{"_id":"65a3967316f5a795ae066e58","slug":"train-not-visible-due-to-fog-two-girl-students-hit-one-dead-one-serious-orai-news-c-224-1-ori1001-9588-2024-01-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jalaun News: कोहरे की वजह से नहीं दिखी ट्रेन, चपेट में आईं दो छात्राएं ,एक की मौत, एक गंभीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jalaun News: कोहरे की वजह से नहीं दिखी ट्रेन, चपेट में आईं दो छात्राएं ,एक की मौत, एक गंभीर
विज्ञापन
उरई। घने कोहरे में कोचिंग पढ़ने जा रहीं दो छात्राएं ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आ गईं। एक छात्रा ट्रेन से कट गई तो दूसरी टक्कर से दूर जा गिरी, उसकी हालत गंभीर है। उसे कानपुर रेफर किया गया है। हादसे के बाद पहुंची पुलिस ने जांच-पड़ताल की।
डकोर कोतवाली क्षेत्र के ऐर गांव के रहने वाले राजकुमार उर्फ राजू अहिरवार की 17 वर्षीय बेटी काजोल शहर के आर्य कन्या इंटर कॉलेज में 12वीं की छात्रा थी। वह अपने छोटे भाई मिथुन के साथ शहर के मोहल्ला इंदिरानगर में किराए पर रहती थी। वहीं, अपनी पढ़ाई की तैयारी कर रही थी।
उसी के साथ पढ़ने वाली हमीरपुर जिले के मुस्करा के रहने वाले परशुराम की 17 वर्षीय बेटी वर्षा भी इंदिरानगर में रहती है। रोज की तरह दोनों सहेलियां शनिवार को भी कोंचिग जा रही थीं। दोनों झांसी-कानपुर रेलवे लाइन अजनारी रोड कबीर आश्रम के पास पहुंचीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रैक पर उन्हें कोहरे की वजह से ट्रेन नजर नहीं आई। खतरे को वे समझ नहीं पाईं और ट्रैक पार करने लगीं। उसी दौरान ट्रेन ने दोनों को चपेट में ले लिया। काजोल की मौके पर ही मौत हो गई। ट्रेन की चपेट में आने से उसका शव क्षत-विक्षत हो गया।
विज्ञापन
वहीं, वर्षा गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसा देख मौके पर स्थानीय लोग पहुंचे और मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। यहां उसकी हालत गंभीर होने पर कानपुर के हायर सेंटर रेफर कर दिया। इस हादसे के बाद से परिवार के लोग सदमे में हैं। कोतवाल वीरेंद्र कुमार पटेल का कहना है कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जांच-पड़ताल की जा रही है।
कहती थी पापा मुझे जाने दो। मैं कमरा लेकर अपने छोटे भाई के साथ रह लूंगी। मुझे पढ़ना है और नर्स बनना है। असहाय लोगों और मरीजों की सेवा और मदद करनी है। आपका भी सहारा बनना है। कब तक आप यू हीं मजदूरी कर हम सबका सहारा बने रहोगे। पोस्टमार्टम हाउस में अपनी बेटी की कही बातों को याद कर अपने आंसू नहीं रोक पा रहे पिता राजू ने कहा कि बेटी काजोल पढ़ाई में बहुत होशियार थी।
पढ़ाई में उसकी रुचि देखकर ही ज्यादा देर तक मना नहीं कर सका। उसे अकेले रहने की इजाजत दे दी। नहीं पता था कि वह फैसला इस मोड़ पर आकर इतना बड़ा सदमा देगा। दो भाइयों में सबसे बड़ी और इकलौती बेटी थी। उसके होने भर से घर में मानों रोशनी सी दौड़ जाती थी। इस हादसे के बाद से उसकी मां ममता बार-बार बेसुध हो रही थीं।
विज्ञापन
डकोर कोतवाली क्षेत्र के ऐर गांव के रहने वाले राजकुमार उर्फ राजू अहिरवार की 17 वर्षीय बेटी काजोल शहर के आर्य कन्या इंटर कॉलेज में 12वीं की छात्रा थी। वह अपने छोटे भाई मिथुन के साथ शहर के मोहल्ला इंदिरानगर में किराए पर रहती थी। वहीं, अपनी पढ़ाई की तैयारी कर रही थी।
विज्ञापन
उसी के साथ पढ़ने वाली हमीरपुर जिले के मुस्करा के रहने वाले परशुराम की 17 वर्षीय बेटी वर्षा भी इंदिरानगर में रहती है। रोज की तरह दोनों सहेलियां शनिवार को भी कोंचिग जा रही थीं। दोनों झांसी-कानपुर रेलवे लाइन अजनारी रोड कबीर आश्रम के पास पहुंचीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रैक पर उन्हें कोहरे की वजह से ट्रेन नजर नहीं आई। खतरे को वे समझ नहीं पाईं और ट्रैक पार करने लगीं। उसी दौरान ट्रेन ने दोनों को चपेट में ले लिया। काजोल की मौके पर ही मौत हो गई। ट्रेन की चपेट में आने से उसका शव क्षत-विक्षत हो गया।
विज्ञापन
वहीं, वर्षा गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसा देख मौके पर स्थानीय लोग पहुंचे और मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। यहां उसकी हालत गंभीर होने पर कानपुर के हायर सेंटर रेफर कर दिया। इस हादसे के बाद से परिवार के लोग सदमे में हैं। कोतवाल वीरेंद्र कुमार पटेल का कहना है कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जांच-पड़ताल की जा रही है।
कहती थी पापा मुझे जाने दो। मैं कमरा लेकर अपने छोटे भाई के साथ रह लूंगी। मुझे पढ़ना है और नर्स बनना है। असहाय लोगों और मरीजों की सेवा और मदद करनी है। आपका भी सहारा बनना है। कब तक आप यू हीं मजदूरी कर हम सबका सहारा बने रहोगे। पोस्टमार्टम हाउस में अपनी बेटी की कही बातों को याद कर अपने आंसू नहीं रोक पा रहे पिता राजू ने कहा कि बेटी काजोल पढ़ाई में बहुत होशियार थी।
पढ़ाई में उसकी रुचि देखकर ही ज्यादा देर तक मना नहीं कर सका। उसे अकेले रहने की इजाजत दे दी। नहीं पता था कि वह फैसला इस मोड़ पर आकर इतना बड़ा सदमा देगा। दो भाइयों में सबसे बड़ी और इकलौती बेटी थी। उसके होने भर से घर में मानों रोशनी सी दौड़ जाती थी। इस हादसे के बाद से उसकी मां ममता बार-बार बेसुध हो रही थीं।