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Jalaun News: अपने सांसद को जानते नहीं थे ग्रामीण, कैसे जिता देते
Wed, 05 Jun 2024 02:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Wed, 05 Jun 2024 02:16 AM IST
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आटा। लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी भानू प्रताप वर्मा की हार की सबसे बड़ी वजह बीहड़ क्षेत्र में कच्ची सड़कें, स्वास्थ्य सेवाएं व पानी की समस्या रही। कालपी क्षेत्र के परासन के मजरा अलमोरीडेरा के मतदाताओं ने चार किलोमीटर कच्ची सड़क को लेकर चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। वहां के 669 मतदाताओं ने एक भी मतदाता ने वोट नहीं डाला था।
अलमोरीडेरा के मतदाताओं का कहना था कि भाजपा प्रत्याशी पिछले पांच साल में हमारे गांव में झांकने तक नही आए। अलमोरीडेरा में सबसे अधिक निषाद मतदाता है। जोकि सभी चुनावों में भाजपा के प्रत्याशी के लिए मतदान करते आए हैं।
इसी तरह कालपी क्षेत्र और महेवा ब्लाक के ग्राम नसीरपुर के मतदाताओं ने तीन किलोमीटर कच्ची सड़क को लेकर चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। जब प्रशासन को जानकारी हुई तो कालपी एसडीएम और सीओ कालपी ने नसीरपुर के ग्रामीणों को मतदान के लिए समझाया पर गुस्साए ग्रामीणों ने किसी की बात नहीं मानी, तभी आलाधिकारियों के कहने पर ग्राम प्रधान ने अपना मत डाला। इससे 1413 मतदाता वाले गांव में सिर्फ 5 वोट पड़े थे। क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक गांव ऐसे हैं। जो 21 वीं सदी में भी मूलभूत सुविधाओं के बारे में तरस रहे हैं। इन गांव की जनता ने अपने सांसद को 25 साल में देखा तक नहीं है। ये छोटे-छोटे मुद्दे, जनता को रोष भाजपा प्रत्याशी पर भारी पड़ा।
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अलमोरीडेरा के मतदाताओं का कहना था कि भाजपा प्रत्याशी पिछले पांच साल में हमारे गांव में झांकने तक नही आए। अलमोरीडेरा में सबसे अधिक निषाद मतदाता है। जोकि सभी चुनावों में भाजपा के प्रत्याशी के लिए मतदान करते आए हैं।
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इसी तरह कालपी क्षेत्र और महेवा ब्लाक के ग्राम नसीरपुर के मतदाताओं ने तीन किलोमीटर कच्ची सड़क को लेकर चुनाव का बहिष्कार कर दिया था। जब प्रशासन को जानकारी हुई तो कालपी एसडीएम और सीओ कालपी ने नसीरपुर के ग्रामीणों को मतदान के लिए समझाया पर गुस्साए ग्रामीणों ने किसी की बात नहीं मानी, तभी आलाधिकारियों के कहने पर ग्राम प्रधान ने अपना मत डाला। इससे 1413 मतदाता वाले गांव में सिर्फ 5 वोट पड़े थे। क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक गांव ऐसे हैं। जो 21 वीं सदी में भी मूलभूत सुविधाओं के बारे में तरस रहे हैं। इन गांव की जनता ने अपने सांसद को 25 साल में देखा तक नहीं है। ये छोटे-छोटे मुद्दे, जनता को रोष भाजपा प्रत्याशी पर भारी पड़ा।
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