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बारिश से लाही भी मुरझाई, कम उपज होने से किसान परेशान
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सिरसाकलार में लाही के खेत में खड़ा किसान।
- फोटो : ORAI
सिरसा कलार। अन्ना मवेशियों से फसलों की रखवाली करने के बाद भी किसानों के हाथ कुछ नहीं लग रहा है। कारण है बार-बार होने वाली बारिश और बादल। गेहूं और मटर की तरह लाही भी बेमौसम बारिश का शिकार हुई है। क्षेत्र में पिछली साल की अपेक्षा इस साल लाही की उपज कम हुई है। जिससे किसानों के चेहरे भी मुरझाए हुए हैं।
बता दें कि लाही तिलहन में मुख्य फसल है। किसानों की मानें तो लाही समय से बोई गई थी। जिसका कारण बार-बार होने वाली बारिश, बदली व कोहरा है। जिससे लाही के फूल में नुकसान हुआ है। पिछले साल बेमौसम बारिश नहीं हुई थी। जिससे फसल ठीक हुई थी। किसानों का कहना है कि घर गृहस्थी में लाही के मीठे तेल की जरूरत पड़ती है। इस साल लाही केवल घर के लिए ही हो पा रही है। बेचने वाली स्थिति नजर नहीं आ रही है। किसान बृजेंद्र सिंह ग्राम जखा का कहना है कि हमारे आसपास लाही का औसत इस वर्ष तीन क्विंटल प्रति बीघा से ऊपर नहीं हो रही है जबकि डीएपी 1 बोरी प्रति क्विंटल डाली गई।
किसान अहिबरन यादव का कहना है कि आठ बीघा में लाही बोई थी, पैदावार काफी कम हुई है। मुश्किल से पूरा खर्च निकल पाएगा। किसानों का कहना है कि कितनी मेहनत से फसल की बुवाई और रखवाली की गई थी और कुछ भी हाथ नहीं लग रहा है। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ राजीव कुमार कुमार सिंह का कहना है कि कोहरे और बारिश से लाही का फूल खत्म होता है। जिससे फफूंद लग जाती है और उपज प्रभावित होती है। किसानों को चाहिए कि सही मात्रा में डीएपी डाली जाए और समय समय पर कीटनाशक डाला जाए तो फसल को खराब होने से बचाया जा सकता है।
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बता दें कि लाही तिलहन में मुख्य फसल है। किसानों की मानें तो लाही समय से बोई गई थी। जिसका कारण बार-बार होने वाली बारिश, बदली व कोहरा है। जिससे लाही के फूल में नुकसान हुआ है। पिछले साल बेमौसम बारिश नहीं हुई थी। जिससे फसल ठीक हुई थी। किसानों का कहना है कि घर गृहस्थी में लाही के मीठे तेल की जरूरत पड़ती है। इस साल लाही केवल घर के लिए ही हो पा रही है। बेचने वाली स्थिति नजर नहीं आ रही है। किसान बृजेंद्र सिंह ग्राम जखा का कहना है कि हमारे आसपास लाही का औसत इस वर्ष तीन क्विंटल प्रति बीघा से ऊपर नहीं हो रही है जबकि डीएपी 1 बोरी प्रति क्विंटल डाली गई।
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किसान अहिबरन यादव का कहना है कि आठ बीघा में लाही बोई थी, पैदावार काफी कम हुई है। मुश्किल से पूरा खर्च निकल पाएगा। किसानों का कहना है कि कितनी मेहनत से फसल की बुवाई और रखवाली की गई थी और कुछ भी हाथ नहीं लग रहा है। वहीं कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ राजीव कुमार कुमार सिंह का कहना है कि कोहरे और बारिश से लाही का फूल खत्म होता है। जिससे फफूंद लग जाती है और उपज प्रभावित होती है। किसानों को चाहिए कि सही मात्रा में डीएपी डाली जाए और समय समय पर कीटनाशक डाला जाए तो फसल को खराब होने से बचाया जा सकता है।

कृषि वैज्ञानिक।- फोटो : ORAI
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