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उफनाए चेकडैम में डूबकर दो किशोरियों की मौत

Thu, 19 Sep 2019 12:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2019 12:00 AM IST
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Two teenagers drowned in buried check dams
कदौरा (जालौन)। यमुना नदी के उफनाने से पानी से लबालब भरे रैला गांव के चेकडैम के नजदीक बकरियां चराने गई तीन किशोरियां डूब गई। इनमें से दो की मौत हो गई। किसी तरह तैरकर बाहर निकली तीसरी किशोरी ने गांव पहुंचकर जानकारी दी, जिससे पूरे गांव में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।
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बुधवार की दोपहर करीब 12 बजे क्षेत्र के रैला गांव निवासी सीता (13) पुत्री शंभू धानुक, शीलू (14) पुत्री पप्पू धानुक व सत्तो (12) बकरियां लेकर गांव के नजदीक जंगल तरफ गई थी। इसी बीच उनकी एक बकरी नजदीक स्थित चेकडैम की ओर चली गई। जिसको वहां से निकालने के लिए सीता चेकडैम के पास पहुंची ही थी कि अचानक उसका पैर फिसल गया और वह डैम के पानी में जा गिरी। उसे बचाने के लिए शीलू भी पानी में कूद गई। दोनों सहेलियों को पानी में डूबते देख सत्तो ने भी पानी में घुसकर उन्हें बचाने की कोशिश की लेकिन जब असफल होने लगी तो वह बाहर निकल आई और सीधे गांव जाकर वहां लोगों को खबर दी। जानकारी मिलते ही पूरे गांव में हड़कंप मच गया। सीता और शीलू के परिजनों के साथ गांव वालों की भीड़ भी मौके पर पहुंच गई और कुछ तैराक युवकों ने डैम में छलांग लगा दी। कुछ ही देर बाद सूचना पाकर पुलिस भी वहां पहुंच गई। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद सीता और शीलू के शव बाहर मिल सके। बच्चियों के शव देखते ही उनके परिजनों में चीख पुकार मच गई। पुलिस ने दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। सीता कक्षा आठ की छात्रा थी। सहेलियों की मौत से सत्तो इस कदर दहशत में थी कि देर शाम तक वह अपने परिजनों से लिपटकर बिलखती रही।
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शवों को देख फटा ममता का कलेजा
सीता की मां मुस्सो व शीलू की मां माया अपनी अपनी बच्चियों का शव देखकर बदहवास सी हो गई। जब भी होश में आती तो जुबान से सिर्फ यही निकलता कि उठ जाओ लाडो। दोनों की मां की हालत देख आसपास खड़ी महिलाओं की आंखें भी नम हो गई।
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दोनों के ही परिवार करते हैं मजदूरी
सीता और शीलू दोनों के परिवार मजदूरी करते हैं। सीता के भाई अनिल ने बताया कि पिता की मौत 10 वर्ष पूर्व हो चुकी थी। सात भाई बहनों में सीता दूसरे नंबर की थी। शीलू का पिता पप्पू दिल्ली में रहकर मजदूरी करता है। शीलू 10 भाई बहनों में चौथे नंबर की थी।

न योजनाओं का लाभ, न पहुंचा कोई अफसर
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी रोष था कि मरने वाली दोनों बच्चियों के परिजन पात्र होने के बाद भी आवास, शौचालय आदि सरकारी योजनाओं से वंचित है। इसके अलावा हादसे के बाद भी कोई प्रशासन का अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
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