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जल संस्थान ने शुरू किया सीवेज व्यवस्था में सुधार

Fri, 03 Jun 2016 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
अमर उजाला ब्यूरो, उरई Updated Fri, 03 Jun 2016 11:23 PM IST
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The institute began to improve water sewerage system
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट देखते अधिशासी अभियंता जल संस्थान - फोटो : अमर उजाला
नगर में सीवेज की व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के लिए जल संस्थान के अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू कर दी है। शुक्रवार को अधिशासी अभियंता मनोज कुमार आर्य ने नगर में ओवर फ्लो सीवर चेंबरों का जायजा लेने के बाद गांधीनगर स्थित ट्रीटमेंट प्लांट का भी निरीक्षण किया। उनका मेन फोकस ट्रीटमेंट प्लांट में भरी गंदगी को साफ कराने पर रहा। इसके
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लिए हर जरूरी संसाधन जुटाने के निर्देश भी दिए।  गुरुवार को जिला मुख्यालय पर डीएम संदीप कौर की बैठक में पालिका प्रशासन कोंच की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे पालिका चेयरपर्सन विज्ञान विशारद सीरौठिया ने सीवर की दयनीय दशा की बात रखी थी। इस पर डीएम ने एक्सईएन जल संस्थान मनोज कुमार आर्य को सीवर की खामियों को मौके पर
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देखकर सुधार करने को कहा था। इस पर शुक्रवार को कोंच आए अधिशासी अभियंता ने कस्बे में कई जगह सीवर के ओवरफ्लो चेंबरों का जायजा लेने के बाद गांधीनगर में बने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का भी मुआयना किया। यहां उन्हें जानकारी मिली कि अपर्याप्त संसाधनों से ट्रीटमेंट प्लांट सीवर लाइनों की गंदगी नहीं खींच पा रहा है। उन्होंने अधीनस्थों को निर्देश दिए
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कि हर जरूरी उपकरण या अन्य चीजें हस्तगत करके सबसे पहले प्लांट में भरा मलबा निकालने की कोशिश करें। उन्होंने बताया कि वह पुराना सिस्टम चालू कराने का प्रयास कर रहे ह। इसके बाद पुराने पाइपों को हटा कर नए लगाए जाएंगे। इतना हो जाने के बाद उम्मीद है कि यहां की सीवर समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाएगा।

‘संपवैल में आठ इंच व्यास से अधिक की क्षमता की मोटर लगे’
कोंच की साढ़े चार दशक पुरानी लगभग 32 किमी लंबाई में पसरी सीवेज व्यवस्था दरअसल अब रखरखाव के अभाव में अभिशाप बन गई है। तकनीकी खामियों से ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था फेल है। इस स्थिति को देखते हुए पालिका चेयरपर्सन विनीता सीरौठिया ने महाप्रबंधक झांसी डिवीजन जल संस्थान को पत्र लिख कर मांग की है कि यहां संपवैल का जब


निर्माण हुआ उस वक्त यहां की आबादी 35 से 30 हजार के बीच थी। अब आबादी तीन से चार गुना बढ़ गई है और व्यवस्था पुराने हिसाब से होने के कारण ध्वस्त हो चुकी है। हा है कि दो इंच की क्षमता की मोटरें नाकाफी हैं। कम से कम आठ इंच या इससे अधिक व्यास की क्षमता की मोटरें लगवाई जाएं।
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