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Jalaun News: कालपी में विनोद चतुर्वेदी के पाला बदलने से बदलेगा चुनावी गणित

Sat, 10 Oct 2026 12:57 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 12:57 AM IST
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The electoral arithmetic in Kalpi will shift due to Vinod Chaturvedi switching sides.
फोटो - 08 सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करते कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी। सोशल मीडिया।
उरई। कालपी की सियासत में विनोद चतुर्वेदी के भाजपा में शामिल होने से बड़ा उलटफेर होने के आसार हैं। सपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतने वाले चतुर्वेदी अब भाजपा के साथ नई राजनीतिक पारी शुरू करने जा रहे हैं। उनके पाला बदलने से 2027 के विधानसभा चुनाव की तस्वीर बदल सकती है। भाजपा को जहां अपने जनाधार के साथ चतुर्वेदी के व्यक्तिगत समर्थकों को जोड़ने का मौका मिलेगा, वहीं सपा के सामने अपनी जीती हुई सीट बचाने की चुनौती होगी। हालांकि, इस बदलाव का वास्तविक असर टिकट के फैसले, स्थानीय नेताओं की भूमिका और मतदाताओं के रुख से तय होगा।
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कालपी विधानसभा सीट के पिछले चुनाव परिणाम बताते हैं कि यहां जीत के लिए मामूली अंतर भी निर्णायक साबित हो सकता है। वर्ष 2022 में सपा के विनोद चतुर्वेदी को 69,782 वोट मिले थे, जबकि भाजपा गठबंधन के निषाद पार्टी प्रत्याशी छोटे सिंह को 66,966 वोट मिले। बसपा के श्याम पाल उर्फ चुन्ना पाल भी 64,683 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। चतुर्वेदी ने छोटे सिंह को 2,816 वोटों से हराया था।
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इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पिछले चुनाव में किसी भी प्रत्याशी को निर्णायक बढ़त नहीं मिली थी। अब चतुर्वेदी के भाजपा में आने से मुकाबले का समीकरण बदल सकता है। उनके समर्थकों के साथ भाजपा के परंपरागत मतदाताओं का कितना तालमेल बनता है, यह आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण होगा। दूसरी ओर, सपा का नया प्रत्याशी चतुर्वेदी के व्यक्तिगत जनाधार में कितनी सेंध लगा पाता है, इस पर भी नजर रहेगी।
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भाजपा में बढ़ेगी टिकट की दावेदारी की हलचल

चतुर्वेदी की भाजपा में एंट्री के बाद सबसे बड़ा सवाल टिकट को लेकर है। वर्ष 2022 में भाजपा गठबंधन की ओर से छोटे सिंह चुनाव मैदान में थे। ऐसे में चतुर्वेदी के आने के बाद पुराने दावेदारों और नए राजनीतिक समीकरणों के बीच तालमेल बैठाना पार्टी के लिए अहम होगा। यदि भाजपा चतुर्वेदी पर भरोसा जताती है तो उन्हें संगठन और स्थानीय नेताओं को साथ लेकर चलने की चुनौती होगी। वहीं, किसी दूसरे दावेदार को टिकट मिलने की स्थिति में चतुर्वेदी के समर्थकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।


सपा के सामने मजबूत प्रत्याशी उतारने की चुनौती

विनोद चतुर्वेदी के जाने से सपा को कालपी में अपनी रणनीति नए सिरे से तैयार करनी पड़ सकती है। पार्टी के सामने ऐसा प्रत्याशी चुनने की चुनौती होगी, जो पुराने समर्थकों को एकजुट रखने के साथ नए मतदाताओं को भी आकर्षित कर सके। बसपा का पिछला प्रदर्शन भी इस सीट पर अहम है। यदि बसपा अपना मजबूत जनाधार बनाए रखती है तो मुकाबला फिर त्रिकोणीय हो सकता है।
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