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Jalaun News: तीन हैंड हेल्ड पोर्टेबल एक्सरे मशीनों से हाई-रिस्क गांवों में होगा स्क्रीनिंग अभियान
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उरई। जिला टीबी नियंत्रण इकाई जालौन ने टीबी (क्षय रोग) की जांच और उपचार को और प्रभावी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। जिले को तीन नई हैंड हेल्ड पोर्टेबल एक्सरे मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इनके माध्यम से अब हाई-रिस्क क्षेत्रों में जाकर मौके पर ही मरीजों की जांच की जाएगी।
इन मशीनों के संचालन के लिए संबंधित स्टाफ को प्रशिक्षण भी दे दिया गया है। इनका उपयोग विशेष रूप से संदिग्ध मरीजों की पहचान के लिए किया जाएगा, ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. आनंद प्रकाश वर्मा ने बताया कि जिले में कोंच, नदीगांव, कालपी, माधौगढ़, जालौन, रामपुरा, डकोर और कदौरा ब्लॉकों में टीबी जांच की सुविधा पहले से उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि जांच में 60 प्रतिशत मामलों में बलगम परीक्षण और 40 प्रतिशत मामलों में एक्सरे का उपयोग किया जाता है।
उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेंद्र पचौरी ने बताया कि नई हैंड हेल्ड पोर्टेबल एक्सरे मशीनों के संचालन के लिए सभी संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इससे जांच प्रक्रिया और तेज व प्रभावी हो सकेगी।
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जिले में कुल 246 हाई-रिस्क गांव चिह्नित
डॉ. पचौरी ने बताया कि जिले में कुल 246 हाई-रिस्क गांव चिह्नित किए गए हैं जहां टीबी संक्रमण की आशंका अधिक मानी गई है। ब्लॉकवार डकोर में 56, जालौन में 33, कदौरा में 28, कोंच में 26, कुठौंद में 18, माधौगढ़ में 25, महेबा में 29, नदीगांव में 25 व रामपुरा में आठ गांव शामिल हैं। अभी नगरीय क्षेत्रों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। इन क्षेत्रों में नियमित शिविर लगाकर संभावित मरीजों की जांच की जाएगी। संदिग्ध पाए जाने पर मरीजों को नजदीकी सीएचसी या पीएचसी भेजा जाएगा। शिविरों में एक्सरे टेक्नीशियन, सुपरवाइजर, आशा कार्यकर्ता, एएनएम व सीएचओ की ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके अलावा वृद्धाश्रम, नगरीय मलिन बस्तियों, कारागार, तंबाकू-गुटखा निर्माण क्षेत्रों में भी विशेष जांच शिविर लगाए जाएंगे।
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इन मशीनों के संचालन के लिए संबंधित स्टाफ को प्रशिक्षण भी दे दिया गया है। इनका उपयोग विशेष रूप से संदिग्ध मरीजों की पहचान के लिए किया जाएगा, ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. आनंद प्रकाश वर्मा ने बताया कि जिले में कोंच, नदीगांव, कालपी, माधौगढ़, जालौन, रामपुरा, डकोर और कदौरा ब्लॉकों में टीबी जांच की सुविधा पहले से उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि जांच में 60 प्रतिशत मामलों में बलगम परीक्षण और 40 प्रतिशत मामलों में एक्सरे का उपयोग किया जाता है।
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उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेंद्र पचौरी ने बताया कि नई हैंड हेल्ड पोर्टेबल एक्सरे मशीनों के संचालन के लिए सभी संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इससे जांच प्रक्रिया और तेज व प्रभावी हो सकेगी।
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जिले में कुल 246 हाई-रिस्क गांव चिह्नित
डॉ. पचौरी ने बताया कि जिले में कुल 246 हाई-रिस्क गांव चिह्नित किए गए हैं जहां टीबी संक्रमण की आशंका अधिक मानी गई है। ब्लॉकवार डकोर में 56, जालौन में 33, कदौरा में 28, कोंच में 26, कुठौंद में 18, माधौगढ़ में 25, महेबा में 29, नदीगांव में 25 व रामपुरा में आठ गांव शामिल हैं। अभी नगरीय क्षेत्रों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। इन क्षेत्रों में नियमित शिविर लगाकर संभावित मरीजों की जांच की जाएगी। संदिग्ध पाए जाने पर मरीजों को नजदीकी सीएचसी या पीएचसी भेजा जाएगा। शिविरों में एक्सरे टेक्नीशियन, सुपरवाइजर, आशा कार्यकर्ता, एएनएम व सीएचओ की ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके अलावा वृद्धाश्रम, नगरीय मलिन बस्तियों, कारागार, तंबाकू-गुटखा निर्माण क्षेत्रों में भी विशेष जांच शिविर लगाए जाएंगे।