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पौधरोपण की सच्चाई : 95 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य, 50 प्रतिशत से ज्यादा नष्ट
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उरई। जिले में वन विभाग और अन्य विभागों द्वारा वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 25.5 हेक्टेयर जमीन पर पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। शासन के निर्देशानुसार 95 लाख पौधे लगाए जाने थे। इसमें 50 लाख पौधों की जिम्मेदारी वन विभाग और शेष 42 लाख पौधों की जिम्मेदारी अन्य विभागों को सौंपी गई थी।
अंतरराष्ट्रीय वन दिवस 21 मार्च और शासन द्वारा निश्चित पौधारोपण दिवस 20 जुलाई को जिले भर में बड़े स्तर पर पौधे रोपित किए गए थे। इस अभियान को राज्यमंत्री राकेश राठौर ने भी प्रोत्साहित किया। हालांकि, चार महीने बाद जब इन पौधों को वृक्ष का रूप लेना चाहिए था तो स्थिति बेहद चिंताजनक है। विभागों द्वारा लगाए गए 42 लाख पौधों में केवल 15-20 प्रतिशत पौधे ही बच पाए हैं, जबकि अधिकांश सूखकर नष्ट हो गए। कागजों में हरियाली दिख रही है। विभागों द्वारा लगवाए गए पौधे कागजों में पेड़ बन चुके हैं।
पेड़ों का पता नहीं, कुछ अभी भी बिना रोपे जमीन पर पड़े
पौधों को लगाने व उन्हें संरक्षित करने के लिए प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं, लेकिन जिले में फिर भी स्थितियों में कोई सुधार नहीं हुआ। इसका उदाहरण यह है कि कई क्षेत्रों में लगाए गए पौधे वहां से गायब हो गए या तो उन्हें जानवरों ने नष्ट कर दिया। कुछ जगहों पर स्थिति यह है कि नर्सरी से जैसे पौधे भेजे गए थे। वह वैसे ही उसी जगह पर पॉलीथिन में लिपटे पड़े हैं, लेकिन कागजों में सब कुछ ठीक चल रहा है।
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विभागों की लापरवाही उजागर
नगर पालिका, नगर पंचायत, बिजली विभाग, शिक्षा विभाग और उद्योग विभाग ने पौधारोपण के प्रति घोर लापरवाही दिखाई है। इन विभागों ने पौधे लगाने के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई पूरी की। न तो पौधों की देखरेख की गई और न ही उन्हें संरक्षित करने के लिए प्रयास किए गए। कई स्थानों पर तो पौधे लगाए ही नहीं गए।
वन विभाग कार्यालय के पास से गायब हो गए पौधे
वन विभाग के ठीक बगल में 30 के करीब पौधे लगाए गए थे, लेकिन पालिका के कूड़ा डालने के चलते सभी नष्ट हो गए। इसको लेकर वन विभाग में नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बाद न तो पौधे लगाए गए न ही कूड़ा डालना बंद हुआ। इसको लेकर नगर पालिका और वन विभाग के बीच काफी तनातनी मची हुई है।
लापरवाह विभागों पर होगी कार्रवाई
डीएफओ प्रदीप कुमार ने बताया कि जिन विभागों ने पौधारोपण के प्रति उदासीनता दिखाई है, उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। यह भी जांच की जाएगी कि उनके द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कितने पौधे लगाए गए और उनमें से कितने वृक्ष बन पाए। यदि लापरवाही साबित होती है तो इस मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
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अंतरराष्ट्रीय वन दिवस 21 मार्च और शासन द्वारा निश्चित पौधारोपण दिवस 20 जुलाई को जिले भर में बड़े स्तर पर पौधे रोपित किए गए थे। इस अभियान को राज्यमंत्री राकेश राठौर ने भी प्रोत्साहित किया। हालांकि, चार महीने बाद जब इन पौधों को वृक्ष का रूप लेना चाहिए था तो स्थिति बेहद चिंताजनक है। विभागों द्वारा लगाए गए 42 लाख पौधों में केवल 15-20 प्रतिशत पौधे ही बच पाए हैं, जबकि अधिकांश सूखकर नष्ट हो गए। कागजों में हरियाली दिख रही है। विभागों द्वारा लगवाए गए पौधे कागजों में पेड़ बन चुके हैं।
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पेड़ों का पता नहीं, कुछ अभी भी बिना रोपे जमीन पर पड़े
पौधों को लगाने व उन्हें संरक्षित करने के लिए प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं, लेकिन जिले में फिर भी स्थितियों में कोई सुधार नहीं हुआ। इसका उदाहरण यह है कि कई क्षेत्रों में लगाए गए पौधे वहां से गायब हो गए या तो उन्हें जानवरों ने नष्ट कर दिया। कुछ जगहों पर स्थिति यह है कि नर्सरी से जैसे पौधे भेजे गए थे। वह वैसे ही उसी जगह पर पॉलीथिन में लिपटे पड़े हैं, लेकिन कागजों में सब कुछ ठीक चल रहा है।
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विभागों की लापरवाही उजागर
नगर पालिका, नगर पंचायत, बिजली विभाग, शिक्षा विभाग और उद्योग विभाग ने पौधारोपण के प्रति घोर लापरवाही दिखाई है। इन विभागों ने पौधे लगाने के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई पूरी की। न तो पौधों की देखरेख की गई और न ही उन्हें संरक्षित करने के लिए प्रयास किए गए। कई स्थानों पर तो पौधे लगाए ही नहीं गए।
वन विभाग कार्यालय के पास से गायब हो गए पौधे
वन विभाग के ठीक बगल में 30 के करीब पौधे लगाए गए थे, लेकिन पालिका के कूड़ा डालने के चलते सभी नष्ट हो गए। इसको लेकर वन विभाग में नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बाद न तो पौधे लगाए गए न ही कूड़ा डालना बंद हुआ। इसको लेकर नगर पालिका और वन विभाग के बीच काफी तनातनी मची हुई है।
लापरवाह विभागों पर होगी कार्रवाई
डीएफओ प्रदीप कुमार ने बताया कि जिन विभागों ने पौधारोपण के प्रति उदासीनता दिखाई है, उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। यह भी जांच की जाएगी कि उनके द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कितने पौधे लगाए गए और उनमें से कितने वृक्ष बन पाए। यदि लापरवाही साबित होती है तो इस मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।