ बजे उसके चाचा रामसेवक का चार लोगों ने अपहरण कर लिया है। इसमें बंगरा थाना चिकासी जिला हमीरपुर निवासी प्रमोद कुमार, इसी जिले के मुन्ना, काशीराम व अशोक को नामजद कराया गया था। मुकदमे के ट्रायल के दौरान मुन्ना, काशीराम व अशोक की मौत हो गई। सुनवाई के दौरान स्पेशल जज एंटी डकैती अचल लवानिया ने प्रमोद कुमार को दोषी पाया। उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
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बदमाश की हत्या कर बचाई थी जान
शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि रामसेवक को अपहरणकर्ताओं ने झांसी जिले के ककरबई के जंगल में बंधक बनाकर रखा था। उस वक्त कालका नामक बदमाश रामसेवक की पहरेदारी कर रहा था। करीब एक महीने बाद रामसेवक ने लघुशंका का बहाना बनाकर कालका से हाथ खुलवा लिए थे। इसके बाद उसकी बंदूक छीनकर बट् से पीटकर कालका की हत्या कर दी थी। इसके बाद रामसेवक खुद ही ककरबई थाने पहुंच गया था। पुलिस ने मामले में रामसेवक पर हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने विवेचना के दौरान परिस्थितियों को देखते हुए रामसेवक पर दर्ज मुकदमा खत्म कर दिया था।
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अपर जिला शासकीय अधिवक्ता महेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि उरई कोतवाली क्षेत्र के इमिलिया गांव निवासी सुरेश बाबू ने उरई कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 24 अक्तूबर 1999 की रात साढ़े आठ बजे उसके चाचा रामसेवक का चार लोगों ने अपहरण कर लिया है। इसमें बंगरा थाना चिकासी जिला हमीरपुर निवासी प्रमोद कुमार, इसी जिले के मुन्ना, काशीराम व अशोक को नामजद कराया गया था। मुकदमे के ट्रायल के दौरान मुन्ना, काशीराम व अशोक की मौत हो गई। सुनवाई के दौरान स्पेशल जज एंटी डकैती अचल लवानिया ने प्रमोद कुमार को दोषी पाया। उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
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बदमाश की हत्या कर बचाई थी जान
शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि रामसेवक को अपहरणकर्ताओं ने झांसी जिले के ककरबई के जंगल में बंधक बनाकर रखा था। उस वक्त कालका नामक बदमाश रामसेवक की पहरेदारी कर रहा था। करीब एक महीने बाद रामसेवक ने लघुशंका का बहाना बनाकर कालका से हाथ खुलवा लिए थे। इसके बाद उसकी बंदूक छीनकर बट् से पीटकर कालका की हत्या कर दी थी। इसके बाद रामसेवक खुद ही ककरबई थाने पहुंच गया था। पुलिस ने मामले में रामसेवक पर हत्या का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने विवेचना के दौरान परिस्थितियों को देखते हुए रामसेवक पर दर्ज मुकदमा खत्म कर दिया था।
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