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सुरक्षा के बजाए हादसे के सबब बने ब्रेकर

Fri, 05 Aug 2016 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
अमर उजाला ब्यूरो, उरई Updated Fri, 05 Aug 2016 12:02 AM IST
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The incident became a cause rather than security breaker
शहर के राजेंद्र नगर में सड़क पर बने बडे़-बडे़ ब्रेकर। - फोटो : अमर उजाला

उरई (जालौन)। तेजरफ्तार वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लोगों ने खुद ही बेतरतीब स्पीड ब्रेकर बनवा लिए हैं। ये हादसे रोकने के बजाए हादसे का सबब बनते जा रहे हैं। दो दिन पहले ही शहर के चुर्खी रोड पर बने स्पीड ब्रेकर पर बाइक पर बैठी महिला उछलकर गिर गई। इससे उसकी जान चली गई। जिले के प्रमुख अंधे मोड़ों पर साइन बोर्ड न लगा होने से अक्सर हादसे होते रहते हैं। इन पर पीडब्लूडी के अफसर भी ध्यान नहीं देते हैं। अवैध स्पीड ब्रेकरों व अंधे मोड़ों की पड़ताल संजीव श्रीवास्तव ने की। पेश है उनकी रिपोर्ट-

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केस-1
डकोर थाना क्षेत्र में करीब तीन ऐसे अंधे मोड़ है जहां आए दिन हादसे होते रहते हैं। इनमें मुहम्मदाबाद में बंधौली रोड पर के पास अंधा मोड़ भी शामिल है। यहां ग्रामीणों ने अवैध तरीके से ब्रेकर बना लिया था। वहीं अंधा मोड़ होने के बावजूद यहां पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से कोई संकेतक नहीं लगाया गया। इससे वहां आए दिन बाइक सवार हादसे का शिकार हो जाते हैं। कुसमिलिया गांव के  मंदिर के पास भी एक अंधा मोड़ है जहां कोई संकेतक नहीं लगाया गया है। डकोर नहर के पास भी एक अंधा मोड़ है। वहां नहर में अब तक कई वाहन जा चुके हैं और अब तक करीब चार लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। इसके बावजूद यहां संकेतकों को नहीं लगाया गया। इनमें बीते वर्ष मुकुट सिंह निवासी डकोर, आशू सिंह निवासी जैसारी खुर्द, गुड़ीराम व छोटू निवासी जैसारी खुर्द अपने गांव के बाहर ही मोड़ पर हादसे में मौत हो चुकी है। इसी तरह कुसमिलिया के अंधे मोड़ पर महिला कांति को ट्रक ने रौंद दिया था उसकी मौके  पर ही मौत हो गई थी। इधर, मुहम्मदाबाद गांव के बाहर मोड़ पर छात्रा नेहा वर्मा की इसी साल ट्रक ने स्कूल जाते वक्त रौंद दिया था। हादसाें के बाद भी पीडब्लू विभाग नहीं चेता और अब तक संकेतक तक नहीं लगाए गए हैं।   
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केस-2
इसी तरह जालौन कोतवाली क्षेत्र के गांव कैथ नहर के पास मोड़ है। नहर पर पुलिया नहीं बनी होने से रात के समय में बाइक सवार आ जा नहीं पाते। यहां भी कोई संकेतक न होने से आएदिन हादसे होते रहते हैं। बीते साल रामपुरा थाना क्षेत्र के दो युवक बाइक समेत नहर में गिर गए थे। इसमें एक युवक की मौत हो गई थी। ग्रामीण सुनील कुमार, राधेश्याम आदि ने बताया कि कई बार आला अधिकारियाें से शिकायत के बाद भी पुलिया पर दीवार नहीं बनाई गई। इसके अलावा कोई संकेतक भी नहीं लगाया गया। अब तो ग्रामीण इसे खूनी पुलिया तक कहने लगे हैं।
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केस-3
शहर कोतवाली क्षेत्र में चुर्खी रोड पर बने अवैध ब्रेकरों की भरमार है। सिरसाकलार थाना क्षेत्र के गांव पिथऊपुर निवासी एक महिला इन ब्रेकरों पर गाड़ी के उछलने से जान से हाथ गवां चुकी है। वह अपने पुत्र के साथ बाजार कर घर जा रही थी तभी यह हादसा हो गया। यहां राठ रोड से लेकर मोहल्लाें तक में कई अवैध ब्रेकर बनाए गए हैं। इन पर बाइक उछलने से आए दिन हादसे होते रहते है। राजेंद्र नगर बंबी रोड पर तो इतने ब्रेकर हैं कि चलना भी दूभर हो जाता है।

क्या हैं ब्रेकर बनाने के नियम
ब्रेकर बनाने के लिए विभागीय परमीशन लेनी होती है। स्कूल के आसपास ब्रेकर बनाए जा सकते हैं। इसके लिए वहां पर विभाग को ब्रेकर का संकेतक लगाना आवश्यक है। इसके अलावा रेलवे क्रासिंग पर स्पीड ब्रेकर बनाए जा सकते हैं।


फोटो एसपी
क्या कहते हैं जिम्मेदार
एसपी अशोक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पीडब्लूडी अधिकारियाें के साथ बैठक कर जहां पर स्पीड ब्रेकर आवश्यक है वहां संकेतक लगवाने के लिए कहेंगे। इसके अलावा जहां भी लोगाें ने अवैध तरीके से ब्रेकर बनाए गए हैं उनको खुदवाया जाएगा।

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